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एलर्जी से छुटकारा पाने के लिए करे ये घरेलू उपचार

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एलर्जी की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है। कई बार बच्चों में उम्र के साथ एलर्जी का असर कम हो जाता है तो कई बार बड़े होने पर ही एलर्जी के लक्षण सामने आते हैं। एलर्जी की पहचान शुरुआत में ही कर लेना, कई समस्याओं से बचा सकता है। एलर्जी या दूसरे शब्दों में कहें तो बाहरी तत्वों के प्रति शरीर की अतिसंवेदनशीलता एक आम समस्या है। पर ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है, जिन्हें यही नहीं पता होता कि उनकी परेशानी का कारण दरअसल एलर्जी है। हमारा शरीर किसी खास पदार्थ के प्रति जब अति संवेदनशीलता या कोई तीव्र प्रतिक्रिया दिखाता है तो उसे हम एलर्जी कहते हैं। एलर्जी इस बात का सीधा संकेत है कि शरीर की प्रतिरक्षा-प्रणाली कमजोर पड़ गई है। ऐसे में कुछ परिस्थितियों में हमारा शरीर कुछ खास चीजों को स्वीकार करने से मना कर देता है।

एलर्जी आमतौर पर नाक, गले, कान, फेफड़ों और त्वचा को प्रभावित करती है। एलर्जी होने पर नाक बहने, त्वचा में खुजली, आंखों से पानी आने, त्वचा पर रेशेज पड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। एलर्जी वह स्थिति है, जिसमें हमारा प्रतिरक्षा तंत्र काफी संवेदनशील हो जाता है और किसी भी साधारण कारक के प्रति अत्यंत तीव्र शारीरिक प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है। यह रोग का रूप ले लेती है। 

एलर्जी का असर आमतौर पर त्वचा पर दिखाई देता है, पर यह आंतों, मुंह, नाक, फेफड़ों आदि पर भी असर डाल सकती है। शरीर की प्रकृति जैसी हो, उस हिसाब से एलर्जी के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार 20 से 30 फीसदी भारतीय किसी-न-किसी तरह की एलर्जी से पीड़ित पाए जाते हैं। एक अन्य शोध के अनुसार देश में एलर्जी के कुल मामलों में 34% को झींगे से, 31% को गेहूं से, 28% को दूध से, 20% को बादाम से, 25% को सोयाबीन से, 18% को अंडे से, 17% को नारियल से, 10% को चिकन से और 9% लोगों को मछली से एलर्जी देखने को मिलती है। मूंगफली, नारियल, चॉकलेट और काजू एलर्जी के अन्य खास कारक हैं।

क्या हैं लक्षण

एलर्जी में आमतौर पर जुकाम जैसे ही लक्षण पाए जाते हैं। इसमें नाक का बहना, गले में खराश, आंखों से पानी आना, त्वचा पर दाने आना आदि लक्षण दिखते हैं। कई लोगों में पेचिश और दस्त की भी समस्या देखी जाती है और दिल की धड़कन भी असंतुलित हो सकती है।

नाक बहना, छींकें आना, आंखों से पानी आना या खुजली होना, त्वचा का लाल होना और चकत्ते पड़ना, शरीर में खुजली होना, चेहरे आंखों, होंठ और जीभ पर सूजन होना, उल्टी होना, बुखार होना, थकान और बीमार महसूस करना, सांस फूलना, पेट की समस्या पैदा होना, कुछ विशेष परिस्थितियों में एनाफिलेक्सिस जैसी गंभीर एलर्जिक प्रतिक्रिया भी पैदा हो सकती है, जो प्राणघातक साबित हो सकती है। इसमें दिए गए लक्षणों के अलावा सांस लेने में परेशानी, चक्कर, गले और मुंह में सूजन, त्वचा या होंठ का नीला पड़ना और बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

कैसी-कैसी एलर्जी (Types of Allergy )

नाक की एलर्जी : नाक की एलर्जी को एलर्जिक राइनाइटिस भी कहा जाता है। यह आमतौर पर मौसम बदलते समय पराग कणों के कारण होती है। इसके चलते श्वसन नली में सूजन आ जाती है। छींकें, नाक में खुजली, नाक बहना जैसे लक्षण पैदा होते हैं। 

खाद्य पदार्थों की एलर्जी : कई बार कुछ खास खाद्य पदार्थों के प्रति शरीर अति संवेदनशील हो जाता है। ऐसे में इन पदार्थों को खाते ही शरीर प्रतिक्रिया देने लगता है। दूध, मछली, अंडे, गेहूं, मूंगफली से एलर्जी के मामले ज्यादा सामने आते हैं। 

