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गुड़हल (Gudhal) के फूल के ये चमत्कारी फायदे नहीं जानते होंगे आप

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गुड़हल का फूल

गुड़हल (Gudhal) के फूल को आपने देखा होगा। गुुड़हल के फूल को अड़हुल का फूल भी बोलते हैं। अधिकांशतः गुड़हल के फूल का इस्तेमाल पूजा-पाठ आदि कामों के लिए किया जाता है, लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि गुड़हल के फूल का सेवन भी किया जाता है, और रोगों के इलाज में भी गुड़हल के फूल के फायदे (gudhal ke fayde) मिलते हैं।

आयुर्वेद में गुड़हल के फूल (gudhal ke phool) को एक बहुत ही उत्तम औषधि बताया गया है। गंजेपन की समस्या, बालों को बढ़ाने में अड़हुल से फायदे मिलते हैं। इतना ही नहीं कई गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए अड़हुल का उपयोग किया जाता है। आइए जानते हैं।

गुड़हल के फूल के फायदे (gudhal ke fayde) बहुत सारे हैं। गुड़हल के औषधीय प्रयोग, इस्तेमाल की मात्रा एवं विधियां ये हैंः-

बालों को बढ़ाने में गुड़हल के फायदे (Hibiscus Leaves Uses in Hair Fall Problem in Hindi)

  • गुड़हल के पत्तों को पीसकर लुग्दी बना लें। इसे बालों में लगाएं। दो घंटे बाद बालों को धोकर साफ कर लें। इस प्रयोग को नियमित रूप से करने से बालों को पोषण मिलता है, और सिर भी ठंडा रहता है।
  • गुड़हल के ताजे फूलों (gudhal ke phool) के रस में बराबर मात्रा में जैतून का तेल मिलाकर आग में पका लें। जब तेल केवल रह जाए तो शीशी में भरकर रख लें। रोजाना बालों में मल कर जड़ों तक लगाने से बाल चमकीले और लम्बे होते हैं।
  • अड़हुल के फूल और भृंगराज के फूल को भेड़ के दूध में पीसकर लोहे के बर्तन में रखें। सात दिन बाद निकालकर भृंगराज के पंचांग के रस में मिलाएं। इससे बाल धोने से बाल काले हो जाते हैं।
  • लौह भस्म, आंवला चूर्ण तथा जपा के फूल (jaba phool) से बने पेस्ट से सिर में लेप करने से बाल लम्बे समय तक काले रहते हैं।

रूसी (डैंड्रफ) की समस्या में गुड़हल के फायदे (Hibiscus Flower Benefits in Dandruff Treatment in Hindi)

आप रूसी की समस्या से छुटकारा पाने के लिए भी गुड़हल के फायदे ले सकते हैं। गुड़हल के फूल के रस में बराबर मात्रा में तिल का तेल मिला लें। इसे उबालें। तेल बाकी रहने पर उतारकर छान लें। इसे शीशी में भर लें। इस तेल को लगाने से रूसी (डैंड्रफ) खत्म हो जाता है।

गंजेपन की समस्या में गुड़हल के फायदे (Uses of Arhul to Cure Baldness in Hindi)

गाय के मूत्र में गुड़हल के फूलों को पीसकर सिर में लगाने से बाल बढ़ते हैं। इससे गंजापन दूर होता है।

नींद न आने की परेशानी में गुड़हल से लाभ (Hibiscus Flower Benefits in Fighting with Insomnia in Hindi)

गुड़हल के 100 फूल लें। हरे डंठल को तोड़कर पंखुड़ियों को नींबू के रस में भिगो लें। इसे कांच के बर्तन में रात किसी खुले स्थान पर रख दें। सुबह इसे मसलकर छान लें। इसमें 650 ग्राम मिश्री या चीनी, तथा 1 बोतल उत्तम गुलाब जल मिला लें। इसे दो बोतलों में बंद कर धूप में दो दिन तक रखें। इस दौरान बोतल को हिलाते रहें। मिश्री अच्छी तरह घुल जाने पर शरबत बन जाता है। इसे 15 से 40 मिली की मात्रा में पीते रहने से नींद न आने की परेशानी में लाभ होता है।

ल्यूकोरिया के इलाज में गुड़हल से लाभ (Arhul Benefits in Leucorrhoea Treatment in Hindi)

  • दस से बारह जपा फूल (jaba phool) की कलियों को दूध में पीसकर स्त्री को पिलाएं। इसके साथ ही भोजन में दूध का प्रयोग करें। इससे ल्यूकोरिया ठीक होता है।
  • अड़हुल की 4-5 कलियों को घी में तलें। सुबह सात दिन तक मिश्री के साथ खाएं, तथा गाय का दूध पिएं। इससे ल्यूकोरिया में लाभ होता है।
  • अड़हुल (gudhal) पंचांग को रात भर पानी में भिगोकर रख दें। सुबह मसल कर छान लें। इसमें मिश्री मिलाकर पीने से ल्यूकोरिया में लाभ होता है।

