You are currently viewing दमा, अस्थमा, खांसी जुकाम और साँस की बीमारियों में फायदेमंद होता है दालचीनी

दमा, अस्थमा, खांसी जुकाम और साँस की बीमारियों में फायदेमंद होता है दालचीनी

Spread the love

वातावरण में इतना प्रदुषण फ़ैल गया है  जिसके कारण कभी कभी सांस लेने में भी तकलीफ होने लगती है, कभी कभी ये समस्या इतनी बढ़ जाती है की अस्थमा की बीमारी हो जाती है. अस्थमा की बीमारी में  सांस लेते समय आवाज आना,सांस फूलना,बहुत खांसने पर कफ आना,सांस लेने में परेशानी होना,दम घुटना आदि समस्याएँ होने लगती है, आज हम आपको कुछ ऐसे आहारों के बारे में बताने जा जिनके सेवन से अस्थमा की बीमारी में आराम मिल सकता है.

पिछले दो दशकों में दमा या अस्थमा ने अपने पैर बड़े ही तेज़ी से पसारे हैं। अस्थमा किसी भी उम्र के इंसान को हो सकता हैं चाहे वो बूढ़ा हो, या बच्चा। आमतौर पर दमा का इलाज श्वास नलिका के सूजन की रोकथाम और मांसपेशियों को आराम देने पर ही केन्द्रित रहता है। दमा होने के कई कारण हो सकते हैं। कई लोगों में यह धूल और परागकण आदि की एलर्जी, मौसम में आए बदलाव, कई तरह के खाद्य पदार्थ, दवाइयों, इत्र, परफ्यूम जैसी खुशबू और कई अन्य वजहों से हो सकता है। इस रोग की जानकारी या कारकों को बारीकी से समझने के बजाए इससे निपटने के उपायों पर इस लेख को केंद्रित किया जा रहा है।

तो दोस्तों पहला उपाय हैं दालचीनी से । साबुत दालचीनी आपको पंसारी की दूकान से मिल जाएगी लेकिन इसका उपयोग करते समय ध्यान रखें की ये पाउडर यानि चूर्ण के रूप में हो

दालचीनी का उपयोग आप गुड के साथ कीजिये। 1 चम्मच दालचीनी पाउडर लेकर उसमे गुड का चुरा करके मिलाईये और फिर जब ये दोनों चीजें अच्छी तरह से आपस में मिल जाएँ तो आप इसे धीरे धीरे चबा-चबाकर खाइए और जब पूरा मिश्रण आप खा लें तो फिर ऊपर से थोडा गुनगुना पानी पीजिये…. ऐसा आप दिन में दो से तीन बार करेंगे तो इसका बहुत ही अद्भुत परिणाम मिलेगा।

इसके अलावा आप दालचीनी के पाउडर को शहद में मिलकर भी ले सकते हैं । १ चम्मच शहद के साथ आप १ चम्मच दालचीनी के पाउडर को अच्छी तरह से मिलाइए और फिर धीरे धीरे चबाकर खाइए और १० मिनट बाद आप गुनगुना पानी पीजिये । दोस्तों वैसे तो आप दालचीनी के पत्ते या छाल को दाल बनाते समय डालकर भी उपयोग में ले सकते हैं लेकिन इसका लाभ उतना नहीं मिलता है जितना इसको गुड या शहद के साथ मिलाकर खाने से मिलता है । ये उपाय न सिर्फ अस्थमा में लाभकारी है बल्कि इसके साथ साथ ये प्रयोग कफ और वात के 50 अन्य रोगों को भी जड़ से समाप्त कर देगा ।

2. अब दूसरा उपाय – सुहागा लाके तवा पर सेक लो चुटकी भर 2 चम्मच पानी के साथ दिन मे 3बार लो खाना खाने के बाद 10 दिन में आपकी सारी बिमारी ठीक हो जाएगी मुझे 12 साल से नजला और दमा की बीमारी थी मे अब ठीक हूँ दवाई पंसारी की दुकान पर मिलेगी 50 रूपये की

