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बेल के पत्तों से दूर होती है ये खतरनाक बीमारियां

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बेल का पत्ता

बेल के वृक्ष की हर शाख, पत्ते, फल आदि सब एक उत्तम औषधी हैं। आज हम इसके पत्ते और उसके पेट के लिए उपयोग के बारे में आपको बताएंगें। बेल के पत्ते में वह प्राकृतिक गुण मौजूद होते हैं जो हमारे पेट के लिए बहुत लाभदायक होते हैं इनका रोज़ सेवन करने से हमारे पेट से जुड़ी सभी समस्याएं दूर रहती हैं। बेल के पत्तों का इस तरह से सेवन करना (नैचरोपैथी) के अंदर आता है।

सभी जानते है कि बेल का फल भगवान भोलेनाथ का प्रिय फल है। बेल का फल आयुर्वेद में काफी महत्व रखता है। आयुर्वेद में बेल के फल की तरह बेल के पत्ते का उपयोग कई दवाइयों को बनाने में किया जाता है। बेल का पत्ता अपच, गैस की समस्या, नपुंसकता, दमा रोग, एसिडिटी, कृमि नाशक, ज्वर, त्रिदोष (वात, पित और कफ) विकार आदि को दूर करने वाला तथा आपको एक हेल्दी लाइफ प्रदान करने वाला है। इसलिए आज हम भी आपको बेल के पत्ते के फायदे बताने जा रहे हैं-

कैसे और कब करें सेवन

किसी भी खाद्य सामग्री का औषधि के रुप में जब भी सेवन किया जाता है तो इस बात का ध्यान रखना आवश्यक होता है कि औषधि को कब, कितना और कैसे सेवन किया जाना चाहिए। चूंकि यह एक प्रकार की आयुर्वेद औषधि है इसलिए इसका उपयोग आसान है।

1. सुबह उठकर नित्यक्रिया के पश्चात इसका सेवन उत्तम माना जाता है।

2. नित्यक्रिया के पश्चात यदि कुछ गंदगी पेट के भीतर रह जाती है तो यह उसे निकालने में सक्षम है।

3. इसके अधिकतम 3 पत्ते ही एक दिन में लेने चाहिए। पत्तों को अच्छी तरह धो लेना चाहिए फिर दांतों से चबाना चाहिए ताकि इसका रस अच्छी तरह से निकल आए और अंत में इसे खा लेना चाहिए।

4. इसके अलावा जो पेट के महत्वपूर्ण एन्ज़ायम होते हैं यह उन्हें तंदरुस्त रखने में मदद करते हैं।

5. पेट के भीतर आंतों, पैनक्रियाज़ को स्वस्थ रखने में यह उत्तम औषधि है।

6. पाचन क्रिया में सहायक किडनी और लीवर को यह हमेशा स्वस्थ रखता है।

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ज्वर- जब कभी आपको बुखार या ज्वर आ जाए तो बेल की पत्तियों को 1 से 2 गिलास पानी में अच्छे से पकाकर काढ़ा बना लें और फिर इस काढ़े को पी जाएं। ऐसा करने से आपका बुखार ठीक हो जाएगा।

हार्ट प्रॉब्लम- बेल के पत्तों का काढ़ा बनाकर रोजाना पीने से आपका हृदय हमेशा मजबूत रहेगा और हार्ट अटैक का खतरा भी कम रहेगा।

मुँह में छाले- जब कभी मुंह में छाले हो जाएं, तो बेल की पत्तियों को मुंह में रखकर चबाते रहें। इससे छाले धीरे धीरे समाप्त हो जाएंगे।

अपच की समस्या- अपच की समस्या होने पर थोड़े से बेल के पत्ते, थोड़ा सेंधा नमक व थोड़ा कालीमिर्च पीसकर कुछ दिनों तक सेवन करें। इससे अपच की समस्या दूर होती है।

मधुमेह रोग- 20 बेल के पत्ते, 20 नीम के पत्ते व 10 तुलसी के पत्तों को एक साथ पीसकर छोटी छोटी गोली बनाकर सुखा लें। अब रोज सुबह एक गोली का सेवन करें। इससे मधुमेह रोग में बेहद लाभ मिलता है

