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गिलोय इस धरती की संजीवनी, जरुर पढ़ें इसके फायदे

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आयुर्वेद की सर्वश्रेष्ठ बेल गिलोय (Giloy) बहुत से रोगों का उपचार करने में उपयोग होती है. इसीलिए माना जाता है कि गिलोय (Giloy) व्यक्ति को लम्बी उम्र प्रदान करती है. गिलोय (Giloy) की खास बात ये है कि इसकी बेल हर जगह आसानी से मिल जाती है. जिसकी वजह से इसको आसानी से प्राप्त किया जा सकता है. इसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते है और इसके हर हिस्से को किसी न किसी रोग के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है. गिलोय या गुडुची, जिसका वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया है, का आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसके खास गुणों के कारण इसे अमृत के समान समझा जाता है और इसी कारण इसे अमृता भी कहा जाता है। प्राचीन काल से ही इन पत्तियों का उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक दवाइयों में एक खास तत्व के रुप में किया जाता है।

इसके इतने सारे लाभों और गुणों के कारण ही इसे सर्वश्रेष्ठ बूटी या बेल माना जाता है. अगर आपके आसपास कोई नीम का पेड़ है तो आप उसकी जड़ में गिलोय (Giloy) को अवश्य बो दें. और उसका लाभ उठायें. ध्यान रहें आयुर्वेद में सिर्फ उसी गिलोय को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है जो नीम पर लिपटी हो. आज हम आपको गिलोय के ऐसे ही रोगनिवारक गुण के बारे में आपको बताने जा रहें है.

गिलोय की पत्तियों और तनों से सत्व निकालकर इस्तेमाल में लाया जाता है। गिलोय को आयुर्वेद में गर्म तासीर का माना जाता है। यह तैलीय होने के साथ साथ स्वाद में कडवा और हल्की झनझनाहट लाने वाला होता है।  गिलोय के गुणों की संख्या काफी बड़ी है। इसमें सूजन कम करने, शुगर को नियंत्रित करने, गठिया रोग से लड़ने के अलावा शरीर शोधन के भी गुण होते हैं। गिलोय के इस्तेमाल से सांस संबंधी रोग जैसे दमा और खांसी में फायदा होता है। इसे नीम और आंवला के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने से त्वचा संबंधी रोग जैसे एग्जिमा और सोराइसिस दूर किए जा सकते हैं। इसे खून की कमी, पीलिया और कुष्ठ रोगों के इलाज में भी कारगर माना जाता है।

गिलोय क्या है (What is Giloy?)

गिलोय का नाम तो सुना होगा लेकिन क्या आपको गिलोय की पहचान है कि ये देखने में कैसा होता है। गिलोय की पहचान और गिलोय के औषधीय गुण के बारे में जानने के लिए चलिये विस्तार से चर्चा करते हैं। गिलोय अमृता, अमृतवल्ली अर्थात् कभी न सूखने वाली एक बड़ी लता है। इसका तना देखने में रस्सी जैसा लगता है। इसके कोमल तने तथा शाखाओं से जडें निकलती हैं। इस पर पीले व हरे रंग के फूलों के गुच्छे लगते हैं। इसके पत्ते कोमल तथा पान के आकार के और फल मटर के दाने जैसे होते हैं। यह जिस पेड़ पर चढ़ती है, उस वृक्ष के कुछ गुण भी इसके अन्दर आ जाते हैं। इसीलिए नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय सबसे अच्छी मानी जाती है। आधुनिक आयुर्वेदाचार्यों (चिकित्साशात्रियों) के अनुसार गिलोय नुकसानदायक बैक्टीरिया से लेकर पेट के कीड़ों को भी खत्म करती है। टीबी रोग का कारण बनने वाले वाले जीवाणु की वृद्धि को रोकती है। आंत और यूरीन सिस्टम के साथ-साथ पूरे शरीर  को प्रभावित करने वाले रोगाणुओं को भी यह खत्म करती है।