एक पका हुआ और बिना छिला हुआ केला लीजिये और उसे लम्बाई में चाक़ू से चीरा लगाकर 1 छोटा चम्मच या 2 ग्राम बारीक पिसी हुई काली मिर्च मिला दें फिर उसमे बिना छिले ही केले के पत्ते में लपेट कर और डोरी से बांधकर 2-3 घंटे के लिए रख दें बाद में केले के पत्ते (छिलके) सहित उसे आग में इस प्रकार भूने की केले का केवल छिलका ही जले और केले का अन्दर का भाग ना जले । इसके बाद केले के ठंडा होने पर केले का छिलका उतार कर केले को खा लें। हर रोज आप केले में काली मिर्च का चूर्ण भरें और शाम को इसको भूनें और फिर केले को खाएं । ये उपाय आपको 15 से 20 दिन तक करना है । 15 से 20 दिन तक इस उपाय को करने से ही दमा या श्वास की बीमारी का नामो निशान मिट जायेगा।

3. तीसरा उपाय:- इस उपाय में आपको पिसी हुई हल्दी और फिटकरी लेनी है। सबसे पहले आप फिटकरी का टुकड़ा लें और उसे भूनें । भूनने से फिटकरी फैल जाती है और पाउडर जैसी बन जाती है और यदि कुछ मोटा हिस्सा बच जाये तो उसको भी कूट लें । इसके बाद आधा चम्मच पिसी हुई हल्दी फिटकरी के पाउडर में डालकर अच्छी तरह मिला लें । अब इस मिश्रण की 1 चम्मच मात्रा लेकर अच्छे से चबाएं और फिर निगल लें फिर थोड़ी देर बाद गुनगुना पानी पी लें । इस उपाय से आपके फेफड़ों में जो अवरोध है वो समाप्त हो जायेगा। इस प्रयोग को आपको सवेरे खाली पेट और या फिर भोजन करने से पहले करना है और इस प्रयोग को आपको प्रतिदिन तब तक करते रहना है जब तक आपकी दमे की समस्या पूरी तरह से समाप्त न हो जाये।

4. चौथा उपाय :- तुलसी के कुछ पत्ते शहद और काली मिर्च में भिगोकर रख दें। तीन से चार घंटे इन्हें भिगोया रहने दें और फिर पत्तों को चबा लें। इससे दमा का दौरा पड़ने की आशंका बेहद कम हो जाएगी।

5. पांचवा उपाय :- दमा के इलाज में लहसुन काफी फायदेमंद साबित होता है। आप 30 मिली लीटर दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का सेवन करें। हर रोज सेवन करने से दमा में शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है।
इसके साथ ही अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है। सबेरे और शाम इस चाय का सेवन करने से मरीज को फायदा होता है।

6. छठा उपाय :- 125 मिली लीटर पानी में 4-5 लौंग डालकर 5 मिनट तक उबालें और फिर इस मिश्रण को छानकर इसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाएँ और गरम-गरम पी लें। हर रोज दो से तीन बार यह काढ़ा बनाकर पीने से मरीज को निश्चित रूप से लाभ होता है।

7. सातवाँ उपाय :- 180 मिली लीटर पानी में मुट्ठीभर सहजन की पत्तियां मिलाकर करीब 5 मिनट तक उबालें। अब मिश्रण को ठंडा होने दें…. फिर उसमें चुटकीभर नमक, कालीमिर्च और नीबू रस मिलकर पियें । इस सूप का नियमित रूप से इस्तेमाल दमा उपचार में लाभदायक माना गया है।

8. आठवाँ उपाय :- अदरक का एक चम्मच ताजा रस, एक कप मैथी के काढ़े और स्वादानुसार शहद इस मिश्रण में मिलाएं। दमे के मरीजों के लिए यह मिश्रण लाजवाब साबित होता है। मैथी का काढ़ा तैयार करने के लिए एक चम्मच मैथीदाना और एक कप पानी उबालें। हर रोज सबेरे-शाम इस मिश्रण का सेवन करने से निश्चित लाभ मिलता है।

9. नौंवा उपाय:- दो छोटे चम्मच आंवला का पावडर एक कटोरी में ले और उसमें एक छोटा चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें। हर रोज सुबह इस मिश्रण का सेवन करें।

10. दसवां उपाय:- आवश्यकता के अनुसार सरसों के तेल में कपूर डालकर अच्छी तरह से गर्म करें। उसको एक कटोरी में डालें। फिर वह मिश्रण थोड़ा-सा ठंडा हो जाने के बाद सीने और पीठ में मालिश करें। दिन में कई बार से इस तेल से मालिश करने पर दमा के लक्षणों से कुछ हद तक आराम मिलता है। इसके अलावा गरमागरम कॉफी पीने से भी दमा के रोगी को आराम मिलता है। क्योंकि यह श्वसनी के मार्ग को साफ करके साँस लेने की प्रक्रिया को आसान करता है।