संधिवात या गुठनों का दर्द- संधिवात या गुठनों का दर्द होने पर बेल के पत्ते गर्म करके दर्द वाली जगह बाँधने से सूजन व दर्द में राहत मिलती है।

कमजोरी- बेल के पत्तियों की चाय बनाकर इसमें थोड़ा जीरा पाउडर और दूध मिलाएं, इसे पीने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है।

नपुंसकता का इलाज- यौन विकार को दूर करने के लिए बेल के पत्ते के रस में थोड़ा शहद मिलाकर लिंग पर 40 दिनों तक लेप करें। इससे नपुंसकता समाप्त होती है।

गैस की समस्या- पेट में गैस की समस्या होने पर थोड़े से बेल के पत्ते व हरसिंगार के पत्तों को 1 गिलास पानी में उबाल लें। फिर इसमें स्वादानुसार थोड़ा काला नमक मिलाकर पी जाएं। इससे गैस की समस्या दूर हो जाती है।

शारीरिक दुर्गंध- बेल के पत्तों को पानी में डालकर स्नान करने से शारीरिक दुर्गंध नहीं आती है। इस बेल के पत्ते के फायदे से आपके डियोड्रेंट का खर्चा बच जाएगा।

बेजान और रूखी त्वचा में चमक लाना हो या बालों को स्वस्थ और सुंदर बनाना हो, बेलपत्र इसमें बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। बेल की पत्तियों से त्वचा का उपचार बेलपत्र में कैरोटीन होता है और ये त्वचा की रंगत को एक जैसा बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बेल के रोजाना उपयोग से त्वचा के सफ़ेद दाग हल्के हो जाते हैं।

दाग-धब्बों और खुजली के निशानों को ठीक – बेलपत्र के रस के साथ जीरा मिलाकर पीने से पित्त के साथ-साथ त्वचा पर होनवाले दाग-धब्बों और खुजली के निशानों को भी ठीक करने में मदद मिलती है। बालों के लिए उपयोगी फल बेल के पके हुए फल के छिलके को साफ कर सुखाकर पीस लें और उसमें तिल का तेल और कपूर मिलाएं और तेल को हर दिन सिर में लगाएं, इससे जूं से राहत मिलेगी। बालों को झड़ने से रोकने के लिए बेलपत्र का सेवन सबसे उचित तरीका है। हर दिन बेल के पत्ते को धोकर तुलसी की तरह खाएं जल्द लाभ होगा।

खून साफ होने में मदद – बेल के रस को हल्के गुनगुने पानी में मिलाएं और इसमें शहद की कुछ बूंदें डालें। इस घोल का नियमित सेवन करने से खून साफ होने में मदद मिलती है।

सफेद दाग – कहते है कि बेलपत्र की मदद से सफेद दाग भी ठीक होते हैं। बेल के गूदे में सोरलिन नामक तत्व पाया जाता है जो त्वचा की धूप सहने की क्षमता बढ़ाता है, साथ ही इसमें कैरोटीन भी पाया जाता है जो सफेद दाग हल्के करने में मदद करता है।

बेलपत्र पित्त की समस्या, खुजली और त्वचा के दाग-छब्बों को भी दूर करने में सहायक है। इसके लिए बेल के रस में जीरा मिलाकर पिएं।

सिर और बालों से संबंधि समस्या को भी बेलपत्र की सहायता से दूर किया जा सकता है। इसके लिए बेल के पके हुए फल के छिलके लें, उन्हें साफ करके उनमें तिल का तेल और कपूर मिलाएं। अब इस तेल को रोजाना सिर में लगाएं, इससे सिर में जूं खत्म होने के अलावा अन्य समस्याओं में भी फायदा होता है।

बालों को झड़ने से रोकने में बेलपत्र बालों को झड़ने से रोकने में भी मददगार है। इसके लिए रोजाना एक बेल के पत्ते को धोकर खा सकते है। जल्द ही आपको फर्क दिखना शुरू हो जाएगा।