बांझपन दूर करे  (Remove Infertility ) :
स्त्री का माँ बनना उसका सबसे बड़ा सौभाग्य माना जाता है क्योकि माँ बनाने पर वो अपने शरीर के एक हिस्से को अपने शिशु के रूप में पाती है. किन्तु वो स्त्री जिनको संतान नही हो पाती या बाँझ होती है उनका दुःख सिर्फ वो ही समझ सकती है. किन्तु गिलोय में ऐसे गुण होते है जिससे बांझपन से निवारण पाना संभव होता है. इसके लिए नारी को प्रतिदिन गिलोय और अश्वगंधा को 1 ग्लास दूध में अच्छी तरह पकाकर उसे ग्रहण करना चाहियें. इस तरह उन्हें जल्द ही बाँझपन से मुक्ति मिलती है. इसके साथ ही उसका गर्भाशय भी मजबूत होता है ताकि उसे बच्चे के जन्म के समय ज्यादा दर्द ना हो.

कैंसर का इलाज (Cure For Cancer ) :
कुछ साल पहले तक कैंसर को लाइलाज बिमारी माना जाता था किन्तु आयुर्वेद में इसका इलाज सबसे पहले गिलोय से ही प्राप्त हुआ था. गिलोय का कैंसर में इस्तेमाल करने के लिए इसकी बेल की 8 इंच लम्बी एक डंडी, 7 पत्ते तुलसी, 5 पत्ते नीम और थोडा Wheat Grass लें. आप इन सबको अच्छी तरह से पीसकर काढ़ा निर्मित करें और इस काढ़े का दिन में दो बार सेवन करें. जल्द ही आपको कैंसर में आराम मिलेगा.

मधुमेह में लाभ ( Sugar / Diabetes ) :
गिलोय मधुमेह के इलाज में आश्चर्यजनक लाभ पहुंचाता है. इसमें पायें जाने वाले तत्व खून से मिठास / शर्करा को खत्म करते है जिससे मधुमेह के संक्रमण का खतरा कम हो जाता है और रोगी निरोग रहता है. गिलोय में शरीर में शुगर और लिपिड के स्तर को कम करने का खास गुण होता है। इसके इस गुण के कारण यह डायबीटिज टाइप 2 के उपचार में बहुत कारगर है। गिलोय जिस तरह डायबिटीज कंट्रोल करने में फायदेमंद होता है लेकिन जिन्हें कम डायबिटीज की शिकायत हो, उन्हें गिलोय के नुकसान से सेहत पर असर भी पड़ सकता है।

गिलोय, खस, पठानी लोध्र, अंजन, लाल चन्दन, नागरमोथा, आवँला, हरड़ लें। इसके साथ ही परवल की पत्ती, नीम की छाल तथा पद्मकाष्ठ लें। इन सभी द्रव्यों को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर, छानकर रख लें। इस चूर्ण को 10 ग्राम की मात्रा में लेकर मधु के साथ मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करें। इससे डायबिटीज में लाभ होता है।

गिलोय के 10-20 मिली रस में 2 चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो-तीन बार पीने से भी डायबिटीज में फायदा होता है।

एक ग्राम गिलोय सत् में 3 ग्राम शहद को मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से डायबिटीज में लाभ मिलता है।

10 मिली गिलोय के रस को पीने से डायबिटीज, वात विकार के कारण होने वाली बुखार तथा टायफायड में लाभ होता है।

हृदय रोग से बचाए ( Hearth Diseases ) :
गिलोय को एकरसायन के रूप में भी माना जाता है, एक ऐसा रासायन जो रक्त को शुद्ध करता है और खून को पतला रखता है ताकि हृदय से सम्बंधित किसी भी रोग की संभावना खत्म हो सके.
आयुर्वेद के हिसाब से गिलोय रसायन यानी ताजगी लाने वाले तत्व के रुप में कार्य करता है। इससे इम्यूनिटी सिस्टम में सुधार आता है और शरीर में अतिआवश्यक सफेद सेल्स की कार्य करने की क्षमता बढ़ती है। यह शरीर के भीतर सफाई करके लीवर और किडनी के कार्य को सुचारु बनाता है। यह शरीर को बैक्टिरिया जनित रोगों से सुरक्षित रखता है। इसका उपयोग सेक्स संबंधी रोगों के इलाज में भी किया जाता है।