याददाश्त बढ़ाने के लिए गुड़हल का उपयोग (Hibiscus Leaves Benefits in Increasing Memory power in Hindi)

गुड़हल के फूलों और पत्तों को बराबर मात्रा में लेकर सुखाएं। इसे पीसकर पाउडर बना लें और शीशी में भर लें। एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम पिएं। इसे आपको एक कप मीठे दूध के साथ पीना है। इससे याददाश्त (स्मरण-शक्ति) बढ़ती है।

एनीमिया (खून की कमी) रोग में गुड़हल से लाभ (Hibiscus Powder Uses to Treat Anemia in Hindi)

  • एक चम्मच गुड़हल के फूल के चूर्ण (gudhal powder) को एक कप दूध के साथ सुबह शाम नियमित रूप से सेवन करें। इससे कुछ ही माह में खून की कमी दूर होती है। शरीर में शक्ति मिलती है।
  • गुड़हल (gudhal) की जड़ और फूलों का काढ़ा बना लें। इसे 20-40 मिली की मात्रा में सुबह पीने से गर्भ में पल रहे शिशु का शरीर स्वस्थ रहता है।

गर्भधारण रोकने के लिए गुड़हल का गुण लाभदायक (Arhul is Beneficial in Contraceptive in Hindi)

अड़हुल के फूलों के कांजी में पीस लें। इसमें 50 ग्राम तक पुराना गुड़ मिला लें। मासिक धर्म के समय तीन दिन तक खाने से स्त्री गर्भधारण नहीं करती। इसका सेवन चिकित्सक के परामर्श अनुसार ही करें।

मासिक धर्म विकार में गुड़हल से लाभ (Hibiscus Flower Uses to Treat Menstrual Disorder in Hindi)

  • गुड़हल के 100 फूल की पंखुड़ियां लें। इसे नींबू के रस में भिगोकर कांच के बरतन में रात भर के लिए किसी खुले स्थान पर रख दें। सुबह मसलकर छान लें। इसमें 650 ग्राम मिश्री या चीनी तथा 1 बोतल उत्तम गुलाब जल मिलाएं। इसे दो बोतलों में बंद कर धूप में दो दिन तक रखें। इस दौरान बोतल को हिलाते रहें। मिश्री अच्छी तरह घुल जाने पर शरबत बन जाता है। इसके सेवन से अत्यधिक मासिकस्राव में फायदा होता है।
  • गुड़हल (gudhal) के फूलों को घी में तलें। इसे बूरा के साथ मिलाकर खिलाने से भी मासिक धर्म विकारों में लाभ होता है।

सेक्सुअल स्टेमिना बढ़ाने में गुड़हल का फूल फायदेमंद (Benefits of Hibiscus Leaves in Increasing Sexual Stamina in Hindi)

गुड़हल के फूल को छाया में सुखा लें। इसके पत्तों के चूर्ण में बराबर मात्रा में खांड़ मिला लें। इसे 40 दिन तक 6 ग्राम की मात्रा में सेवन करेंं। इससे पुरुषत्व (सेक्सुअल स्टेमना) बढ़ता है।

गुड़हल के औषधीय गुण से मुंह के छाले की बीमारी का इलाज (Arhul Benefits to Treat Mouth Ulcers in Hindi)

गुड़हल की जड़ को साफ करके धो लें। इसे एक-एक इंच के टुकड़ों में काटकर रख लें। दिन में 3-4 बार, एक-एक टुकड़ा चबाकर थूकते जाएं। एक दो दिन में ही मुंह के छाले ठीक हो जाएंगे।

गुड़हल के औषधीय गुण से पेट दर्द से आराम (Hibiscus Plant Benefits in Relief from Abdominal Pain in Hindi)

पेट के दर्द को ठीक करने के लिए 5-10 मिली गुड़हल के पत्तों के रस का सेवन करें। इससे पेट के दर्द से आराम मिलता है।

सिर दर्द से आराम पाने के लिए गुड़हल का सेवन (Gudhal Flower Benefits in Relief from Headache in Hindi)