सांस से जुड़ी बीमारियों में लाभ – बेल पत्तियों का रस बनाकर नियमित रूप से सेवन करने से सांस से जुड़ी बीमारियों में लाभ होता है।

बेल के पत्तों में छिपा है जनसंख्या नियंत्रण का राज, कैंसर और लीवर के लिए भी फायदेमंद

अगर आप बिना किसी परेशानी के बच्चा नहीं चाहते हैं तो आपको बेल (वुड एपल) के पत्ते का नियमित सेवन करना होगा। जब तक आप बेल के पत्ते का सेवन करेंगे, तब तक बच्चा नहीं होगा। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के जंतु विज्ञान विभाग के वरीय शिक्षक प्रो. विभूति नारायण सिंह ने बेल के पत्ते पर शोध किया है।

प्रो. सिंह का कहना है कि पुरुष जब तक बेल के पत्ते के चूर्ण का सेवन करेगा तब तक बच्चा नहीं होगा। जब बच्चे की इच्छा हो तब चूर्ण का सेवन करना बंद कर दे। यह शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के जर्नल में प्रकाशित भी हो चुका है। शोध को मान्यता भी मिल गई है। प्रो. सिंह के साथ राजेश कुमार ने भी काम किया है। अभी तक पुरुष जनसंख्या नियंत्रण के लिए कंडोम या फिर नसबंदी का सहारा लेते रहे हैं।

चूहों पर किया सफल प्रयोग
प्रोफेसर सिंह ने 12 चूहों पर रिसर्च किया। छह चूहों को 0.15 मिलीग्राम बेल के पत्ते के चूर्ण का घोल बनाकर पिलाया गया। दसवें दिन देखा गया कि उसमें स्पर्म (शुक्राणु) और सीमेन का पीएच मान कम हो गया। इस तरह 20वें, 30वें, 40वें और 50वें दिन धीरे-धीरे स्पर्म कम होता गया। मूवमेंट कम हो गया। सीमेन का पीएच कम हो गया। इसके अलावा छह और चूहों को बिना कुछ किए छोड़ दिया गया। 50वें दिन देखा गया कि जिसे चूर्ण खिलाया गया था, उनमें शुक्राणुओं की संख्या कम हो गई थी। उनकी प्रजजन क्षमता घट गई। जिन्हें चूर्ण का घोल नहीं पिलाया गया, उनमें शुक्राणुओं की संख्या बरकरार थीं। इसके बाद उन चूहों को फिर से चूर्ण खिलाना बंद कर दिया गया और देखा गया कि शुक्राणु की संख्या धीरे-धीरे बढऩे लगीं।

बेल के पत्ते कैंसर रोधी, लीवर के लिए भी फायदेमंद
प्रोफेसर सिंह की मानें तो बेल के पत्ते का चूर्ण गर्भ निरोधक में कारगर है। प्रति किलो शरीर के वजन के हिसाब से पुरुष 10 ग्राम बेल के पत्ते के चूर्ण का सेवन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि बेल के पत्ते के चूर्ण के सेवन से कैंसर होने की संभावना कम रहती है। किसी भी प्रकार के सूजन में फायदेमंद है। लीवर को फायदा पहुंचाता है। यह एंटी ऑक्सीडेंट हैं। एलर्जी को ठीक करता है। पेट की बीमारी को ठीक करता है।

धार्मिक मान्यताएं
बेल की पत्तियां अधिकतर तीन, पांच या सात के समूह में होती हैं। तीन के समूह की तुलना भगवान शिव के त्रिनेत्र या त्रिशूल से की जाती है। इसके अलावा इन्हें त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी माना जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार मंदार पर्वत पर माता पार्वती के पसीने की बूंदे गिरने से बेल के पेड़ की उत्पत्ति हुई। यह पेड़ सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न कर आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।

