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गेंदे के फूल के औषधीय गुण, कई बीमारियों का रामबाण इलाज

गेंदे के फूल के औषधीय गुण, कई बीमारियों का रामबाण इलाज

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गेंदे के फूल

गेंदे के फूल के औषधीय गुण – गेंदे का पौधा अपने सुन्दर आकर्षक फूलों और पत्तियों के कारण जाना जाता है। इसके फूल से तेज खुशबू निकलती है, जिसकी वजह से घरों और बगानों में गेंदा के फूलों को लगाया जाता है। गेंदा के पीले-पीले फूल लगभग हर घर में पाए जाते हैं। यह जितना खूबसूरत होता है उतना ही यह आपके शरीर के लिए फायदेमंद भी होता है। आयुर्वेद के अनुसार, गेंदा के कई सारे औषधीय गुण हैं, और यह एक जड़ी-बूटी भी है।

ये फूल आसानी से बढ़ते हैं, इसमें कीट और रोग की समस्याएं कम होती हैं. सिर दर्द, सूजन, दांत दर्द, घाव और अन्य कई त्वचा की समस्याओं जैसे औषधीय प्रयोजनों के लिए गेंदा अत्यधिक मूल्यवान हैं. इसके अलावा, उनका उपयोग खाना पकाने में किया गया है. ऐसा कहा जाता है कि गेंदा के फूल की उत्पत्ति मिस्र में हुई थी और रोमनों ने सबसे पहले इसे ब्रिटेन और अन्य देशों में पेश किया था. प्राचीन यूनानियों ने सजावट और अन्य उद्देश्यों जैसे मेकअप, रंग भरने वाले भोजन ( सूप, पुडिंग आदि) के लिए गेंदा की पंखुड़ियों का इस्तेमाल किया. इसकी पंखुड़ियों का उपयोग कई लोग खाना बनाने के लिए भी करते है.
ऐसे में आइए आज हम आपको गेंदा के फूल के फायदों के बारे में बताते है –

गेंदा के औषधीय उपयोग

गेंदा का उपयोग जलन, घाव और चकत्ते जैसी त्वचा की समस्याओं का इलाज करने के लिए किया जाता है. इसका पेस्ट त्वचा पर लगाने से सूजन, लालिमा, संवेदनशीलता, सूखापन और सूजन कम होता है.

शरीर के विषैले तत्वों से बचाव

यह शरीर में जमा सभी विषैले तत्वों को हटाकर शरीर की डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया में मदद करता है. इसके साथ ही पाचन तंत्र को लाभ पहुँचाने के साथ -साथ जलन और सूजन को कम करने में भी मदद करता है.

मासिक – धर्म के दर्द से राहत

गेंदा का फूल महिला प्रजनन प्रणाली में मासिक धर्म के दर्द और ऐंठन से राहत दिलाने में काफी ज्यादा सहायक माना गया हैं.

त्वचा की स्थिति

गेंदे के फूल का उपयोग इसके विरोधी भड़काऊ गुणों के कारण त्वचा समस्याओं को कम करने में भी किया जाता है. इसका तेल, हमारी त्वचा को यूवीबी विकिरण से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करता है. इसके अलावा, 2018 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, यह पाया गया कि मैरीगोल्ड मेथनॉल अर्क में पॉलीफेनोल के उच्च स्तर होते हैं, जो त्वचा को एंटी-एजिंग प्रभाव प्रदान करते हैं.

मच्छरों, कीड़ों को दूर भगाता

इसकी मजबूत गंध, एंटीऑक्सिडेंट तत्व प्राकृतिक रूप से मच्छरों, कीटों और अन्य कीड़ों को दूर भगाने के लिए किया जा सकता है. इस वजह से, मैरीगॉल्ड्स को घर के बगीचों में लगाया जाता है और मोमबत्तियों में अर्क के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है.

