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कोरोना वायरस का कहर, किस गलती की सजा भुगत रहा है चीन

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क्या है ‘वुहान कोरोना वायरस’? ये होते हैं इस बीमारी के लक्षण  

चीन में इन दिनों ‘वुहान कोरोना वायरस’ का कहर बढता जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक इस वायरस की चपेट में आने से 2000 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 80000 से अधिक इस वायरस से ग्रस्त बताए जा रहे हैं। भारत में बिहार के पटना में कोरोना वायरस का एक मामला सामने आया है।

फिलहाल, पीड़ित युवती को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी के लक्षण 2002 में फैली सार्स जैसे हैं, जिसमें संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने में समस्या होती है।

क्या है वुहान कॉरोना वायरस?

वुहान कॉरोना वायरस कोरोना वायरस फैमिली का सदस्य है, जो इससे पहले कभी सामने नहीं आया। दूसरे कोरोना वायरस की तरह ये भी जानवरों से उत्पन्न हुआ है। इस वायरस की चपेट में आने वाले लोगों में SARS (Severe Acute Respiratory Syndrome) और MERS (Middle Eastern Respiratory Syndrome) जैसे लक्षण पाए गए हैं। ये दोनों सिंड्रोम्स भी कोरोना वायरस के कारण होते हैं जो कि जानवरों से आए थे।

बता दें कि SARS और MERS के लिए जिम्मेदार कोरोना वायरस चमगादड़ में उत्पन्न हुआ था। ऐसी अटकलें लगाई जा रहीं है कि वुहान कोरोना वायरस भी चमगादड़ या सांप से उत्पन्न हुआ होगा और किसी मध्यस्थ प्रजाति के जरिए ये वायरस इंसान के अंदर पहुंचा होगा। 2002 में 37 देशों के 8,000 से अधिक लोग SARS की चपेट में आए थे, जिसमें से 750 लोगों की मौत हो गई थी।

वुहान कोरोनावायरस के कारण पैदा होने वाले लक्षण

ब्रिटिश न्यूज वेबसाइट ‘द गार्जियन’ के अनुसार वुहान कोरोनावायरस से ग्रस्त होने वाले लोगों में बार-बार खांसी आना, बुखार आना और सांस लेने में तकलीफ जैसे कई लक्षण देखने को मिले है, जबकि कई गंभीर मामलों में शरीर के अंग खराब होने के मामले भी सामने आए हैं। ये वायरस सबसे ज्यादा व्यक्ति के फेंफड़ों पर असर करता और उन्हें खराब कर देता है।

पूरी तरह से इलाज संभव नहीं

डॉक्टर्स के अनुसार ये एक किस्म का वायरल निमोनिया है, जिसमें एंटीबायोटिक्स कोई असर नहीं करती हैं। फ्लू जैसी बिमारी के लिए प्रयोग की जाने वाली एंटीवायरल ड्रग्स भी इस पर बेअसर साबित हुई हैं। ऐसे में इस बीमारी से रिकवरी व्यक्ति के मजबूत इम्मयून सिस्टम पर ही निर्भर करती है। फिलहाल, वैज्ञानिक इस वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

चीन ने अगर ये ‘गलती’ नहीं की होती, तो इतना नहीं फैलता कोरोना वायरस

क्या चीन ने छिपाई कोरोना वायरस के संक्रमण की बात

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा जा रहा है कि वुहान के डॉक्टरों को दिसंबर की शुरुआत में ही कोरोना वायरस के संक्रमण का पता चल गया था. डॉक्टरों ने चेतावनी दी थी कि ये महामारी का रूप ले सकता है. लेकिन लोकल कम्युनिस्ट पार्टी ने इस जानकारी को छिपाए रखा. कुछ डॉक्टरों ने इसकी जानकारी सार्वजनिक करने की कोशिश की तो उन्हें डांट फटकार लगाई गई.