मलेरिया से बचाए ( Malaria ) :
मौसम के बदलाव के साथ साथ मलेरिया का खतरा बढ़ जाता है. मलेरिया एक ऐसी बिमारी है जो अकेले नही आती बल्कि अपने साथ अनेक बीमारियों को साथ लाती है. इसमें सबसे अधिक कुनैन के दुष्प्रभाव का ख़तरा बना रहता है किन्तु गिलोय इस खतरे को नही पनपने देती इसीलिए मलेरिया के रोगी को गिलोय का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है.

लंबे समय से चलने वाले बुखार के इलाज में गिलोय काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाता है जिससे यह डेंगू तथा स्वाइन फ्लू के निदान में बहुत कारगर है। इसके दैनिक इस्तेमाल से मलेरिया से बचा जा सकता है। गिलोय के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना चाहिए।

टीबी का इलाज ( Tuberculosis ) :
टीबी रोग माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरक्युल्म जैसे जीवाणुओं के कारण होता है जो खून के रास्ते शरीर को हानि पहुंचाते है. किन्तु गिलोय भी खून के जरिये ही इन सभी कीटाणुओं का नाश करके टीबी होने से बचाता है. ये इन जीवाणुओं को उन्ही की भाषा में जवाब देता है और इनपर आक्रमण कर इन्हें मुत्र के मार्ग से बाहर निकलने पर मजबूर कर देती है.

गिलोय का औषधीय गुण टीबी रोग के समस्याओं से निजात दिलाने में मदद करते हैं लेकिन इनको औषधि के रुप में बनाने के लिए इन सब चीजों के साथ मिलाकर काढ़ा बनाने की ज़रूरत होती है। अश्वगंधा, गिलोय, शतावर, दशमूल, बलामूल, अडूसा, पोहकरमूल तथा अतीस को बराबर भाग में लेकर इसका काढ़ा बनाएं। 20-30 मिली काढ़ा को सुबह और शाम सेवन करने से राजयक्ष्मा मतलब टीबी की बीमारी ठीक होती है। इस दौरान दूध का सेवन करना चाहिए। इसका सही तरह से सेवन ही यक्ष्मा (टीबी रोग) में गिलोय के फायदे (giloy ke fayde) से पूरी तरह से लाभ उठा सकते हैं।

मोटापा दूर करे ( Fat / Obesity ) :
ये रोग दिन प्रतिदिन बढ़ता चला जा रहा है. खुद रोगी भी अपने मोटापे से परेशान रहते है क्योकि इसकी वजह से वे अपना कोई भी कार्य करने में असक्षम होते है. साथ ही मोटापे की वजह से उनमे अन्य रोग भी उत्पन्न होने शुरू हो जाते है. किन्तु मोटापे के रोगियों को गिलोय को सुखाकर उसका चूर्ण निर्मित करना चाहियें और उसे त्रिफला के चूर्ण में मिलाकर शहद के साथ ग्रहण करना चाहियें.

मोटापे से छुटकारा पाने के लिए आप एक उपाय और भी कर सकते हो जिसके अनुसार आप हरद, बहेड़ा, आंवला और गीली को मिलाकर उसे अच्छी तरह गर्म कर लें और इसका काढ़ा तैयार कर लें. अब आप इस काढ़े को शिलाजीत के साथ पकाएं और ठंडा होने के बाद पी जाएँ. इस उपाय का नियमित रूप से सेवन शत प्रतिशत आपको मोटापे से मुक्ति दिलाता है.

