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फिस्टुला का घरेलू उपचार !!

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चोपचीनी और मिस्री

फिस्टुला का इलाज चोपचीनी और मिस्री के सहयाता से भी किया जा सकता है. इसके लिए आपको इन्हें बारीक पीसकर समान मात्रा में इसमें देशी घी मिलायें. फिर इससे 20-20 ग्राम के लड्डू बना कर इसे सुबह शाम नियमित रूप से खाना होगा. ध्यान रहे इस दौरान आप नमक, तेल, खटाई, चाय, मसाले आदि न खाएं. क्योंकि इसे खाने से इस दवा का असर खत्म हो सकता है. यानि इलाज के दौरान आप फीकी रोटी को घी और शक्कर के साथ खा सकते हैं. इसके अलावा आप दलिया और बिना नमक का हलवा इत्यादि भी खा सकते हैं. यदि आपने नियमित रूप से इसका पालन किया तो लगभग 21 दिन में आपका फिस्टुला सही हो सकता है. आप चाहें तो इसके साथ सुबह शाम 1-1 चम्मच त्रिफला चूर्ण को भी गुनगुने पानी के साथ ले सकते हैं.

पुनर्नवा

फिस्टुला के कई घरेलू उपचार हैं जिनसे इसे ठीक किया जा सकता है. इसके लिए आपको पुनर्नवा, हरड़, दारुहल्दी, गिलोय, हल्दी, सोंठ, चित्रक मूल, भारंगी और देवदार को एक साथ मिलाकर काढ़ा बनाएँ. फिर इस काढ़े को नियमित रूप से पियें तो सूजनयुक्त फिस्टुला में काफी लाभकारी साबित होता है. पुनर्नवा शोथ-शमन कारी गुणों से युक्त होता है.

नीम

नीम की पत्तियों का इस्तेमाल भी फिस्टुला के उपचार के लिए किया जाता है. इसके लिए इस पत्तियों को घी और तिल की 5-5 ग्राम की मात्रा में लें. फिर उसे कूट-पीसकर उसमें 20 ग्राम जौ का आटा मिलाकर उस पानी की सहायता से इसका लेप तैयार करें. अब इस लेप को किसी साफ कपड़े के टुकड़े पर फैलाकर फिस्टुला पर बांध लें. इससे काफी लाभ मिलता है.

गुड़

पुराना गुड़, नीलाथोथा, गन्दा बिरोजा और सिरस की एक समान मात्रा को थोड़े से पानी में घोंटकर इसका मलहम बनाएं. इसके बाद उस मलहम को कपड़े पर लगाकर फिस्टुला के घाव पर कुछ दिनों तक लगातार रखने से यह रोग ठीक हो सकता है.

शहद

फिस्टुला के इलाज के लिए शहद और सेंधानमक को एकसाथ मिलाकर इसकी एक बत्ती तैयार करें. फिर इस बत्ती को फिस्टुला के नासूर में रखें. यदि आप नियमित रूप से ऐसा करेंगे तो आपको इसका निश्चित लाभ मिलेगा.

केला और कपूर

एक पके केले और कपूर भी फिस्टुला के उपचार के लिए बहुत सहायक होता है. आप पके हुए केले के बीच में चीरा लगा कर चने के दाने के बराबर कपूर को रख दें और फिर इसको खाए और इसे खाने के एक घंटा पहले और एक घंटा बाद में कुछ भी नहीं खाना पीना चाहिए. यदि फिस्टुला बहुत पुरानी हो गयी हो और इस प्रकार की उपाय से सही नहीं होती है तो कृपया सर्जरी का सहारा लें.

भोजन और परहेज

आहार-विहार के असंयम से ही रोगों की उत्पत्ति होती है. इस तरह के रोगों में खाने-पीने का संयम न रखने पर यह बढ़ जाता है. अत: इस रोग में खास तौर पर आहार-विहार पर सावधानी बरतनी चाहिए. इस प्रकार के रोगों में सर्व प्रथम रोग की उत्पति के कारणों को दूर करना चाहिए क्योंकि उसके कारण को दूर किये बिना चिकित्सा में सफलता नहीं मिलती है. इस रोग में रोगी और चिकित्सक दोनों को सावधानी बरतनी चाहिए.

अदरक से फिस्टुला का उपचार

इसमें शोगोलॉल्स, जिन्जरोल और ज़िंजरोन हैं। यह थकान, उल्टी और इस दर्दनाक असुविधा के अन्य लक्षणों से राहत प्रदान करती है।

हाथी यम से फिस्टुला का उपचार

इस जड़ी बूटी में इस स्थिति से निपटने के बड़े गुण शामिल हैं। यह विभिन्न ऑक्सीडेटिंग से भरपूर हैं। यह मानव शरीर में फिस्टुला के कारण विभिन्न असुविधा और मुश्किल परिस्थितियों से छुटकारा पाने में मदद करता है।

मिमोसा प्यूडिका से फिस्टुला का उपचार

इस जड़ी बूटी को कई फायदों के लिए जाना जाता है। फिस्टुला के कारण शरीर में रक्त की अशुद्धता और दर्द को समाप्त के लिए यह अत्यधिक उपयोगी है। ये एक टॉनिक का काम करते हुए आसानी से विभिन्न लक्षणों का इलाज करने में मदद करता है।

हल्दी से फिस्टुला का उपचार

हल्दी फिस्टुला की समस्या का इलाज करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण जड़ी बूटी है। इसमें एंटी एलैर्जिक और एंटी शुगर जैसे गुण हैं। यह शरीर में इम्‍युनिटी पॉवर को बढ़ाकर स्वास्थ्य में सुधार करता है। इसके औषधीय गुण शरीर के टॉक्सिन्स से लड़ने में मदद करते है।

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