गेंदा के पौधे के फायदे और उपयोग 

  • गेंदे के फूल की कली को पीस लें। इसे आंखों के बाहर चारों तरफ लगाएं। इससे आंखों की बीमारी जैसे आंखों के फूलने आदि में लाभ होता है।
  • गेंदा के पत्ते के रस को आंखों के बाहर चारों तरफ लगाने से भी आंखों के रोग में लाभ होता है।
  • नाक से खून बहने पर भी गेंदा के पौधे के औषधीय गुण से फायदा मिलता है।  इसके लिए 1 से 2 बूंद गेंदा के पत्ते के रस को नाक में डालें। इससे नाक से खून बहना बंद हो जाता है।
  • सांसों की नलि में सूजन होने पर आप गेंदा से लाभ ले सकते हैं। गेंदा के पौधे से बने 15-20 मिली शीत-कषाय (ठंडे पानी में रात भर रखा गया रस) का सेवन करने से श्वसन नलि में सूजन होने  में लाभ होता है।
  • कान में दर्द हो तो गेंदा का औषधीय गुण फायदेमंद होता है। 2-2 बूंद गेंदा के पत्ते के रस को कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है।
  • खांसी के इलाज के लिए गेंदा के फूल का इस्तेमाल कर सकते हैं। गेंदे के फूल के बीजों की घुंडी (पुष्पधार Receptacle) का चूर्ण बना लें। 2-5 ग्राम चूर्ण में, 10 ग्राम शक्कर और एक चम्मच दही मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करें। इससे खांसी और सांसों के रोग में लाभ होता है।
  • महिलाएं स्तनों की सूजन की समस्या में गेंदा का उपयोग कर सकते हैं। गेंदे के पत्तों को पीसकर स्तनों पर लगाएं। इसके साथ ही इससे सिकाई करने से स्तनों की सूजन कम होती है।
  • बवासीर के उपचार के लिए भी गेंदा का प्रयोग फायदेमंद होता है। इसके लिए 10 ग्राम गेंदे के पत्ते और 2 ग्राम काली मिर्च को एक साथ पीस लें। इसे पीने से बवासीर में लाभ होता है।
  • 5-10 ग्राम गेंदा के फूल को घी में भूनकर दिन में तीन बार लें। इससे बवासीर में होने वाले रक्तस्राव या खूनी बवासीर में फायदा मिलता है।
  • गेंदे के पत्तों का अर्क निकालकर पिएं। इससे बवासीर में बहने वाला रक्त तुरन्त बंद हो जाता है। आप अर्क निकालने के लिए 250 ग्राम गेंदे के पत्ते और केले की दो किलो जड़ लें। इनको रात में पानी में भिगो दें और सुबह अर्क निकाल लें। इस अर्क को 15-20 मिली की मात्रा में सेवन करें।
  • 5-10 ग्राम गेंदा के फूल के रस को दिन में दो तीन बार सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।
  • सुजाक के उपचार के लिए 10 ग्राम गेंदे के पत्ते और 2 ग्राम काली मिर्च लें। दोनों को एक साथ पीसकर पिएं। इससे सूजाक में लाभ होता है।
  • गेंदे के पंचांग का रस निकालकर चोट-मोच और सूजन वाले स्थान पर लगाने से आराम मिलता है।
  • पत्ते के रस को लगाने से घाव और घाव से होने वाला रक्तस्राव बंद हो जाता है।
  • गेंदे के पत्तों को पीसकर फोड़े-फून्सी और घाव पर लगाने से आराम होता है। बवासीर के मस्सों पर भी लगाने से आराम मिलता है।
  • गेंदा के पत्ते को पीसकर गुनगुना करके लेप करें। इससे फोड़े-फुन्सी या डायबिटीज की अवस्था में होने वाले फोड़े-फुन्सी में लाभ होता है।
  • गेंदे के 10 ग्राम पत्तों के रस में मिश्री मिलाकर दिन में तीन बार पिएँ। ने से रुका हुआ पेशाब खुलकर आ जाता है। उपाय करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर परामर्श लें।
  • 5-10 ग्राम गेंदा के फूल को घी में भूनकर दिन में तीन बार दें। इससे मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव या बवासीर के दौरान रक्तस्राव की समस्या में फायदा होता है।

गेंदा को इतनी मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिएः-

  • चूर्ण- 5-10 ग्राम
  • काढ़ा- 15-20 मिली

लेकिन किसी बीमारी के लिए गेंदा का सेवन करने या गेंदा का उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर सलाह लें।

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This Post Has One Comment

  1. Rahul

    Nice

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