पीलिया रोग में गिलोय से फायदा
गिलोय के औषधीय गुण पीलिया से राहत दिलाने में बहुत मदद करते हैं। गिलोय के फायदे ‍का  लाभ उठाने के लिए सही तरह से प्रयोग करना भी ज़रूरी होता है।

गिलोय के 20-30 मिली काढ़ा में 2 चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार पिलाने से पीलिया रोग में लाभ होता है।

गिलोय के 10-20 पत्तों को पीसकर एक गिलास छाछ में मिलाकर तथा छानकर सुबह के समय पीने से पीलिया ठीक होता है।

गिलोय के तने के छोटे-छोटे टुकड़ों की माला बनाकर पहनने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है।

पुनर्नवा, नीम की छाल, पटोल के पत्ते, सोंठ, कटुकी, गिलोय, दारुहल्दी, हरड़ को 20 ग्राम लेकर 320 मिली पानी में पकाकर काढ़ा बनायें। इस काढ़ा को 20 मिली सुबह और शाम पीने से पीलिया, हर प्रकार की सूजन, पेट के रोग, बगल में दर्द, सांस उखड़ना तथा खून की कमी में लाभ होता है।

गिलोय रस एक लीटर, गिलोय का पेस्ट 250 ग्राम, दूध चार लीटर और घी एक किलो लेकर धीमी आँच पर पका लें। जब घी केवल रह जाए तो इसे छानकर रख लें। इस घी की 10 ग्राम मात्रा को चौगुने गाय के दूध में मिलाकर सुबह और शाम पीने से खून की कमी, पीलिया एवं हाथीपाँव रोग में लाभ होता है

गिलोय के सेवन से उल्टी रुकती है (Benefits of Giloy to Stop Vomiting in Hindi)
एसिडिटी के कारण उल्टी हो तो 10 मिली गिलोय रस में 4-6 ग्राम मिश्री मिला लें। इसे सुबह और शाम पीने से उल्टी बंद हो जाती है। गिलोय के 125-250 मिली चटनी में 15 से 30 ग्राम शहद मिला लें।

इसे दिन में तीन बार सेवन करने से उल्टी की परेशानी ठीक हो जाती है। 20-30 मिली गुडूची के काढ़ा में मधु मिलाकर पीने से बुखार के कारण होने वाली उलटी बंद होती है। अगर उल्टी से परेशान है और गिलोय के फायदे (giloy ke fayde) का पूरा लाभ उठाने के लिए उसका सही तरह से सेवन करना

गिलोय के सेवन से कब्ज का इलाज
गिलोय के औषधीय गुणों के कारण उसको  10-20 मिली रस के साथ गुड़ का सेवन करने से कब्ज में फायदा होता है। सोंठ, मोथा, अतीस तथा गिलोय को बराबर भाग में कर जल में खौला कर काढ़ा बनाएं। इस काढ़ा को 20-30 मिली की मात्रा में सुबह और शाम पीने से अपच एवं कब्ज की समस्या से राहत मिलती है। गिलोय के फायदे (giloy ke fayde) का पूरी तरह से लाभ उठाने के लिए  गिलोय का सही तरह से इस्तेमाल करना भी ज़रूरी होता है।

गिलोय के इस्तेमाल से बवासीर का उपचार (Giloy Uses in Piles Treatment in Hindi)
हरड़, गिलोय तथा धनिया को बराबर भाग (20 ग्राम) लेकर आधा लीटर पानी में पका लें। जब एक चौथाई रह जाय तो खौलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़ा में गुड़ डालकर सुबह और शाम पीने से बवासीर की बीमारी ठीक होती है। काढ़ा बनाकर पीने पर ही गिलोय के फायदे ( giloy ke fayde)पूरी तरह से मिल सकते हैं।

आँखों के रोग में फायदेमंद गिलोय (Benefits of Giloy to Cure Eye Disease in Hindi)
गिलोय के औषधीय गुण आँखों के रोगों से राहत दिलाने में बहुत मदद करते हैं। इसके लिए 10 मिली गिलोय के रस में 1-1 ग्राम शहद व सेंधा नमक मिलाकर खूब अच्छी प्रकार से खरल में पीस लें। इसे आँखों में काजल की तरह लगाएं। इससे अँधेरा छाना, चुभन, और काला तथा सफेद मोतियाबिंद रोग ठीक होते हैं।