ड्रग एलर्जी : कुछ दवाओं से भी शरीर पर चकत्ते या दाने हो जाते हैं। 

एटॉपिक डर्मेटाइटिस : यह एलर्जी रासायनिक प्रदूषण, पर्यावरण प्रदूषण और कॉस्मेटिक वगैरह के इस्तेमाल के कारण होती है। इसमें त्वचा में सूजन आ जाती है।

एलर्जिक अस्थमा : एलर्जी वाले पदार्थों के संपर्क में आने से जब सांस की नलियों में सूजन व सिकुड़न पैदा हो जाती है तो सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। धूल, वायु प्रदूषण, धुआं आदि इसके मुख्य कारण हैं।

मौसमी एलर्जी : मौसमी बदलाव से होने वाली एलर्जी में आंखों में पानी आना, खुजली, जलन व छींक जैसे लक्षण होते हैं।

फंगल एलर्जी : कई बार फंगल इन्फेक्शन यानी फफूंदी के बीजाणुओं के कारण तीव्र एलर्जिक प्रतिक्रिया होती है।

कैसे करें बचाव- धूल से एलर्जी हो तो घर में कालीन न बिछाएं। पर्दे, बिस्तर, तकिए साफ रखें।  जानवरों के संपर्क में आने से बचें। फफूंद से होने वाली एलर्जी से बचने के लिए घर को साफ-सुथरा रखें। घर के अंदर कपड़ा न सुखाएं। पराग कणों से एलर्जी है तो पार्क,खेतों आदि में नाक पर कपड़ा रखकर जाएं। जिन खाद्य पदार्थों से एलर्जी हो, उन्हें खाने से बचें। बाजार की जगह घर का खाना खाएं।  दूषित पानी से भी एलर्जी पैदा हो सकती है। पानी में मिले केमिकल शरीर में झुर्रियों का कारण बन सकते हैं। अगर एलर्जी को ज्यादा दिन हो गए हैं, नाक-कान में संक्रमण हो, तेज सिर दर्द हो या खुद से कोई दवा ले रहे हैं, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। थाइरॉइड, मधुमेह, मोतियाबिंद, बीपी जैसी समस्या में एलर्जी भी होने पर डॉक्टर से मिलें। 

एलर्जी से निजात पाने के आसन घरेलू उपचार

नाक की एलर्जी से निजात पाने के आसन घरेलू उपचार

* नाक की एलर्जी सबसे अच्छा उपाय आपको बताये अंजीर और छुहारे को रात में दूध के साथ भिगो दे। अब सुबह उठकर आप इसका सेवन करे बहुत लाभ होगा|इससे तनाव से भी मुक्ति मिल जाती है।

* नीम पर चढ़ी गिलोय के रस को 1 से 3 ग्राम हरिद्रा खंड चूरन के साथ लेने से भी लाभ मिलता है। पुरानी से पुरानी एलर्जी भी इस रामबाण उपाय के आगे नहीं टिकती है।

* सोंठ, काली मिर्च, छोटी पीकर और मिश्री सभी एक-एक बडा चम्मच लेकर चूर्ण बना लें बीज निकाला हुआ दस मुनक्का 50 ग्राम, गोदंती हरताल भस्म 10 ग्राम तथा तुलसी के दस पत्ते सभी को मिलाकर पीस लें औरछोटी- छोटी गोलियाँ बनाकर छाया में सुखा लें। सुबह शाम गर्म पानी के साथदो दो गोली तीन माह तक सेवन करें। ठंडे पदार्थ, बर्फ, दही, ठंडे पेय से परहेज करें। नाक की एलर्जी दूर हो जाएगी।

* सुबह सुबह गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पिने से शरीर को विटामिन सी मिलता है जो नजला और जुखाम से छुटकारा पाने में मदद करता है। एक चम्मच शहद और आधा नींबू का रस हलके गरम पानी में मिलाकर सेवन करने से भी एलर्जी ठीक होती है।

* अदरक, मिश्री, लौंग और काली मिर्च, तुलसी को मिलाकर काढ़ा बनाया जाये तो बहुत लाभ होगा और इसके सेवन से सर्दी जुकाम और खासी से भी राहत मिल जाती है।