  • गुड़हल के 100 फूल की पंखुड़ियां लें। इसे नींबू के रस में भिगोकर कांच के बरतन में रात भर के लिए किसी खुले स्थान पर रख दें। सुबह मसलकर छान लें। इसमें 650 ग्राम मिश्री या चीनी तथा 1 बोतल उत्तम गुलाब जल मिलाएं। इसे दो बोतलों में बंद कर धूप में दो दिन तक रखें। इस दौरान बोतल को हिलाते रहें। मिश्री अच्छी तरह घुल जाने पर शरबत बन जाता है। इसे 15 से 40 मिली तक की मात्रा में पीते रहने से सिर दर्द से राहत मिलती है।
  • गुड़हल (gurhal) के पत्तों तथा फूलों को पानी में पीसकर सूजन और दर्द वाले स्थान पर लगाएं। इससे सूजन और दर्द से आराम मिलता है।

बुखार में गुड़हल के सेवन से लाभ (Hibiscus Plant Benefits in Fighting with Fever in Hindi)

  • बुखार को ठीक करने के लिए 10-20 मिली गुड़हल की जड़ और पत्ते का काढ़ा सेवन करें। इससे बुखार ठीक होता है।
  • इसी तरह 5-10 ग्राम गुड़हल के फूल के पेस्ट में चीनी मिलाकर सेवन करने से बुखार उतर जाता है।

खांसी और जुकाम में गुड़हल के सेवन से फायदा (Arhul Flower Benefits in Cough and Cold Problem in Hindi)

  • खांसी और जुकाम के इलाज के लिए 15 मिली गुड़हल की जड़ का रस निकाल लें। इसे दिन में 4 बार सेवन करें। इससे खांसी तथा जुकाम में लाभ मिलता है।
  • गुड़हल (gurhal) की जड़ का काढ़ा बनाएं। इसे 10-30 मिली की मात्रा में शहद मिलाकर पीने से खांसी में लाभ होता है।
  • गुड़हल के फूल के काढ़ा का सेवन करने से कफ निकलता है। इससे कफज-विकार ठीक होता है।

सांसों की नली की सूजन में गुड़हल (Gudhal) के फूल का सेवन लाभदायक (Benefits of Gudhal Flower in Bronchitis in Hindi)

सांसों की नली में सूजन होने पर गुड़हल के फूल का काढ़ा बनाएं। इसे 15-30 मिली की मात्रा में सेवन करने से सांस की नली की सूजन ठीक हो जाती है।

आंखों की जलन में गुड़हल (Gudhal) के फूल का औषधीय गुण लाभदायक (Benefits of Hibiscus Flower in Eye irritation in Hindi)

गुड़हल के 100 फूल की पंखुड़ियां लें। इसे नींबू के रस में भिगोकर कांच के बरतन में रात भर के लिए किसी खुले स्थान पर रख दें। सुबह मसलकर छान लें। इसमें 650 ग्राम मिश्री या चीनी तथा 1 बोतल उत्तम गुलाब जल मिलाएं। इसे दो बोतलों में बंद कर धूप में दो दिन तक रखें। इस दौरान बोतल को हिलाते रहें। मिश्री अच्छी तरह घुल जाने पर शरबत बन जाता है। इसे 15 से 40 मिली तक की मात्रा में पीने से आंखों की जलन में लाभ होता है।

दस्त रोकने के लिए गुड़हल का उपयोग (Benefits of Hibiscus Plant to Stop Diarrhea in Hindi)

दस्त को रोकने के लिए 5-10 मिली गुड़हल के पत्ते के रस का सेवन करें। इससे दस्त पर रोक लगती है।

नाक से खून बहने पर अड़हुल से लाभ (Benefits of Hibiscus Flower to Stop Nasal Bleeding in Hindi)

गुड़हल के 100 फूल की पंखुड़ियां लें। इसे नींबू के रस में भिगोकर कांच के बरतन में रात भर के लिए किसी खुले स्थान पर रख दें। सुबह मसलकर छान लें। इसमें 650 ग्राम मिश्री या चीनी तथा 1 बोतल उत्तम गुलाब जल मिलाएं। इसे दो बोतलों में बंद कर धूप में दो दिन तक रखें। इस दौरान बोतल को हिलाते रहें। मिश्री अच्छी तरह घुल जाने पर शरबत बन जाता है। इसे 15 से 40 मिली तक की मात्रा में पीने से नाक से खून बहना रुक जाता है।

बवासीर का इलाज करने के लिए अड़हुल का उपयोग (Benefits of Gudhal in Piles Treatment in Hindi)

गुड़हल की कलियों को घी में तलें। इसमें मिश्री और नागकेशर मिलाएं। इसका सुबह-शाम सेवन करने से पेचिश और बवासीर में लाभ होता है।

सुजाक रोग में गुड़हल का औषधीय गुण फायदेमंद (Gudhal Flower Uses in Gonorrhea Treatment in Hindi)