इस वायरस को लेकर वुहान के हेल्थ अथॉरिटी की मीटिंग भी हुई. लेकिन वुहान के मेयर का कहना था कि वो 20 जनवरी तक इस बारे में कुछ भी जानकारी प्रकाशित करने की स्थिति में नहीं हैं. चीन में उस वक्त नए साल की छुट्टियां मनाई जा रही थीं. इस दौरान चीन के लोग बड़ी संख्या में अपने घरों या फिर विदेश की सैर पर निकलते हैं. वुहान में ट्रैवल रिस्ट्रिक्शन के पहले ही 5 लाख लोग शहर छोड़कर चले गए थे.

चीन ने कोरोना वायरस के संक्रमण को हल्के में लिया
डॉक्टरों के मुताबिक चीन और वहां के लोगों ने शुरुआती तौर पर कोरोना वायरस के संक्रमण को हल्के में लिया. डॉक्टर बताते हैं कि कोरोना का वायरस 10 से लेकर 14 दिनों तक इनक्यूबेशन पीरियड में रहता है. इस दौरान मरीज को संक्रमण का पता नहीं चलता है और वो खुद को स्वस्थ पाता है. इस वजह से भी संक्रमण फैलता रहा और लोगों को पता नहीं चला.

संक्रमण के फैलने की एक वजह ये भी रही कि कुछ लोगों ने तो चीन का ट्रैवल कैंसल कर दिया. उन लोगों छुट्टियों के दौरान घरों में रहने का मन बना लिया. लेकिन कुछ लोगों ने बीमारी के लक्षण दिखने के बावजूद चीन के ट्रैवल को कैंसिल नहीं किया. वो कोरोना वायरस के संक्रमण को मामूली सर्दी मानकर चीन की यात्रा पर निकल पड़े. इस वजह से भी संक्रमण तेजी से फैला. सर्दी, खांसी और बुखार को लोगों ने मामूली मौसमी बीमारी मानकर उसकी उपेक्षा की. जिसका नतीजा उन्हें भुगतना पड़ा.

कोरोना वायरस को लेकर अब भी ज्यादा जानकारी नहीं

कोरोना वायरस दर्जनों देशों में फैल चुका है. लेकिन इस वायरस को लेकर अब भी ज्यादा जानकारी नहीं है. अभी तक ये पता नहीं किया जा सका है कि होस्ट से वायरस के निकलने के बाद ये कितने वक्त तक जीवित रहता है. इस तरह के कुछ वायरस 96 से लेकर 169 घंटों तक जीवित रहते हैं. लेकिन कोरोना वायरस के बारे में अभी डॉक्टर इसका पता नहीं लगा पाए हैं.

चमगादड़ों के कारण फैला घातक कोरोना वायरस, जानिए क्या कहती है ताजा रिपोर्ट

कोरोना वायरस का खौफ पूरी दुनिया में फैला चुका है। चीन से इस घातक संक्रमण की शुरुआत हुई थी, लेकिन अब भारत समेत अमेरिका, थाईलैंड, वियतनाम, मलेशिया जैसे 18 देशों में मरीज सामने आ चुके हैं। खास बात यह रही कि यह संक्रमण वैज्ञानिकों के लिए बिल्कुल नया था। यानी इसका कोई इलाज नहीं है और लक्षण बहुत सामान्य हैं। अब तक इसकी वैक्सीन इजाद नहीं की जा सकी है। 

अमेरिका और चीन समेत कई देशों के वैज्ञानिक जुटे हैं। इस बीच, कोरोना वायरस को लेकर प्रतिष्ठित जनरल लांसेट में एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। इसमें लिखा गया है कि चीन में कोरोना वायरस की शुरुआत चमगादड़ों से हुई है। पहले इसके लिए सांपों को जिम्मेदार माना जा रहा था।