* किसी भी फल या फिर सब्ज़ी के जूस में 4 से 5 बूंद कैस्टर ऑयल डालकर सुबह खाली पेट पिएं। फल और सब्ज़ी के अलावा पानी का प्रयोग भी कर सकते हैं। इस उपाय से नाक और स्किन की एलर्जी से छुटकारा मिलेगा।

* निम्बू का सेवन भी हमारे लिए बहुत लाभकारी होता है। अगर किसी को एलर्जी की समस्या हो तो आपको बताये सुबह-सुबह गुनगुने पानी में निम्बू का रस मिलाकर सेवन करने से बहुत राहत मिलती है और अगर निम्बू के रस में शहद मिलाकर सेवन करे तो एलर्जी से छुटकारा पाया जा सकता है।

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स्किन एलर्जी के लिए अपनाये ये घरेलू नुस्खे

बदलते मौसम में स्किन एलर्जी की समस्या होना आम है। मगर यह परेशानी जब व्यक्ति को एक बार चपेट में ले तो जल्दी पीछा छोड़ने का नाम नहीं लेती। दवाइयों का सेवन करने के बावजूद भी एलर्जी की समस्या बार-बार होती रहती है। प्रदूषण या खाने में मिलावट के कारण आजकल लोगों में एलर्जी की समस्या बढ़ रही है, जिसमें से स्किन एलर्जी भी एक है। स्किन एलर्जी होने के कारण त्वचा का लाल होना और खुजली जैसी परेशानी हो जाती है, जोकि धीरे-धीरे चर्म रोग का कारण भी बन सकती हैं। ऐसे में कुछ आसान से घरेलू नुस्खे अपनाकर स्किन एलर्जी की समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सकता है।

स्किन एलर्जी के कारण (Skin Allergy Reasons)

मौसम में बदलाव
धूल मिट्टी के कणों के कारण
जानवरों को छूने के कारण
दर्द निवारक दवाओं का सेवन
टैटू का त्वचा पर बुरा प्रभाव
किसी फूड के कारण
ड्राई स्किन से त्वचा में एलर्जी
किसी कीड़े मकोड़े का काटना

स्किन एलर्जी के लक्षण (Skin Allergy Symptoms)

त्वचा पर लाल धब्बे पड़ना
खुजली होना
फुंसी-दाने हो जाना
रैशेज या क्रैक पड़ना
जलन होना
त्वचा में खिंचाव पैदा होना
छाले या पित्त होना
 

स्किन एलर्जी के घरेलू उपचार (Skin Allergy Home Remedy)

एलोवेरा

एलोवेरा जेल और कच्चे आम के पल्प को मिक्स करके त्वचा पर लगाएं। इस लेप को लगाने से स्किन एलर्जी की जलन, खुजली और सूजन से राहत मिलती है।

अधिक पानी पीना
स्किन एलर्जी होने पर अपने शरीर को अधिक से अधिक हाइड्रेट रखें। इसके लिए एक दिन में कम से कम 10 ग्लास पानी जरूर पीएं। अधिक पानी का सेवन आपको सनबर्न और फ्लू से बचाएगा।
 
कपूर और नारियल तेल
कपूर को पीसकर उसमें नारियल का तेल मिक्स करें। इसके बाद इसे खुजली वाली जगहें पर लगाएं। दिन में कम से कम 2 बार इस मिक्चर को लगाने से आपकी एलर्जी की समस्या दूर हो जाएगी।

फिटकरी
एलर्जी वाली जगहें को फिटकरी के पानी से धोएं। उसके बाद इसपर कपूर और सरसों का तेल मिक्स करके लगाएं। आप चाहें तो इसकी जगहें फिटकरी और नारियल का तेल मिक्स करके भी लगा सकते हैं।
 
नीम
एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर नीम एलर्जी की समस्या को दूर करने का रामबाण इलाज है। इसके लिए नीम के पत्तों को रात के समय पानी में भिगो दें और सुबह इसका पेस्ट बनाकर लगाएं। इससे आपकी स्किन एलर्जी मिनटों में गायब हो जाएगी।

आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की मदद से कई तरह की एलर्जी का स्थायी इलाज संभव है। एंटी हिस्टैमिन्स, एंटील्यूकोट्राइंस, नेजल कोस्टेराइड स्प्रे जैसी दवाएं नेजल कैविटी और श्वसन नलिका की सूजन और जलन को कम करने के लिए अब ज्यादा सुरक्षित मानी जाती हैं। ओरल इम्यूनो थेरेपी वैक्सिनेशन का इस्तेमाल एलर्जीके लंबे समय तक चलने वाले इलाज में किया जाता है। एलर्जन इम्यूनोथेरेपी पद्धति में जिन चीजों से एलर्जी होती है, उन्हीं चीजों को कम मात्रा में मरीज को लंबे समय तक दिया जाता है। इससे शरीर धीरे-धीरे रोगप्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेता है और नॉन-एलर्जिक हो जाता है। जिनमें दवाएं और वैक्सीन परिणाम नहीं देते, उनके लिए एलर्जी शॉट को एक अवधि में क्रमवार दिया जाता है। बहरहाल, खाने-पीने से होने वाली एलर्जी में उन खाद्य पदार्थों से परहेज करना जरूरी होता है, अन्यथा इलाज में कठिनाई आती है।

होम्योपैथी से संपूर्ण उपचार :- होम्योपैथी में एलर्जी का कारगर इलाज मौजूद है। लक्षणों के सही मिलान के बाद सल्फर, एकोनाइट, कार्बोवेज, नेट्रम म्यूर, आर्सेनिक अल्बम, ब्रायोनिया, नक्स वोमिका, चायना, ऑरम ट्राइफाइलम, ग्रेफाइटिस, यूफ्रेशिया आदि दवाएं दी जाती हैं। चिकित्सक की सलाह से दवा का सेवन करना चाहिए।

योग और प्राणायाम:- अनुलोम-विलोम, भ्त्रिरका व कपालभाति प्राणायाम नियमित रूप से करें। योग विशेषज्ञ से सलाह लेकर कुंजल और नेति क्रिया का अभ्यास भी कफ दोष को दूर कर स्थायी रूप से राहत देता है। पंचकर्म में से नस्य का प्रयोग भी कारगर है।.


एंटीबैक्टीरियल साबुन का इस्तेमाल करें। खारिश बहुत रहती है तो नारियल तेल में कपूर मिलाकर त्वचा पर लगाएं। गाजर, चुकंदर और खीरे का जूस पीने से एलर्जी में राहत मिलती है।नीम के पत्तों को रात में पानी में भिगो दें व सुबह पेस्ट बनाकर त्वचा पर लगाएं। पानी खूब पिएं। सुबह गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से विटामिन-सी मिलता है, जो पुरानी एलर्जी को धीरे-धीरे स्थायी रूप से दूर करता है। आयुर्वेदिक दवा हरिद्रा खंड के सेवन से त्वचा की एलर्जी में फायदा मिलता है। एक ग्राम गिलोय पाउडर और एक ग्राम सितोपलादि चूर्ण को शहद के साथ सवेरे-शाम खाली पेट खाने से श्वसन तंत्र की एलर्जी में राहत मिलती है। नाक की एलर्जी बार-बार होती है तो सवेरे खाली पेट दो चम्मच आंवले का रस, एक चम्मच गिलोय का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर हर रोज लें। फलों के जूस अथवा पानी में पांच-छह बूंद अरंडी का तेल मिलाकर पिएं। रात में जल्दी भोजन करें। अधिक तला-भुना व मसालेदार भोजन खाने से बचें। त्वचा से जुड़ी एलर्जी में त्रिकटु, तुलसी, लौंग, कपूर व धनिए को बराबर मात्रा में लेकर पाउडर बना लें। दिन में दो बार आधा चम्मच गुनगुने पानी के साथ लें। 


शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर एलर्जी का मुकाबला किया जा सकता है। हल्दी, नीम, तुलसी, काली मिर्च, लौंग, अदरक और अन्य घरेलू तौर पर उपलब्ध सामग्रियां काफी स्वास्थ्यप्रद होती हैं। इनका नियमित इस्तेमाल होना चाहिए। इन मसालों का भोजन में समावेश करना इनके उपयोग का सबसे अच्छा तरीका है। च्यवनप्राश, आंवला आदि का सेवन करें, जो शरीर में आयरन, कैल्शियम और अन्य विटामिनों की कमी को पूरा करते हैं।

वात एवं कफ को संतुलन में लाने के लिए एक खास मिश्रण का इस्तेमाल करें। इस मिश्रण में 20 मिलीग्राम त्रिकटु चूर्ण (सोंठ, पिप्पली, काली मिर्च), 250 मिलीग्राम तुलसी के पत्ते, 10 मिलीग्राम लौंग, कपूर और सूखा धनिया अच्छी तरह पीसकर डालें। इस मिश्रण में से थोड़ा-थोड़ा शहद के साथ रोज सेवन करें, काफी लाभ होगा।

