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दुनिया का एकमात्र शिवलिंग जो अपने आप 360 डिग्री तक घूम जाता है

दुनिया का एकमात्र शिवलिंग जो अपने आप 360 डिग्री तक घूम जाता है

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आपने आज तक एक से बढकर अनोखे शिवलिंग देखे होंगे, लेकिन क्या कभी ऐसा शिवलिंग देखा है जो चारों दिशाओं में घूमता हो। जी हां, इस दुनिया में एकमात्र ऐसा चमत्कारी शिवलिंग भी है जो चारों दिशाओं में घूमता है। ज्यादातर शिवलिंगों की जलहरी का मुख उत्तर या दक्षिण दिशा की तरफ होता है।लेकिन मध्य प्रदेश के श्योपुर के छारबाग मोहल्ले का गोविंदेश्वर महादेव मंदिर पूरे देश में इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां शिवलिंग अपनी धुरी पर चक्की की तरह 360 डिग्री घूम जाता है। यहां श्रद्धालु शिवलिंग को घुमाकर मन्नत मांगते हैं। लगभग तीन सदी पुराना यह शिवलिंग देश का दूसरा शिवलिंग है, जो दक्षिणमुखी है। इसके अलावा महाराष्ट्र के नासिक के शिव मंदिर में भी दक्षिणमुखी शिवलिंग है।

किसी भी दिशा में घुमाकर करें पूजा-
इस शिवलिंग को भक्त अपनी सुविधानुसार किसी भी दिशा में घुमाकर पूजा कर सकते हैं। यह अद्धभुत और चमत्कारी शिवलिंग श्योपुर के छार बाग मोहल्ले में अष्टफलक की छतरी में स्थित है। इसका निर्माण इस तरह से किया गया है कि यह अपनी धुरी पर चारों दिशाओं में घूमता है। पूजा करने वाले भक्त अपनी इच्छानुसार इसे किसी भी दिशा देकर पूजा कर सकते हैं।

चारों दिशाओं में घूमने वाले इस अनोखे शिवलिंग इतिहास भी बहुत पुराना है। इसका निर्माण श्योपुर के गौड़ वंश के राजा पुरूषोत्तम दास ने 294 वर्ष पूर्व अर्थात् सन् 1722 में करवाया था। इस मंदिर में लगे शिलालेख में इसके निर्माण समय बताया हुआ है। यह शिवालय गोविंदेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध है। हालांकि इससे पहले यह शिवलिंग महाराष्ट्र के सोलापुर में बाम्बेश्वर महादेव के रूप में स्थापित था। गौड़ राजा भगवान शिव के परम भक्त थे। इसी कारण से उन्होंने शिवनगरी के रूप में श्योपुर नगर को बसाया था।

ऐसा चमत्कारी है शिवलिंग
यह अनोखा शिवलिंग लाल पत्थर बना है। इसके दो भाग हैं जिनमें एक पिंड है और दूसरा दूसरा जलहरी। यह शिवलिंग एक धूरी पर स्थापित है जिसकी वजह से चारों दिशाओं में घूमता है। कहा जाता है कि साल में एक बार रात के समय इस शिवालय घंटिया अपने आप बजने लगती हैं। आरती के बाद शिवलिंग अपने आप घूमने लगता हैं। कहा जाता है कि इस शिवलिंग का मुख हमेशा दक्षिण दिशा की ओर रहता है लेकिन अपने ही यह उत्तर या पूर्वमुखी हो जाता है। .इस शिवलिंग के बारे में कहा जाता है कि इसकी पूजा करने से सारे कष्टों और सर्पदोष, पितृदोष, गृहक्लेश आदि से तुरंत मिलता है।

गोविंदेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी पंडित मोहन बिहारी शास्त्री के अनुसार, इस शिवलिंग का मुख नंदी की प्रतिमा की ओर रहता है, लेकिन कोई भी भक्त शिवलिंग को घुमाकर उसका मुख किसी भी दिशा में कर सकता है। इससे भी बड़ा चमत्कार और चौकाने वाला तथ्य यह है कि साल में एक बार यह शिवलिंग अपने आप ही घूमता है।

24 खंभों की छत्री की दूसरी मंजिल पर यह शिवलिंग है। जबकि पहली मंजिल पर भगवान गणेश की अद्भुत प्रतिमा है। मंदिर के पुजारी के अनुसार, साल में एक बार रात के समय मंदिर की घंटियां अपने आप बजने लगती हैं। आरती होती है और शिवलिंग अपने आप घूमने लगता है।

दक्षिणमुखी शिवलिंग की पूजा सबसे पहले पांडवों ने की थी। यह मंदिर तो 1100 साल पुराना है, लेकिन इसमें घूमने वाले शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा 300 साल पहले हुई थी। श्योपुर के गौड़ वंशज राजा पुरुषोत्तम दास 1722 में इस इस शिवलिंग को महाराष्ट्र के सोलापुर से लाए थे। इस शिवलिंग के बारे में कहा जाता है कि इसकी पूजा करने से सारे कष्टों और सर्पदोष, पितृदोष, गृहक्लेश आदि से तुरंत मिलता है।

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