रिपोर्ट में चीनी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के प्रोफेसर गुइजेन वू के हवाले से लिखा गया है कि अब तक जो डाटा मिला है, उससे साफ है कि ये वायरस चमगादड़ में ही पाए जाते हैं। चीनी शहर वुहान के 9 मरीजों पर किए गए अध्ययन से इसकी पुष्टि हुई है। बता दें, इससे पहले भी संक्रमण फैलाने वाले अधिकांश वायरस चमगादड़ों से ही इन्सानों में आए हैं। वुहान शहर के जिस मछली बाजार से कोरोना वायरस निकला है, वहां चमगादड़ भी बेचे जाते थे। हालांकि, कुछ ऐसे मरीज भी मिले हैं, जो कभी वुहान के उस सी-फूड मार्केट में नहीं गए।

डॉ. अजय मोहन के अनुसार, कोरोना एक वायरल इन्फेक्शन है, जो श्वसन तंत्र, नाक और गले को प्रभावित करता है। सर्दी जुकाम इसके सामान्य लक्षण हैं। यदि तेज बुखार है, सांस लेने में तकलीफ हो रही है और खांसी भी लंबे समय से बनी हुई है, तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

डब्ल्यूएचओ ने घोषित की हेल्थ इमरजेंसी-

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना वायरस को हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस ऐडनम के अनुसार, हमारी चिंता उन देशों को लेकर है, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं कमजोर हैं और उन देशों को कोरोना से मुकाबला करने में परेशानी हो सकती है। यही कारण है कि हमने अंतरराष्ट्रीय पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा की है।

कोरोना वायरस से बचाव के उपाय-

भारत सरकार की ओर से जारी हेल्थ एडवाइजरी के मुताबिक, साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखना चाहिए। बसों और ट्रेन में सफर करते समय मास्क पहनें। बाहर से घर में आएं तो साबुन से हाथ धोएं। खांसते और छींकते समय नाक, मुंह पर रुमाल रखें। जिन लोगों में कोल्‍ड और फ्लू के लक्षण हों, उनसे दूरी बनाकर रखें। अंडे और मांस के सेवन से बचें। जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें। पौष्टिक आहार लें। शराब और धूम्रपान से बचें। बच्चों और उम्रदराज लोगों के साथ ही गर्भवती महिलाओं की विशेष देखभाल जरूरी है।

डॉ. अजय मोहन के अनुसार, अभी डॉक्टर लक्षणों का इलाज कर रहे हैं। जैसे बुखार के लिए एंटीपायरेटिक दवाएं दी जा रही हैं। वहीं सर्दी जुकाम के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी रही हैं। जिन लोगों में ये लक्षण नजर आएं, वे घर में ही रहें और पर्याप्त आराम करें।

तेजी से फैल रहा कोरोना वायरस क्या है? जानें क्या हो सकता है एक से दूसरे इंसान में संक्रमण का खतरा

क्या कोरोना वायरस एक से दूसरे इंसान में फैलता है?

डब्ल्यूएचओ ने इस बात की पूरी संभावना व्यक्त की है कि कोरोना वायरस बेहद नजदीकी संपर्क में रहने वाले दो इंसानों में एक से दूसरे में संक्रमित हो सकता है.

कहां से आया कोरोना वायरस?

इस वायरस के फैलने की शुरुआत चीन से हुई है. चीन के हुवेई प्रांत के वुहान शहर में इसका सबसे ज्यादा प्रकोप देखने को मिला है. चीन के साथ ही जापान, थाईलैंड, सिंगापुर में कोरोना वायरस के मरीज मिले हैं. इंग्लैंड में एक ही परिवार के तीन सदस्य किसी वायरस से संक्रमित हो गए.

तेजी से फैलने वाला रहा है कोरोना वायरस!

कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है. डब्ल्यूएचओ ने इस खतरनाक वायरस के प्रति अपनी चिंता जाहिर की है. कई देशों में इसके मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है! डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार साल 2012 से अब तक यूरोप और मध्य पूर्व में इस वायरस से संक्रमित होने वाले मरीजों की संख्या 33 तक पहुंच गई है.