एलर्जी: कारण और दूर करने के कारगर उपाय

क्या होती है एलर्जी

जब हमारा शरीर किसी चीज को लेकर ओवर-रिऐक्ट करता है तो उसे एलर्जी कहते हैं। एलर्जी किसी खाने की चीज, पालतू जानवर, मौसम में बदलाव, कोई फूल-फल-सब्जी के सेवन, खुशबू, धूल, धुआं, दवा यानी किसी भी चीज से हो सकती है। इस स्थिति में हमारा इम्यून सिस्टम कुछ खास चीजों को स्वीकार नहीं कर पाता और नतीजा ऐसे रिऐक्शन के रूप में दिखता है। इस स्थिति में शरीर पर लाल-लाल चकत्ते निकलना, नाक और आंखों से पानी बहना, जी मितलाना, उलटी होना या फिर सांस तेज-तेज चलने से लेकर बुखार तक हो सकता है। ज्यादातर एलर्जी खतरनाक नहीं होतीं, लेकिन कभी-कभार समस्या गंभीर भी हो सकती है।

एलर्जी के कारण

खाने की चीजों से: कुछ लोगों को खाने की चीजों जैसे कि मूंगफली, दूध, अंडा आदि खाने से एलर्जी हो सकती है। जिस चीज से एलर्जी है, उसे खाने के बाद जी मिचलाना, शरीर में खुजली होना या पूरे शरीर पर दाने और चकत्ते निकलने जैसी समस्या हो सकती है। आमतौर पर कुछ खाने के बाद 10 मिनट से लेकर आधे घंटे के अंदर एलर्जी के लक्षण उभरने लगते हैं।

धूल: धूल के कणों में माइक्रोब्स होते हैं जो हमारे आसपास मौजूद रहते हैं। माइक्रोब्स ज्यादा ह्यूमिडिटी में पनपते हैं। इनसे होनेवाली एलर्जी में आमतौर पर छींकें, आंख और नाक से पानी बहना जैसी दिक्कत होती है।

कीट और मच्छर: ऐसे लोगों को किसी कीड़े के काटने पर स्किन एकदम लाल होकर फूल जाती है। कभी-कभार उलटी, चक्कर आना और बुखार भी हो सकता है।

रबड़: रबड़ से बनी किसी भी चीज (गलव्स, कॉन्डम, मेडिकल इक्विमेंट आदि) के इस्तेमाल से जलन, नाक बहना, छींकना, सांस की घबराहट और खुजली की समस्याएं हो सकती हैं।

खुशबू: खुशबू भी कई लोगों के लिए एलर्जी की वजह हो सकती है। परफ्यूम, खुशबू वाली मोमबत्तियां, कई तरह के ब्यूटी प्रॉडक्ट आदि की खुशबू से सिरदर्द, जी मिचलाने आदि की समस्या हो सकती है।

पालतू जानवर: पालतू जानवर भी कई लोगों की एलर्जी का कारण होते हैं। जानवरों के बाल, उनके मुंह से निकलने वाली लार, रूसी आदि से कई लोगों को गंभीर परेशानियां होती हैं।

घास: कई बार घास, पेड़ और फूल भी एलर्जी का कारण होते हैं। इनके संपर्क में आने पर खुजली, आंखों में जलन, लगातार छींक और खुजली आदि की समस्या हो सकती है।

मौसम: कई लोगों को किसी खास मौसम से भी एलर्जी होती है। जब मौसम बदलने लगता है तो इन लोगों को गले की खराश, बुखार, नाक बहना, आंखों में जलन जैसी समस्या होती है। ऐसे में कोशिश करें कि ज्यादा-से-ज्यादा घर के अंदर रहें। तापमान में तेज बदलाव से बचें। यानी एकदम ठंडे से गर्म में या गर्म से ठंडे में न जाएं।

पॉलेन: पॉलेन यानी फूलों के पराग कणों से भी लोगों को एलर्जी होती है। पेड़-पौधों और घास-फूस के संपर्क में आने पर ये बारीक कण नाक और गले में चले जाते हैं और दिक्कत की वजह बनते हैं। जिस मौसम में पॉलेन आते हैं, उस दौरान घर से बाहर कम निकलें। घर की खिड़कियां बंद करके रखें। एसी या पंखे में रहें और कूलर का इस्तेमाल न करें। घर में एयर प्यूरिफायर लगवाएं। घर से बाहर निकलना ही हो तो आंखों पर चश्मा और नाक पर मास्क लगाकर बाहर निकलें।