  • गुड़हल (gurhal) की 11 पत्तियों को साफ जल में पीसकर छान लें। इसमें यवक्षार 8 ग्राम व मिश्री 25 ग्राम मिलाएं। इसकी थोड़ी-थोड़ी मात्रा को सुबह-शाम दो बार पीने से सुजाक में लाभ होता है। पहले दिन 1 फूल, दूसरे दिन दो फूल खाएं। ऐसा दस दिनों तक करें। फूल को बतासे या मिश्री के साथ खाएं। इसी तरह 1-1 फूल घटाते हुए दसवें दिन 1 फूल खाएं। इस दौरान स्वस्थ भोजन करें। नुकसान पहुंचाने वाली चीजों से परहेज करें। इससे सुजाक में लाभ होता है।

सफेद दाग में अड़हुल के औषधीय गुण से लाभ (Benefits of Gudhal Flower in Leucoderma Treatment in Hindi)

  • सफेद दाग के इलाज के लिए अड़हुल के चार फूलों को सुबह शाम 2 वर्ष तक सेवन करें। इससे सफेद दाग में लाभ होता है।
  • जपा फूल (jaba phool) की जड़ के चूर्ण में बराबर-बराबर मात्रा में कमल के फूल की जड़ का चूर्ण मिलाएं। इसमें सफेद सेमल की छाल का चूर्ण मिलाएं। इसे 2-3 ग्राम की मात्रा में जल के साथ सेवन करें। इससे सफेद दाग का इलाज होता है।

ह्रदय संबंधित रोगों में अड़हुल के सेवन से लाभ (Gudhal Flower is Beneficial for Healthy Heart in Hindi)

ह्रदय रोगों को ठीक करने के लिए गुड़हल (arhul flower) के 100 फूल लें। इसे शीशे की बरनी में डाल लें। इसमें 20 नींबू निचोड़ कर रात भर रखें। सुबह मसलकर कपड़े से छानकर रस निकाल लें। रस में 800 ग्राम मिश्री, 200 ग्राम गुले गाजबान का अर्क, 200 मिली मीठे अनार का रस, तथा 200 मिली संतरे का रस मिलाकर धीमी आग पर पकाएं। जब चासनी गाढ़ा हो जाए तो उतार लें। इसमें 250 मिग्रा कस्तूरी, अम्बर 3 ग्राम, केसर, तथा गुलाब अर्क को अच्छी तरह मिलाएं। यह शरबत हृदय तथा मस्तिष्क को शांति देता है।

पाचनतंत्र विकार में अड़हुल के सेवन से फायदा (Benefit of Arhul Flower in Indigestion in Hindi)

गुड़हल के 100 फूल की पंखुड़ियां लें। इसे नींबू के रस में भिगोकर कांच के बरतन में रात भर के लिए किसी खुले स्थान पर रख दें। सुबह मसलकर छान लें। इसमें 650 ग्राम मिश्री या चीनी तथा 1 बोतल उत्तम गुलाब जल मिलाएं। इसे दो बोतलों में बंद कर धूप में दो दिन तक रखें। इस दौरान बोतल को हिलाते रहें। मिश्री अच्छी तरह घुल जाने पर शरबत बन जाता है। इसे 15 से 40 मिली तक की मात्रा में पीने से नाक से खून बहना रुक जाता है।

गुड़हल के उपयोगी भाग (Useful Parts of Gudhal)

गुड़हल (arhul flower) के इन भागों का उपयोग किया जा सकता हैः-

  • फूल
  • फूल की कलियां
  • पत्ते
  • जड़

गुड़हल का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Gudhal?)

गुड़हल का इस्तेमाल इतनी मात्रा में करना चाहिएः-

गुड़हल का रस- 5-10 मिली
गुड़हल का पेस्ट- 5-10 ग्राम
गुड़हल का काढ़ा- 10-20 मिली

अधिक लाभ के लिए किसी आयुर्वेद चिकित्सक के परामर्शानुसार उपयोग करें।

गुड़हल के साइड इफेक्ट (Gudhal Side Effects)

गुड़हल का अधिक इस्तेमाल करने पर ये नुकसान हो सकता है-

अधिक मात्रा में सेवन करने से इससे आंखों में कीड़े होने की संभावना रहती है।
ठंडे शरीर (शीत प्रकृति) वाले लोगों वालों के लिए नुकसानदेह होता है।
हानि होने पर काली मिर्च व मिश्री का सेवन करना चाहिए।

गुड़हल कहां पाया या उगाया जाता है? (Where is Gudhal Found or Grown?)

गुड़हल (arhul flower) पूरे भारत में पाया जाने वाला एक फूल है। प्रायः यह घरों के आस-पास या बाग-बगीचे में पाया जाता है।

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