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गठिया (आर्थराइटिस) रोग को जड़ से खत्म करने के रामबाण उपचार, एक बार जरूर पढ़े

गठिया (आर्थराइटिस) रोग को जड़ से खत्म करने के रामबाण उपचार, एक बार जरूर पढ़े

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क्‍या है गठिया?

जब हड्डियों के जोडो़ में यूरिक एसिड जमा हो जाता है तो वह गठिया का रूप ले लेता है। यूरिक एसिड कई तरह के आहारों को खाने से बनता है। रोगी के एक या कई जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन आ जाती है। इस रोग में जोड़ों में गांठें बन जाती हैं और शूल चुभने जैसी पीड़ा होती है, इसलिए इस रोग को गठिया कहते हैं। यह कई तरह का होती है, जैसे-एक्यूट, आस्टियो, रूमेटाइट, गाउट आदि।

जब हड्डियों के जोडो़ में यूरिक एसिड जमा हो जाता है तो वह गठिया का रूप ले लेता है। यूरिक एसिड कई तरह के आहारों को खाने से बनता है। रोगी के एक या कई जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन आ जाती है।

गठिया के लक्षण गठिया के किसी भी रूप में जोड़ों में सूजन दिखाई देने लगती है। इस सूजन के चलते जोड़ों में दर्द, जकड़न और फुलाव होने लगता है। रोग के बढ़ जाने पर तो चलने-फिरने या हिलने-डुलने में भी परेशानी होने लगती है।

किसको होता है आर्थराइटिस गठिया महिलाओं से ज्‍यादा पुरुषों को होता है। यह पुरुषों को 75 की उम्र के बाद होता है। महिलाओं में यह मेनोपॉज के बाद होता है।

आर्थराइटिस के जोखिम कारक महिलाओं में एस्ट्रोजन की कमी के कारण, शरीर में आयरन व कैल्सियम की अधिकता, पोषण की कमी, मोटापा, ज्‍यादा शराब पीना, हाई ब्‍लड प्रेशर और किडनियों को ठीक प्रकार से काम ना करने की वजह से गठिया होता है।

किस तरह से दिखता है गठिया?

पैरों के अंगूठों में सूजन पैरों में गठिया का असर सबसे पहले देखने को मिलता है। अंगूठे बुरी तरह से सूज जाते हैं और तब तक ठीक नहीं होते जब तक की उनका इलाज ना करवाया जाए।

उंगलियों का होता है यह हाल उंगलियों के जोड़ में यूरिक एसिड के क्रिस्‍टल जमा हो जाते हैं। इससे उंगलियों के जोडो़ में बहुत दर्द होता है जिसके लिये डॉक्‍टर का उपचार लेना पड़ता है।

दर्द से भरी कुहनियां गठिया रोग कुहनियां तथा घुटनों में हो सकता है। इसमें कुहनियां बहुत ही तकलीफ देह हो जाती हैं और सूजन से भर उठती हैं।

कैसा हो आहार संतुलित और सुपाच्य आहार लें। चोकर युक्त आटे की रोटी तथा छिलके वाली मूंग की दाल खाएं। हरी सब्जियों में सहिजन, ककड़ी, लौकी, तोरई, पत्ता गोभी, गाजर, आदि का सेवन करें। दूध और उससे बने पदार्थों का सेवन करें।

गठिया (आर्थराइटिस) रोग को जड़ से खत्म करने के रामबाण उपचार

इस समय गठिया रोग की समस्या बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है। पहले गठिया रोग ज्यादातर बुजुर्ग लोगों में ही होता था, किन्तु अब तो गठिया की समस्या नौजवानों में भी देखने को मिलती है। गठिया रोग मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है ,अस्तिसंधिशोथ और रुमेटी संधिशोथ। ये दोनों प्रकार की गठिया बहुत ही दर्द दायक होतीं। आज मैं आपको गठिया को जड़ से कैसे खत्म किया जाय ,इसके लिए कुछ रामबाण घरेलू उपचार बताने जा रहा हूँ –