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क्या चिकन और अंडे से भी कोरोना वायरस फैल सकता है ?

चीन से दुनियाभर में फैला नोबल कोरोना वायरस कैसे फैलता है.? इस सवाल का जवाब हर कोई जानना चाहता है. चिकन खाने वाले लोगों में भी इस बात की चिंता है कि क्या कोरोना वायरस चिकन (Coronavirus Link Chicken) से भी फैल सकता है. चिकन और अंडा खाने वाले लोग तब से और ज्यादा परेशान हैं जब से सरकार ने चिकन और अंडे को ठीक से पकाकर खाने की सलाह दी है. जब चीन और दुनियाभर में कोरोना वायरस के कारण (Coronavirus causes) लोगों की मौत हो रही है तब इस सवाल का जवाब जरूरी हो जाता है.

कोरोना वायरस पर स्वास्थ्य मंत्रालय

भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी एडवाइजरी में कहा है कि चिकन और अंडे का सेवन ठीक से पकाकर ही करें. ऐसे में इस सवाल को बल मिल जाता है कि क्या चिकन और अंडा खाने से भी कोरोना वायरस फैल सकता है.?

कोरोना वायरस जंगली पशुओं से इंसान में आया है इस बात की संभावना तमाम स्वास्थ्य संगठनों ने जताई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कोरोना वायरस को पशुओं से इंसान में आने की संभावना जता चुका है. हलांकि अभी तक इसपर कोई ठोस शोध सामने नहीं आया है. क्या चिकन, मटन और मछली खानें से स्वाइन फ्लू का संक्रमण हो सकता है.?

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus Infection) के डर का असर चिकन बाजार पर भी पड़ रहा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस जब से फैल रहा तब से चिकन की मांग में कमी आई है. भारत में लगभग 10 प्रतिशत चिकन की मांग घट गयी है.

किन पशुओं में कोरोना वायरस पाया जाता है.? 

ANIMAL & CORONAVIRUSES: अभी तक के शोध बताते हैं कि कोरोना वायरस कई जंगली पशुओं में पाया जाता है. चमगादड़ और ऊंट को कोरोना वायरस का प्रमुख कारण माना जाता रहा है. क्योंकि इसके पहले कोरोना वायरस जैसा ही सार्स और मार्स कोरोना वायरस इसी तरह के जंगली पशुओं से इंसान में आया था.

चीन में हुए एक शोध के अनुसार कोरोना वायरस पैंगोलिन से इंसानों में आया होगा. इस दावे का आधार कोरोना वायरस के डीएनए को बनाया गया है. वैज्ञानिकों का दावा है कि कोरोना वायरस और पैंगोलिन का डीएनए 99 प्रतिशत तक मैच कर रहा है. इसके पहले के शोध में चमगादड़ से कोरोना वायरस का डीएनए 80 प्रतिशत मैच कर चुका है.

चिकन और अंडे का कोरोना से संबंध

Chicken and Eggs Link Coronavirus: इस मसले पर अभी तक कोई ठोस शोध नहीं हो पाया है. स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी का मतलब इतना है कि जानवरों के मांस से कोरोना वायरस का संक्रमण हो सकता है. कच्चे मांस या अंडे से कई तरह के फ्लू वायरस पहले भी फैल चुके हैं. कोरोना वायरस से बचने के लिए यह एडवाइजरी एक सतर्कता की तरह है.

हेल्थ एक्सपर्ट्स और स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अभी तक भारत में मुर्गियों और अंडे में कोरोना वायरस फैलने का मामला सामने नहीं आया है. चीन में भी कोरोना वायरस इंसानों से ही एक दूसरे में फैल रहा है. चिकन और अंडे के सेवन से डरने की कोई जरूरत नहीं है.

चिकन, मटन और अंडे के सेवन में सावधानी रखने की जरूरत है. बेहतर स्वास्थ्य और संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए किसी भी तरह से मांसाहार का सेवन ठीक से पकाकर ही करना चाहिए.

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