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क्यों होते है गोखरू (गट्ठे,Foot Corn)? देसी नुस्खे से करें इलाज

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गट्ठे, घट्ठे , corns जब पैरों के तलवों की त्वचा पर रगड़ व दवाब से मोटा, सख्त एवं सींग के समान बन जाती है तो इसे घट्टा कहते हैं। जब शरीर के बाहर की चमडी़ कठोर होकर गांठ बन जाती है तो बहुत ज्यादा दर्द होता है। यह हाथ की हथेली और पैरों के तलवों में ज्यादा होता है। यह ज्यादा मोटा होने पर नंगे पैर चलने में और जूते पहनने में भी बहुत दर्द होता है। कई लोग तो इसे किसी ब्लेड या चाकू से काट भी देते है पर यह दुबारा वैसा ही हो जाता है।

इसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह धीरे-धीरे बढ़ने लगते है। वैसे तो इसके लिए छोटा-सा ऑपरेशन होता है लेकिन कई लोग इससे डरते और मार्कीट में मिलने वाली क्रीम और फुट कॉर्न बैंड इस्तेमाल करते हैं। मगर इनका असर कम ही नजर आता है। आइए आज हम आपको फुट कॉर्न के कारण और कुछ घरेलू उपयार बताएंगे जो आपको जल्द ही राहत दिलाने में मदद करेंगे।

फुट कॉर्न के कारण

टाइट जूते पहनना
हर वक्त ऊंची एडी के सैंडल पहने रहना
लगातार कई-कई घंटो तक खड़े रहना
बिना मोजे के जूते पहनना
बिना चप्पल घूमते रहना

इसके अलावा यह समस्या अक्सर दुबले-पतले लोगों के पैरों में होती हैं क्योंकि उनकी त्वचा में चर्बी (गद्दापन) की कमी होती है।

नुस्खे अपनाने से पहले ध्यान रखें यह बात

अगर आप घरेलू नुस्खों के जरिए फुट कॉर्न्स के बचाव चाहते है तो कोई भी तरीका अपनाने से पहले अपने पैरों को नमक वाले गुनगुने पानी में अच्छे से तरह से धोएं। धोने के बाद पैरों को सुखाएं और फिर पेस्ट को इनपर इस्तेमाल करें।

विभिन्न औषधियों से उपचार-

मुलेठी

रात को 1 चम्‍मच मुलेठी में पर्याप्‍त मात्रा में सरसों का तेल मिलाकर पेस्‍ट बना लें। इस पेस्ट को प्रभावित जगह पर लगाएं। फिर इसपर पट्टी बांधकर रातभर के लिए छोड़ दें। सुबह पट्टी को हटाकर गुनगुने पानी से पैरों को धोएं। तब तक इस नुस्खे को ट्राई करें, जब तक कॉर्न्स नर्म व आकार में छोटे न हो जाए।

सिरका

सफेद सिरका आसानी फुट कॉर्न्स की समस्या से राहत दिलाएगा। कॉटन बॉल को सिरके में डुबोकर प्रभावित जगह पर लगाएं। फिर इसके ऊपर डक्ट टेप लगा दें। 3-4 घंटे के बाद इसे उतार दें।

टी ट्री ऑयल

इस तेल में एंटी-फंगस और एंटी-बैक्‍टीरियल गुण होते हैं जो फुट कॉर्न्स से छुटकारा दिलाने में काफी मददगार है। कॉटन बॉल की मदद से टी ट्री ऑयल को कॉर्न्‍स पर रगडें। फिर इसपर टेप लगाकर रातभर के लिए ऐसे ही छोड़ दें। सुबह साफ पानी से पैरों को धो लें।

लहसुन

लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगस गुण मौजूद होते है जो कॉर्न्‍स के इलाज के लिए उपयोगी माने जाते है। लहसुन की 3 कलियां अच्छे से भूनकर पाउडर बना लें। फिर इसमें लौंग का पाउडर मिलाए पेस्ट तैयार करके प्रभावित जगह पर लगाएं। पट्टी से कवर करके रातभर के लिए छोड़ दें। सुबह इसे खोलकर गुनगुने पानी से पैरों को धोएं।