मेटल: कई लोगों को मेटल जैसे कि गोल्ड या सिल्वर ऑक्सिडाइज्ड जूलरी से एलर्जी होती है तो कुछ को लेदर या सिंथेटिक कपड़ों से। ऐसा होने पर इन चीजों के कॉन्टैक्ट में आने के बाद खुजली आदि हो सकती है। ऐसे लोग इन चीजों के इस्तेमाल से बचें। अगर कभी पहनना ही पड़े और खुजली होने लगे तो उस जगह पर स्टेरॉयड बेस्ड क्रीम लगाएं।

दवा: किसी खास दवा से एलर्जी भी काफी लोगों को होती है। अगर उस दवा को लेना जारी रखा जाए तो परेशानी बढ़ सकती है।

एलर्जी किसको ज्यादा

एक्सपर्ट मानते हैं कि गांवों में रहनेवालों के मुकाबले शहरों में रहने वालों में एलर्जी की समस्या ज्यादा पाई जाती है। जिन बच्चों को ज्यादा साफ-सफाई के साथ पाला जाता है, उनमें भी यह समस्या ज्यादा पाई जाती है क्योंकि उनके शरीर का इम्यून सिस्टम ज्यादा डिवेलप नहीं हो पाता।

बच्चों में एलर्जी होने की आशंका बड़ों से कहीं ज्यादा होती है। बच्चा अगर बहुत ज्यादा थकान का शिकार होता हो, उसे सर्दी-जुकाम बना रहता हो, नाक में खुजली होती हो तो इसे एलर्जी हो सकती है।

सावधानी के लिए जिन चीजों से हम बच्चों को परहेज करा रहे होते हैं, वही परहेज उन्हें और बीमार कर रहा होता है। हम हाइजीन के नाम पर बच्चों को धूल, मिट्टी, बारिश आदि में खेलने से रोकते रहते हैं। इसे हाइजीन हाइपोथीसिस कहते हैं।

जिन बच्चों का वैक्सिनेशन नहीं किया जाता, उनमें भी एलर्जी की समस्या कम देखी गई है। वैक्सिनेशन से बच्चों का शरीर बैक्टीरिया से तो बच जाता है लेकिन इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। जो चीज शरीर के इम्यून सिस्टम को अपने मुताबिक नहीं लगतीं, वह उन्हें अपने तरीके से निकालने की कोशिश में लग जाता है। यह तरीका छींक, चकत्ते, बुखार आदि हो सकता है।

इसी तरह बुजुर्गों में भी एलर्जी की समस्या काफी कॉमन है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो जाता है। बदलते मौसम आदि में उनका खास ख्याल रखना चाहिए।

कई बार एलर्जी खानदानी भी होती है। पैरंट्स को अगर धूल या किसी और चीज से एलर्जी हो तो बच्चों को एलर्जी होने के चांस बढ़ जाते हैं। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि दोनों की एलर्जी का स्वरूप एक जैसा ही हो। मां को अगर धूल से एलर्जी की वजह से स्किन रैशेज पड़ते हों तो बच्चे को खुशबू से एलर्जी होने की वजह से छींकें आ सकती हैं।

देश में करीब 20 से 30 फीसदी लोग एलर्जी से पीड़ित हैं, जबकि अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में एलर्जी के मरीजों की संख्या 40 फीसदी से भी ज्यादा है।

कैसे है बचाव संभव

हमारे देश में लोगों को एलर्जी के बारे में जानकारी कम है। अक्सर लोगों को पता ही नहीं चलता कि वे बार-बार बीमार पड़ रहे हैं तो उसकी वजह खाना या मौसम भी हो सकता है। दरअसल, अगर किसी चीज को लेकर शरीर में रिएक्शन दिखे तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए और दोबारा इस चीज के इस्तेमाल से बचना चाहिए।

बच्चों के इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए उन्हें जरूरी चीजें भी दी जानी चाहिए। बच्चों को चारदीवारी में बंद करके नहीं रखा जाना चाहिए।

बच्चों को धूल-मिट्टी और धूप में खेलने दें। ये बच्चों को बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं। उन्हें बारिश या दूसरे पानी से भी खेलने दें। हां, धूल-मिट्टी में खेलने के बाद उनके हाथ-पैर अच्छे से धुलवाना न भूलें।

अगर किसी को धूल और धुएं से एलर्जी है तो घर से बाहर निकलने से पहले नाक पर रुमाल रखना चाहिए। बचाव ही एलर्जी का इलाज है।

