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वास्तुदोष है तो इसे नजरअंदाज ना करें, दूर करने का सबसे सरल उपाय

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घर पर वास्तुदोष है तो इसे नजरअंदाज ना करें – पहले के दौर में कोई भी इमारत, फिर चाहे वह घर हो, कोई धार्मिक स्थान या फिर कुछ और निर्माण के समय वास्तुशास्त्र का हमेशा ध्यान रखा जाता था। आप जितने भी बड़े मंदिर या हिन्दू धर्म से संबंधित अन्य स्थान देखते हैं तो उनके निर्माण के समय वास्तुशास्त्र के सिद्धांतों को बहुत बेहतरीन तरीके से उकेरा गया है। 

1- निर्माण

लेकिन आज समय बदल गया है, आज भवन निर्माण के लिए स्थान की कमी के कारण वास्तुशास्त्र के सिद्धांतों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। क्योंकि ना तो हम मुख्य द्वार के लिए सही दिशा का चुनाव कर सकते हैं और ना ही किचन या बेडरूम को वास्तुशास्त्र के उपायों के अनुसार बनाया जा सकता है। इसलिए आजकल लोग इसपर इतना ध्यान ही नहीं देते।

2- नकारात्मक प्रभाव

लेकिन एक बात जो पूरी तरह सच है आप ध्यान दें या ना दें इनका प्रभाव आपके जीवन पर पड़ता ही है। वह सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों ही तरीकों से हो सकता है। अगर आपने भी वातुदोष के प्रभाव में जी रहे हैं तो यहां कुछ ऐसे उपाय हैं जिन्हें अपनाकर आप इसके नकारात्मक प्रभाव से मुक्ति पा सकते हैं।

3- अगर दक्षिण मुखी है घर

अगर आपके घर का मुख्य द्वार या प्रवेश द्वर दक्षिण की ओर है तो आपको सबसे पहले घर के सामने नीम का पेड़ लगवना चाहिए। इसके अलावा पंक्घमुखी हनुमान जी की प्रतिमा लगाना भी आपके लिए हितकर साबित होगा। मुख्य द्वार पर पंच धातु का पिरामिड, शीशा लगवाने से भी वासुदोष शांत होते हैं।

4- सीध में द्वार होना

अगर आपके घर के मुख्य द्वार के बाद घर के बाकी द्वार भी सीध में हैं तो यह भी एक बड़ा वास्तुदोष होता अहि। आपको घर के बेकेह वाले द्वार पर एक मोटा पर्दा लगवाना चाहिए, अगर यह संभव ना हो तो एक विंड चाइम लगवा लें।

5- रसोई घर का वास्तुदोष

रसोई के लिए आग्नेय कोण (पूर्व और दक्षिण के बीच की दिशा) सबसे उपयुक्त माना जाता है, लेकिन अगर आपकी रसोई इस दिशा में नहीं बनी है तो आपको किचन स्टैंड के उत्तर पूर्व दिशा जिसे ईशान कोण भी कहा जाता है, पर सिंदूरी गणेश जी की तस्वीर लगानी चाहिए, इसके अलावा यज्ञ करते हुए ऋषियों की तस्वीर भी आप लगा सकते हैं।

6- कपूर का प्रयोग

अगर आपको लगता है कि घर के किसी कोने में वास्तुदोष का निर्माण हो रहा है तो आपको उस जगह कपूर की दो टिक्की रख देनीचाहिए। कपूर के जरिए भी वस्तुदोष समाप्त होता है।

7- शयन कक्ष का वास्तुदोष

शयन कक्ष के लिए दक्षिण पश्चिमी दिशा सबसे बेहतर मानी गई है, इसके अलावा उत्तर दिशा भी वास्तु शास्त्र अनुकूल है। परंतु अगर आपका शयन कक्ष यानि बेडरूम अग्नेय कोण में है तो आपको वहां शांत समुद्र की तस्वीर लगानी चाहिए।

8- ईशान कोण का वास्तुदोष

अगर आपके घर के ईशान कोण ( पूर्व और उत्तर दिशाएं जहां पर मिलती ) में किसे प्रकार का कोई वास्तुदोष है तो आपको उस स्थान को खाली करने के बाद वहां पीतल के बर्तन में पानी भरकर रख देना चाहिए। इसके अलावा वहां तुलसी का पौधा भी लगाया जा सकता है। तुलसी के पौधे में नियमित जल दें और पीतल के बर्तन का जल भी नियमित तौर पर बदलते रहें।

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