तारपीन का तेल

यह तेल एक मजबूत एंटीसेप्टिक है जिकसे इस्तेमाल से कॉर्न्स आसानी से गायब हो जाएंगे। एक पतले कपड़ें में बर्फ लपेटकर प्रभावित जगह पर 2 मिनट तक मसाज करें। फिर अच्छे से सुखाकर कॉर्न्स पर तारपीन का तेल लगाए। पट्टी से बांधकर इसे रातभर के लिए छोड़ दें।

प्याज :

जंगली प्याज के कन्द (फल) को पीसकर पका लें। इसे गर्म-गर्म ही गट्ठे पर बांधने से बहुत जल्दी आराम आ जाता है।

प्याज के रस को दिन में गट्ठे पर लगा लें और गट्ठे के नर्म हो जाने पर गट्ठे को काटकर फेंक दें।

गट्ठे में प्रतिदिन 3 बार प्याज का रस लगाने से लाभ होता है।

1-2 प्याज के रस को बच्चे के पेशाब में मिलाकर गर्म करके बन्द गांठ पर लगाने से बन्द गांठ टूटकर निकल जाती हैं।

भिलावा :

भिलावे के तेल में मक्खन मिलाकर रोजाना 2 से 3 बार गट्ठे या मांस के बढ़ने (चर्मकील) पर लगाने से लाभ मिलता है।

सुहागा :

2 ग्राम सुहागे की खील या लावा को शहद के साथ सुबह और शाम खाने से गट्ठे समाप्त हो जाते हैं।

चमेली :

चमेली के पत्तों को पीसकर उसका ताजा रस लगाने से या उसे पीसकर उसके चूर्ण को गट्ठे पर बांधने से वो धीरे-धीरे पूरी तरह से ठीक हो जाता है।

राई :

शरीर के किसी भी अंग में यदि गांठ हो तो राई और थोड़ी सी कालीमिर्च के चूर्ण को घी में मिलाकर लेप करने से गांठ को बढ़ने से रोका जा सकता हैं। गांठ को पकाने के लिए, गुड़, गुग्गुल और राई को बारीक पीसकर पानी में मिलाकर, कपड़े की पट्टी पर लेप करके चिपकाने से गांठ पककर बिखर जाती है।

फिटकरी :

पैरों में कही-कहीं पर पत्थर की तरह सख्त कठोर गांठ सी हो जाती है जिसके कारण रोगी को चलने में दर्द होता है। इसके लिए फिटकरी, हल्दी और सुहागा को बराबर मात्रा में पीसकर रख लेते हैं। इस चूर्ण को थोड़ी सी मात्रा में पानी में गाढ़ा-गाढ़ा मिलाकर गट्ठे (गांठ) पर प्रतिदिन लगाने से लाभ होगा। इससे कुछ ही दिनों में गट्ठे ठीक हो जाते हैं। नींबू के रस से गट्ठे को तर रखने से भी गट्ठे ठीक हो जाते हैं।

चुकन्दर :

गट्ठे के रोगी को इस रोग की शुरूआत के 2 दिन में मौसमी फल और सब्जियों पर रहने दें। तीसरे दिन रोगी को प्रात:काल 1 गिलास पानी में नींबू का रस और 4 चम्मच शहद मिलाकर पिलाएं। दिन में 4 बार 1 कप अंगूर का रस तथा मौसंबी का रस रोगी को दिन में 1-2 बार पिलाएं। रोगी को शारीरिक श्रम न करने दें और उसे पूर्ण रूप से आराम करने दें। चौथे दिन से रोगी को लगातार कुछ दिनों तक आधा गिलास गाजर का रस और आधा चम्मच चुकन्दर का रस मिलाकर दें। रोगी को सामान्य, हल्का और अंकुरित अन्न सेवन कराना चाहिए। इससे कुछ ही दिनों में गांठ पिघल जाती है।

कलौंजी –

कलौंजी के तेल को गट्ठों पर नियमित रूप से लगाते रहने और रोजाना 1 चम्मच कलौंजी का तेल 15 दिन तक गर्म दूध में डाल कर पीने से लाभ मिलता है।

ग्वारपाठा (घृतकुमारी) :