जिन लोगों को ठंड से एलर्जी है, वे ठंडी और खट्टी चीजों जैसे कि अचार, इमली, आइसक्रीम आदि के इस्तेमाल से बचें।

गंदगी से एलर्जी वाले लोगों को समय-समय पर चादर, तकिए के कवर और पर्दे भी बदलते रहना चाहिए। कारपेट यूज न करें या फिर उसे कम-से-कम 6 महीने में ड्राइक्लीन करवाते रहें।

जिस दवा से एलर्जी है, उसे खाने से बचें। डॉक्टर को दिखाएं तो इस एलर्जी के बारे में जरूर बताएं।

घर में केरोसिन वाले स्टोव की जगह एलपीजी या इलेक्ट्रिक स्टोव यूज करें। किचन में एग्जॉस्ट फैन जरूर लगवाएं और खाना पकाते समय उसे चलाएं।

घर को हमेशा बंद न रखें। घर को खुला और हवादार बनाए रखें ताकि साफ हवा आती रहे।

खिड़कियों में महीन जाली लगवाएं और जाली वाली खिड़कियों को हमेशा बंद रखें क्योंकि खुली खिड़की से कीड़े और मच्छर आपके घर में घुस सकते हैं।

दीवारों पर फफूंद और जाले हो गए हों, तो उन्हें साफ करते रहें क्योंकि फफूंद के कारण भी एलर्जी हो सकती है।

बारिश के मौसम में फूल वाले प्लांट्स को घर के अंदर न रखें।

अस्थमा और एलर्जी में फर्क

अस्थमा और एलर्जी में कई चीजें कॉमन हैं, लेकिन फिर भी दोनों अलग-अलग हैं। लगातार कई दिनों तक जुकाम, खांसी या सांस लेने में दिक्कत हो तो इन्फेक्शन इसकी वजह हो सकता है, जबकि अस्थमा में सांस लेने में परेशानी के अलावा रात में सोते वक्त खांसी आना, छाती में जकड़न महसूस होना, एक्सरसाइज करते हुए या सीढ़ियां चढ़ते वक्त सांस फूलना या खांसी आना, ज्यादा ठंड या गर्मी होने पर सांस लेने में दिक्कत होना जैसे लक्षण होते हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अस्थमा भी एक तरह की एलर्जी ही है। जैसे ही शरीर एलर्जी वाली चीजों के संपर्क में आता है, अस्थमा का अटैक होता है। इसे एलर्जिक अस्थमा कहते हैं। हां, अस्थमा और एलर्जी में एक और कनेक्शन है। अगर किसी को एलर्जिक अस्थमा नहीं है, सिर्फ एलर्जी है तो अस्थमा होने का खतरा 40 फीसदी तक बढ़ जाता है।

एलर्जी के लिए टेस्ट

एलर्जी के लिए 2 टेस्ट होते हैं:

1. स्किन पैच टेस्ट: जिस भी चीज से एलर्जी का शक होता है, उसका कंसंट्रेशन स्किन पर पैच के जरिए लगाया जाता है। इसके रिजल्ट सटीक होते हैं।

2. ब्लड टेस्ट: ब्लड टेस्ट से भी एलर्जी की जांच होती है। हालांकि एक्सपर्ट इसे बहुत सटीक नहीं मानते।

स्किन पैच टेस्ट कराने का खर्च 8 से 10 हजार रुपये आता है। टेस्ट के जरिए 60 तरह की एलर्जी की जानकारी मिल जाती है।

एलर्जी का इलाज

ऐलोपथी

फूड एलर्जी खासकर गेहूं से होने वाली सिलियक (Celiac) डिजीज उत्तर भारत में ज्यादा देखी जाती है। अगर किसी युवा में खून की कमी, विटमिन डी या कैल्शियम की कमी पाई जाती है तो हो सकता है कि उसे गेहूं से होने वाली ग्लूटन एलर्जी हो। अगर स्किन टेस्ट पॉजिटिव आता है तो मरीज को गेहूं से बनी चीजें खाने से रोक दिया जाता है। गेहूं के बजाय मक्का, सिंघाड़ा, चने आदि का आटा खाने को दिया जाता है। शरीर में जिन तत्वों की कमी है, उन्हें बढ़ाने के लिए दवाएं भी दी जाती हैं।

