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गर्मियों में कैसे स्वस्थ रहे और उसके घरेलू उपाय !!

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गर्मियों में कैसे स्वस्थ रहे ?

सावधान रहे! गर्मियों की चिलचिलाती धुप और गर्म हवाओ ने दस्तक दे दी है। ऐसे में आपको न सिर्फ होनी त्वचा का ध्यान होगा, बल्कि हेल्थ का भी स्पेशल ध्यान रखना होगा। अपवित्र पदार्थो से बने हुए, केमिकल युक्त, केवल कुछ क्षणों तक शीतलता का आभास करने वाले परन्तु आंतरिक गर्मी बढ़ाने वाले बाजारू शीतपेय आकर्षक रंगीन जहर है।

अगर आप तेज धुप में जाते है तो सिर पर टोपी, हेलमेट या फेल्टहेट लगाकर जाएं, ताकि सिर पर धुप की सीधी किरणें न पड़े। गर्मी में दिन को घर से बहार जाने से पहले एक गिलास ठंडा पानी जरूर पिये एवं एक प्याज जेब में रखें। इससे लू का प्रभाव नहीं होता।

गर्मियों के दिनों में देर तक भूखे रहना अच्छा नहीं है। इस मौसम में तरबूज, संतरे, मोसम्बी, केला, हरी ककड़ी आदि का उपयोग करना चाहिए। खट्टा व बासी दही नहीं खानी चाहिए। गर्मियों के दिनों में हल्का भोजन करना चाहिए। बासी भोजन तथा तेज मिर्च मसाले वाले, तले हुए नमकीन, बेसन के पदार्थो का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

गर्मियों में स्वास्थ्य-रक्षा हेतु अपने देश का यह एक पारम्परिक नुस्खा है।इसके लिए कच्चे आम को पानी में उबालें। ठंडा होने के बाद उसे ठंडे पानी में मसल कर रस बनाये। इस रस में स्वाद के अनुसार गुड़, जीरा, पुदीना, नमक, आदि मिलाकर ज्यादातर दिन के समय इसका सेवन करें।

पीपल के पेड़ की डालियाँ, पत्ते, फल मिले तो उन्हें भी काट-कूट के शरबत में उबाल लें। उनका शीतलतादायी गुण भी लाभकारी होगा। डेढ़ ग्राम चीनी में देसी गुलाब के १०० ग्राम फूल मसलकर शरबत बनाया जाए तो वह बाजारू शर्बतों से पचासो गुना हितकारी है। आप घर पर ही यह शरबत बनाये। यह आँखों व पैरो की जलन तथा गर्मी का शमन करता है।

गर्मियों में जीरे की शिकंजी, ठंडाई, हरे नारियल का पानी, फलों का ताजा रस, दूध, निम्बू का शरबत, आम का पानी आदि शीतल, जलिये पदार्थों का सेवन करें। ग्रीष्म ऋतु में स्वाभाविक उत्तपन होने वाली कमजोरी, बेचैनी आदि परेशानियों से बचने के लिए ताजगी देने वाले कुछ प्रयोग आगे पढ़े।

गुलकंद के उपयोग से आँखों की जलन, पित्त व गर्मी से रक्षा होती है। धनिया, जीरा व सौंफ समभाग मिलाकर कूट लें। इस मिश्रण में दुगनी मात्रा में काली द्राक्ष व मिश्री मिलाकर रखें । एक चम्मच मिश्रण २०० मि. ली. में भिगोकर रख दें। दो घंटे बाद हाथ से मसलकर छान लें और सेवन करें। इससे आंतरिक गर्मी, हाथ-पैर के तलवे तथा आँखों की जलन आदि से राहत मिलेगी।

गर्मी के दिनों में आहार कम लेकर बार-बार जल पीना हितकर है परन्तु गर्मी से बचने के लिए बाजारू शीत पदार्थे एवं फलों ले डिब्बाबंद रस हानिकारक है। उनसे लाभ की जगह हानि अधिक होती है। ग्रीष्म ऋतु में सूर्य अपनी किरणों द्वारा शरीर के द्रव तथा स्निग्ध अंश का शोषण करता है, जिससे दुर्बलता, थकान, बेचैनी, अनुत्साह आदि उपद्रव उत्पन्न होते हैं। उस समय शीग्र बल प्राप्त करने के लिए मधुर, स्निग्ध आदि गुणयुक्त पदार्थों की आवश्यकता होती है।

धुप में या तेज गर्मी में घूमते हुए ठंडा पानी या पेय न पीये। घर पहुँचकर भी तुरंत पानी न पीये। जब पसीना सुख जाए तथा शरीर ठंडा हो जाए तब पानी पीना चाहिए। दिन में एक या दो बार नींबू-पानी-शक्कर डालकर पीना चाहिए। इससे अतिरिक्त दही, छाछ या मीठे शरबत का सेवन करना चाहिए। यदि ये संभव न हो तो एक गिलास पानी में १-२ चम्मच ग्लूकोस घोलकर पीना चाहिए।

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