गट्ठों की सूजन पर घृतकुमारी के पत्ते को एक ओर से छीलकर तथा उस पर थोड़ा सा हरिद्रा चूर्ण छिड़ककर थोड़ा-सा गर्म करके गांठों की सूजन पर लगाने से लाभ मिलता है।

शरीर की किसी नस में गांठ पड़ जाए तो वहां पर ग्वारपाठे का गूदा, लहसुन और हल्दी को एकसाथ मिलाकर गर्म-गर्म करके लगाने से आराम आता है।

गूलर :

शरीर के किसी भी अंग पर गांठ होने पर गूलर का दूध लगाने से लाभ मिलता है।

निर्गुण्डी :

निर्गुण्डी के पत्तों को गर्म करके बन्द गांठ पर बांधने से गांठ बिखर जाती है।

नींबू :

नींबू के रस को गट्ठे पर मलने से गट्ठा नर्म पड़ जाता है। इस पर नींबू की 1 फांक भी बांध सकते हैं।

गट्ठे पर नींबू के रस में रूई भिगोकर बांध दें और गट्ठे को नींबू के रस से तर करके रखें।

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सोयाबीन :

सोयाबीन के आटे की रोटी खाने तथा दूध पीने से जोड़ो का दर्द और गठिया दूर होती है।

बावची :

बावची के बीज़ों को पीसकर गांठ पर बांधते रहने से गांठ बैठ जाती है।

एरण्ड :

सुबह-शाम एरण्ड का तेल मलते रहने से गट्ठे ठीक हो जाते हैं। तेल में कपड़ा भिगोकर पट्टी बांधे। इसका प्रयोग लगभग 2 महीनों तक करने से गट्ठे ठीक हो जाते हैं।

आकड़ा :

आकड़े के दूध और गुड़ को बराबर मात्रा में मिलाकर गट्ठे पर लगाने से गट्ठे ठीक हो जाते हैं।

अलसी :

अलसी के चूर्ण को दूध व पानी में मिलाकर उसमें थोड़ा हल्दी का चूर्ण डालकर खूब पका लें और जहां तक सहन हो सके, गरम-गरम ही ग्रंथि व्रणों पर इस पोटली का गाढ़ा लेप करके ऊपर से पान का पत्ता रखकर बांधने से जख्म पककर फूट जाता हैं और जख्म की जलन आदि दूर हो जाती है। बड़ी-बड़ी अन्तर्विद्रधि भी इस उपाय से ऊपर को उभरकर फूट जाती है। किंतु अन्तर्विद्रधि पर यह पुल्टिस कई दिनों तक लगातार बांधनी पड़ती है।

पीपल :

पीपल के पत्ते गर्म करके सीधी और से बांधने पर बंद (गांठ) बैठ जाती है।

निरोगी रहने हेतु महामन्त्र

मन्त्र 1 :-

भोजन व पानी के सेवन प्राकृतिक नियमानुसार करे

रिफाइन्ड नमक,रिफाइन्ड तेल,रिफाइन्ड शक्कर (चीनी) व रिफाइन्ड आटा ( मैदा ) का सेवन न करें

विकारों को पनपने न दें (काम,क्रोध, लोभ,मोह,इर्ष्या,)

वेगो को न रोकें ( मल,मुत्र,प्यास,जंभाई, हंसी,अश्रु,वीर्य,अपानवायु, भूख,छींक,डकार,वमन,नींद,)

एल्मुनियम बर्तन का उपयोग न करें ( मिट्टी के सर्वोत्तम)

मोटे अनाज व छिलके वाली दालों का अत्यद्धिक सेवन करें

भगवान में श्रद्धा व विश्वास रखें

मन्त्र 2 :-

पथ्य भोजन ही करें ( जंक फूड न खाएं)

भोजन को पचने दें ( भोजन करते समय पानी न पीयें एक या दो घुट भोजन के बाद जरूर पिये व डेढ़ घण्टे बाद पानी जरूर पिये)

सुबह उठेते ही 2 से 3 गिलास गुनगुने पानी का सेवन कर शौच क्रिया को जाये

‎ठंडा पानी बर्फ के पानी का सेवन न करें

पानी हमेशा बैठ कर घुट घुट कर पिये

बार बार भोजन न करें आर्थत एक भोजन पूर्णतः पचने के बाद ही दूसरा भोजन करें

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