मेथी –इस उपचार में मेथी के हरे पत्तों को देसी घी में भून लें और फिर इन भुने हुए पत्तों को पीस कर थोड़ी मिश्री मिला लें। इसके बाद इस मिश्रण से छोटे लड्डू के बराबर की गोलियां बनाकर रख लें। अब गठिया रोग से पीड़ित व्यक्ति को एक -एक लड्डू सुबह शाम सेवन करने को दें। इस का सेवन करने के बाद 300 से 400 ग्राम ठन्डे दूध का सेवन करें। एक माह तक इस उपचार को करने से गठिया रोग जड़ से खत्म हो जायेगा। गठिया रोग से पीड़ित व्यक्ति को आलू ,भिन्डी ,अरबी ,खटाई का सेवन नहीं करना है।


लहसुन -गठिया से पीड़ित व्यक्ति को 400 ग्राम दूध और 10 ग्राम लहसुन लेना है। लहसुन को छील कर छोटे -छोटे तुकडे कर ,दूध में मिलाकर तब तक उबालें जब दूध 100 ग्राम रह जाये। अब इस दूध को ठंडा कर लें। इस दूध का दस दिन सेवन करने से गठिया रोग खत्म हो जाता है।


अदरक –अदरक का रस निकाल लें और उसमें दो चम्मच देसी घी मिला लें। इस मिश्रण को दिन में तीन बार पीने से गठिया सहित अन्य वायु रोग खत्म हो जाते हैं।

हरसिंगार जिसके पेड़ बहुत बड़े नहीं होते हैं। इसमें गोल बीज आते हैं। इसके फूल अत्यन्त सुकुमार और बड़े ही सुगन्धित होते हैं। पेड़ को हिलाने से वे नीचे गिर पड़ते हैं। आयुर्वेद में हरसिंगार के कई सारे फायदे बताए गए है आइए जानें। आपको बता दें की पारिजात के पेड़ के पांच पत्ते को लेकर आप पत्थर में पिस ले और चटनी बनाकर इसे एक ग्लास पानी में इतना गरम करें की पानी आधा हो जाये, फिर इसको ठंडा करके पीजिये तो बीस-बीस साल पुराना गठिया का दर्द ठीक हो जाता है। जी हां ये सच है एक बार जरूर अपनाकर देखें।

वहीं बात करें घुटनों की चिकनाई तो आपको बता दें की अक्‍सर इसकी वजह से जोड़ो के दर्द बना रहता है तो आप इसके लिए पारिजात पेड़ के 10-12 पत्तों को पत्थर पे कूटकर एक गिलास पानी में उबालें-जब पानी एक चौथाई बच जाए तो बिना छाने ही ठंडा करके पी लें।इसका प्रयोग आप लगातार करते हैं तो 90 दिन में चिकनाई पूरी तरह वापिस बन जाएगी। इस परेशानी से निजात पाने के लिए पारिजात के पत्तों को धीमी आंच पर उबालकर काढ़ा बना लें। इसे साइटिका के रोगी को सेवन कराने से लाभ मिलता है। यह बंद रक्त की नाड़ियों को खोल देता है यही कारण है की ये साइटिका में कारगर है।

बकायन इसके अलावा आज हम आपसे जिस नुस्खे के बारे में बात करने जा रहे हैं उसका नाम बकायन है यह एक बहुत ही ज्यादा अच्छा औषधि और पोषक तत्वों से भरपूर पेड़ है . इसके पत्ते कैसे होते हैं और आकार में कुछ बड़े होते हैं . इस पेड़ को कई नामों से जाना जाता है और यह हमारे देश में हर जगह पर उपलब्ध होता है . बकायन के पेड़ का फल बहुत ही कड़वा होता है और उस की तासीर बहुत गर्म होती है। भयानक से भयानक गठिया रोग को खत्म करने के लिए अगर आप बकायन के पेड़ की छाल को पानी में उबालकर और उसे अच्छी तरह से छानकर दिन में एक बार सुबह के समय उसका सेवन करते हैं तो आपको गठिया के रोग से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाता है।इसके अलावा बकायन के पेड़ के फल को पानी में पीसकर घटिया वाली जगह पर है उसका लेप करने से भी गठिया का रोग ठीक हो जाता है।

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