वैसे हल्की-फुल्की एलर्जी यानी अगर छींकें आ रही हैं या खुजली हो रही है तो एविल (Avil) और सिट्रिजिन (Cetirizine) ले सकते हैं। ये दोनों जेनरिक नेम हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये दवाएं कुछ घंटों या फौरी राहत के लिए तो ठीक हैं, लेकिन लंबे समय चलनेवाली एलर्जी में बेअसर हैं। एलर्जी होने पर डॉक्टर को दिखाएं। दवा एलर्जी के प्रकार के अलावा मरीज की स्थिति और उम्र के मुताबिक भी तय की जाती है।

इम्यूनो थेरपी और एलर्जी शॉट्स से भी एलर्जी का इलाज किया जाता है। अगर मरीज की हालत ज्यादा खराब हो, तभी इम्यूनो थेरेपी का सहारा लिया जाता है। यह सेफ तरीका है लेकिन तभी कारगर है, जब किसी ऐसी चीज से ही एलर्जी हो, जिसे नजरअंदाज न किया जा सके। मसलन अगर किसी को प्रॉन खाने से एलर्जी है तो वह उसे नहीं खाएगा, लेकिन अगर पॉलेन से एलर्जी है तो वह हमेशा ही बीमार रहेगा। ऐसे मरीजों को यह थेरपी दी जाती है। इस थेरपी का असर लंबे समय तक रहता है। कई बार इसका असर 3-4 साल तक रहता है। हालांकि हर मरीज पर असर अलग-अलग हो सकता है। यह इलाज थोड़ा महंगा होता है।

होम्योपथी

होम्योपथी में दवा बीमारी के लक्षणों के आधार पर दी जाती है। होम्योपथी में सभी तरह की एलर्जी का इलाज मुमकिन है। हालांकि असर थोड़ा धीमा होता है लेकिन बीमारी पूरी तरह ठीक हो जाती है। खुद इलाज करने के बजाय किसी क्वॉलिफाइड होम्योपैथिक डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

खाने-पीने की चीजों से एलर्जी हो रही है तो नैट्रम मुर (Natrum Mur) की 4 बूंदे सुबह-शाम थोड़े पानी में मिलाकर पीने की सलाह दी जाती है, लेकिन बच्चों के लिए डोज अलग होती है।

एस्प्रिन (Aspirin) दवा से एलर्जी होने पर कार्बो वेज (Carbo Veg) और ऐंटिबायॉटिक से एलर्जी होने पर सल्फर 200 (Sulphur 200) दी जाती है। कुछ एलर्जी में ब्रायोनिया (Bryonia), नक्स वॉम (Nux Vomica), आर्सेनिक एल्बम (Arsenicum Album) आदि दवाएं दी जाती हैं। दवा की डोज उम्र के मुताबिक तय होती है।

आयुर्वेद

रोज सुबह नीबू पानी पिएं।

खट्टी और ठंडी चीजों से परहेज करें।

कभी-कभी कोई दवा खाने से भी एलर्जी हो जाती है इसलिए हमेशा दवा डॉक्टर से पूछकर ही लें।

अगर स्किन एलर्जी है तो फिटकरी के पानी से प्रभावित हिस्से को धोएं। नारियल तेल में कपूर या जैतून तेल मिलाकर लगाएं। चंदन का लेप भी राहत देता है। इससे खुजली कम होती है और चकत्ते भी कम होते हैं।

पंचकर्म का हिस्सा नास्य शिरोधारा भी एलर्जी में भी बहुत मदद करता है। इसमें खास तरीके से तेल नाक में डाला जाता है, लेकिन यह प्रक्रिया घर में नहीं करनी चाहिए। एक्सपर्ट की देखरेख में इसे करें।

नेचुरोपथी और योग

योग और नेचुरोपथी एलर्जी से लड़ने में काफी कारगर हैं। नेचरोपथी एक्सपर्ट्स का कहना है कि एलर्जी से बचने के लिए पेट साफ रखना चाहिए। बहुत गर्म या बहुत ठंडा खाना नहीं खाना चाहिए। हमेशा साफ पानी पीना चाहिए। रोजाना करीब 15 मिनट अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका प्राणायाम करने से एलर्जी में फायदा होता है क्योंकि इनसे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।

अगर जल्दी-जल्दी सर्दी और जुकाम की एलर्जी हो तो सुबह उठकर गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पिएं।

पलूशन से होने वाली एलर्जी से बचने के लिए गुनगुने पानी में तुलसी, नीबू, काली मिर्च और शहद डालकर पिएं।

बदलते मौसम में होने वाली एलर्जी से बचने के लिए खट्टी चीजें जैसे कि अचार और तली-भुनी चीजें खाने से परहेज करें।

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