पारंपरिक नुस्ख़ें

अस्थमा और सांस से जुड़े विकारों के होने पर ग्रामीण हर्बल जानकार या वैद्य कई तरह के पारंपरिक नुस्खों को सुझाते हैं। अपने 18 साल से अधिक कार्यकाल के दौरान मैनें कई तरह के नुस्खों को रूबरू देखा है और अनेक लोगों को आराम पाते भी। आदिवासियों के अनुसार जिनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है उन्हें सबसे ज्यादा सांस की समस्याओं से जूझना पड़ता है। फिलहाल मौसम ठंडा है और इस दौरान इस समस्या का विकराल रूप देखने में आता है। चलिए इस सप्ताह हम अपने पाठको से इस दौरान सांस से जुड़ी समस्याओं से निपटने और बेहतर स्वास्थ के लिए कुछ चुनिंदा हर्बल नुस्खों का जिक्र कर रहे हैं।

लहसुन का सेवन – बैक्टिरिया जनित रोगों, दस्त, घावों, सर्दी-खांसी और बुखार आदि में बहुत फायदा करता है। लहसुन कई गुणों का खज़ाना हमारी रसोई में सब्जियों के साथ उपयोग में लाया जाने वाला लहसुन सिर्फ एक मसाला नहीं लेकिन औषधीय गुणों का एक ख़ज़ाना भी है। लहसुन के एण्टीबैक्टिरियल गुणों को आधुनिक विज्ञान भी मानता है, लहसुन का सेवन बैक्टिरिया जनित रोगों, दस्त, घावों, सर्दी-खांसी और बुखार आदि में बहुत फायदा करता है। लहसुन की 2 कच्ची कलियां सुबह खाली पेट चबाने के बाद आधे घण्टे से मुलेठी नामक जड़ी-बूटी का आधा चम्मच सेवन दो महीने तक लगातार करने से ठंड के दौरान आक्रमक होने वाली दमा जैसी घातक बीमारी में बेहद राहत मिलती है सदैव की छुट्टी मिल जाती है।

अजवायन व लौंग फायदेमंद –  ठंड में अस्थमा के रोगी को यदि अजवायन के बीज और लौंग की समान मात्रा का 5 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन दिया जाए तो काफी फ़ायदा होता है। यदि बीजों को भूनकर एक सूती कपड़े मे लपेट लिया जाए और रात तकिये के नजदीक रखा जाए तो दमा, सर्दी, खांसी के रोगियों को रात को नींद में सांस लेने मे तकलीफ़ नहीं होती है।

कफ को दूर करे अडूसा की पत्तियां – अडूसा की पत्तियों के रस को शहद में मिलाकर रोगी को दिया जाता है जिससे अस्थमा में अतिशीघ्र आराम मिलता है। पातालकोट के आदिवासी टीबी के मरीजों को अडूसा की पत्तियों का काढ़ा बनाकर 100 मिली रोज पीने की सलाह देते हैं, दरअसल अडूसा शरीर में जाकर फेफड़ों में जमी कफ और गंदगी को बाहर निकालता है।

कई रोगों की दवा बड़ी इलायची बड़ी इलायची खाने से खांसी, दमा, हिचकी आदि रोगों से छुटकारा मिलता है। बड़ी इलायची, खजूर व अंगूर की समान मात्रा लेकर, कुचलकर शहद में चाटने से खांसी, दमा और शारीरिक कमजोरी भी दूर होती है।

सांस फूलना दूर करें पान व पालक का जूस डाँग-गुजरात के आदिवासियों के अनुसार पान के पत्तों के साथ अशोक के बीजों का चूर्ण की एक चम्मच मात्रा चबाने से सांस फूलने की शिकायत और दमा में आराम मिलता है। पालक के एक गिलास जूस में स्वादानुसार सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से दमा और श्वास रोगों में खूब लाभ मिलता है।

खांसी दूर करे गेंदा का फूल व उसके बीज – डाँग-गुजरात के आदिवासियों के अनुसार यदि गेंदा के फ़ूलों को सुखा लिया जाए और इसके बीजों को एकत्र कर मिश्री के दानों के साथ समान मात्रा (5 ग्राम प्रत्येक) का सेवन तीन दिन तक किया जाए तो जिन्हें दमा और खांसी की शिकायत है, उन्हें काफ़ी फ़ायदा होता है।

अंगूर का रस गुणकारी लगभग 50 ग्राम अंगूर का रस गर्म करके स्वास या दमा के रोगी को पिलाया जाए तो सांस लेने की गति सामान्य हो जाती है।