गिलोय रस में त्रिफला मिलाकर काढ़ा बनायें। 10-20 मिली काढ़ा में एक ग्राम पिप्पली चूर्ण व शहद मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से आँखों की रौशनी बढ़ जाती है। गिलोय का सेवन करते समय एक बात का ध्यान रखना पड़ेगा कि इसका सही मात्रा और सही तरह से सेवन करने पर ही गिलोय के फायदे (giloy ke fayde) का सही तरह से उपकार आँखों को मिल सकता है।

कान की बीमारी में फायदेमंद गिलोय का प्रयोग (Uses of Giloy in Eye Disorder in Hindi)
गिलोय के तने को पानी में घिसकर गुनगुना कर लें। इसे कान में 2-2 बूंद दिन में दो बार डालने से कान का मैल (कान की गंदगी) निकल जाता है। कान के बीमारी से राहत पाने के लिए सही तरह से इस्तेमाल करने पर गिलोय के फायदे (giloy ke fayde) मिल सकते हैं। गिलोय का औषधीय गुण बिना कोई नुकसान पहुँचाये कान से मैल निकालने में मदद करते हैं, इससे कानों को नुकसान भी होता है।

हिचकी को रोकने के लिए करें गिलोय का इस्तेमाल (Giloy Benefits to Stop Hiccup in Hindi)
गिलोय तथा सोंठ के चूर्ण को नसवार की तरह सूँघने से हिचकी बन्द होती है। गिलोय चूर्ण एवं सोंठ के चूर्ण की चटनी बना लें। इसमें दूध मिलाकर पिलाने से भी हिचकी आना बंद हो जाती है। गिलोय के फायदे (giloy ke fayde) का सही मात्रा में उपयोग तभी हो सकता है जब आप उसका सही तरह से प्रयोग करेंगे।

लीवर विकार को ठीक करता है गिलोय (Giloy Helps in Liver Disorder in Hindi)
18 ग्राम ताजी गिलोय, 2 ग्राम अजमोद, 2 नग छोटी पीपल एवं 2 नग नीम को लेकर सेक लें। इन सबको मसलकर रात को 250 मिली जल के साथ मिट्टी के बरतन में रख दें। सुबह पीस, छानकर पिला दें। 15 से 30 दिन तक सेवन करने से लीवन व पेट की समस्याएं तथा अपच की परेशानी ठीक होती है।

मूत्र रोग (रुक-रुक कर पेशाब होना) में गिलोय से लाभ (Giloy Cures Urinary Problems in Hindi)
गुडूची के 10-20 मिली रस में 2 ग्राम पाषाण भेद चूर्ण और 1 चम्मच शहद मिला लें। इसे दिन में तीन-चार बार सेवन करने से रुक-रुक कर पेशाब होने की बीमारी में लाभ होता है।

गठिया में फायदेमंद गिलोय (Benefits of Giloy in Arthritis Treatment in Hindi)
गिलोय  के 5-10 मिली रस अथवा 3-6 ग्राम चूर्ण या 10-20 ग्राम पेस्ट या फिर 20-30 मिली काढ़ा को रोज कुछ समय तक सेवन करने से गिलोय के फायदे (giloy ke fayde) पूरी से मिलते हैं और गठिया में अत्यन्त लाभ होता है। सोंठ के साथ सेवन करने से भी जोड़ों का दर्द मिटता है।

फाइलेरिया (हाथीपाँव) में फायदा लेने के लिए करें गिलोय का प्रयोग (Giloy Uses in Cure Filaria in Hindi)
10-20 मिली गिलोय के रस में 30 मिली सरसों का तेल मिला लें। इसे रोज सुबह और शाम खाली पेट पीने से हाथीपाँव या फाइलेरिया रोग में लाभ होता है।

गिलोय से कुष्ठ (कोढ़ की बीमारी) रोग का इलाज (Giloy Benefits in Leprosy Treatment in Hindi)
10-20 मिली गिलोय के रस को दिन में दो-तीन बार कुछ महीनों तक नियमित पिलाने से कुष्ठ रोग में लाभ होता है।

 

This Post Has One Comment

  1. Khushbu

    nice

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