बेल के स्वास्थ्य लाभ
गर्मी के मौसम में मिलने वाला बेल गर्मी से राहत देने के साथ ही कई स्वास्थ्य समस्या से भी निजात दिलाता है। अगर आप हर रोज बेस का शरबत पीते हैं तो आप हमेशा निरोग बने रहेंगे।

मधुमेह रोगी के लिए फायदेमंद
मधुमेह रोगियों के लिए बेलफल बहुत लाभदायक है। बेल की पत्तियों को पीसकर उसके रस का दिन में दो बार सेवन करने से डायबिटीज की बीमारी में काफी राहत मिलती है। आप चाहें तो कुछ दिन तक इसका नियमित सेवन करके फर्क देख सकते हैं।

सेहत के फायदे

  •  बेल फल में मौजूद टैनिन डायरिया और कालरा जैसे रोगों के उपचार में काम आता है।
  •  कच्चे फल का गूदा सफेद दाग बीमारी का प्रभावकारी इलाज कर सकता है।
  •  इससे एनीमिया, आंख और कान के रोग भी दूर होते हैं।
  •  बेल के पत्ते के चूर्ण के सेवन से कैंसर होने की संभावना कम रहती है।
  •  पुराने समय में कच्चे बेल के गूदे को हल्दी और घी में मिलाकर टूटी हुई हड्डी पर लगाया जाता था।
  •  इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स के चलते पेट के छालों में आराम मिलता है।
  •  वायरस व फंगल रोधी गुणों के चलते यह शरीर के कई संक्रमणों को दूर कर सकता है।
  •  विटामिन सी का अच्छा स्रोत होने के चलते इसके सेवन से सर्वी नामक रक्त वाहिकाओं की बीमारी में आराम मिलता है।
  •  बेल की पत्तियों का सत्व रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने में लाभदायक है।
  •  पेड़ से मिलने वाला तेल अस्थमा और सर्दी-जुकाम जैसे श्वसन संबंधी रोगों से लड़ने में सहायक है।
  •  पके हुए फल के रस में घी मिलाकर पीने से दिल की बीमारियां दूर रहती हैं।
  •  कब्ज दूर करने की सबसे अच्छी प्राकृतिक दवा है। इसके गूदे में नमक और काली मिर्च मिलाकर खाने से आंतों से विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं।

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खून की कमी को दूर करे
जिन लोगों में खून की कमी की समस्या होती है वे पके हुए सूखे बेल की गिरी का पाउडर बनाकर गर्म दूध में मिश्री के साथ एक चम्मच पावडर प्रतिदिन देने से शरीर में नए रक्त का निर्माण होकर स्वास्थ्य लाभ होता है।

डायरिया
गर्मियों में डायरिया की समस्या बहुत आम होती है। ऐसी स्थिति में होने वाले उल्टी-दस्तों, जी मिचलाने में बेल के गूदे को पानी में मथ कर चीनी मिला कर पीने से लाभ होता है। इससे आपको अंदर से अच्छा महसूस होगा और पेट को शीतलता का आभास होता है।

लू लगने पर
गर्मियों में लू लगने पर बेल के ताजे पत्तों को पीसकर मेहंदी की तरह पैर के तलुओं में भली प्रकार मलें। इसके अलावा सिर, हाथ, छाती पर भी इसकी मालिश करें। मिश्री डालकर बेल का शर्बत भी पिलाएं तुरंत राहत मिलती है।

भूख बढ़ाएं
भूख कम हो, कब्ज हो, जी मिचलाता हो तो इसका गूदा पानी में मथ कर रख लें और उसमें चुटकी भर लौंग, काली मिर्च का चूर्ण, मिश्री मिला कर कुछ दिन लेने से भूख बढ़ेगी।

कैसे रहें सावधान

बेल के पत्तों का सेवन करने के कुछ समय बाद ही दांत अच्छी तरह साफ करने चाहिए क्योंकि बेल के पत्तों में जो औषधिय गुण होते हैं उनमें से एक गुण दांतों को काला करता है। यदि एक लंबे समय तक बेल के पत्तों के सेवन के बाद दांतों की सफ़ाई न की जाए तो दांत काले होना शुरु हो जाते हैं।

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