दमा में फायदेमंद अनंतमूल की जड़ें दमा के रोगी यदि अनंतमूल की जड़ों और अडूसा के पत्तियों की समान मात्रा (3-3 ग्राम) लेकर दूध में उबालकर लें तो फ़ायदा होता है, ऐसा कम से कम एक सप्ताह तक किया जाना जरूरी है।

टांसिल्स में फायदेमंद बच व ब्रह्मी बच ब्रह्मी, पिपली, हर्रा और अडूसा की समान मात्रा को पीसकर इस मिश्रण को लेने से गले की समस्या जैसे गला बैठ जाना, टांसिल्स आदि में अतिशीघ्र आराम मिलता है। सर्दी और खांसी में लटजीरा के पत्तों का रस तैयार कर पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकार रोगियों को देते है, इनके अनुसार यह अत्यंत गुणकारी है।

भिंडी के बीज गुणकारी भिंडी के बीजों को आदिवासियों द्वारा एकत्र कर सुखाया जाता है और बच्चों को इसका चूर्ण खिलाया जाता है, माना जाता है कि ये बीज प्रोटीनयुक्त होते है और ठंड के मौसम में उत्तम स्वास्थ्य के लिये बेहतर होते हैं।

खांसी दूर करे बहेड़ा पुरानी खांसी में 100 ग्राम बहेड़ा के फलों के छिलके लें, उन्हें धीमी आंच में तवे पर भून लीजिए और इसके बाद पीस कर चूर्ण बना लीजिए। इस चूर्ण का एक चम्मच शहद के साथ दिन में तीन से चार सेवन बहुत लाभकारी है।

सर्दी में आराम दिलाए भुट्टा व नीलगिरी का तेल – मक्का के भुट्टे को जलाकर उसकी राख तैयार कर ली जाए और इसे पीस लिया जाए, इसमें अपने स्वाद के अनुसार सेंधा नमक डालकर दिन में 4 बार एक चम्मच फ़ांकी लेने से खांसी, कफ़ और सर्दी में आराम मिलता है। नीलगिरी का तेल एक सूती कपड़े में लगा दिया जाए और सर्दी और खांसी होने पर सूंघा जाए तो आराम मिलता है। गले में दर्द होने पर भी ये फायदा करता है। मेथी की पत्तियों का ताजा रस, अदरख और शहद को धीमी आंच पर कुछ देर गर्म करके रोगी को पिलाने से अस्थमा रोग में आराम मिलता है। एक गिलास पानी में एक चम्मच लहसुन का रस मिलाएं और इसे 3 महीने तक दिन में दो बार लगातार दिया जाए तो अस्थमा में राहत मिलती है।

तुलसी दूर करे अस्थमा गर्म पानी में तुलसी के 5 से 10 पत्ते मिलाएं और सेवन करें, यह सांस लेना आसान करता है। इसी प्रकार तुलसी का रस, अदरक रस और शहद का समान मिश्रण प्रतिदिन एक चम्मच के हिसाब से लेना अस्थमा पीड़ित लोगों के लिए अच्छा होता है।

1- अगर हमारे  शरीर में विटामिन सी की कमी हो तो इससे हमारी इम्युनिटी पावर कमजोर हो जाती है. जिसके कारण शरीर जल्दी बीमारियों की चपेट में आ जाता है. अस्थमा के मरीजों  को अपनी डाइट में विटामिन सी से भरपूर फलों को शामिल करना चाहिए. जिन लोगो को अस्थमा की समस्या है उन्हें अपने खाने में संतरा, नींबू, अंगूर, कीवी, आंवला, ब्रोकोली, टमाटर,शिमला मिर्च और बूशेल्स स्प्राउट को शामिल करना चाहिए.

2- अस्थमा के मरीजों के बीटा कैरोटीन बहुत फायदेमंद होता है. गाजर में भरपूर मात्रा में बीटा केराटिन मौजूद होता है, इसके अलावा अगर आपको अस्थमा की समस्या है तो आपको खुबानी, चेरी, हरी मिर्च, शिमला मिर्च और शकरकंद का सेवन करना चाहिए.

3- अगर आपको अस्थमा की बीमारी है तो रोज रात को सोने से पहले एक चम्मच शहद में 2-3 चुटकी दालचीनी का पाउडर को मिलाकर खाये, और फिर सुबह सोकर उठने के बाद फिर से इसका सेवन करे, नियमित रूप से इसका  सेवन करने से आपको बहुत जल्दी अस्थमा की समस्या  से आराम मिलेगा.

Leave a Reply