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वजन घटाने, मधुमेह और कैंसर जैसे रोगों में रामबाण

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कंटोला या ककोरा एक स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य गुणों से भरपूर सब्जी है ! भारत के अधिकांश हिस्सों में उपलब्ध इस सब्जी को केकरोल, काकरोल और अन्य कई नामों से जाना जाता है ! इसमें कम कैलोरी होती है, जिस वजह से ये वजन घटाने वालों के लिए बेहतर है ! फाइबर से भरपूर कंटोला पाचन को सही रखती है ! इसके अन्य स्वास्थ्य लाभ क्या-क्या हैं, आइए जानते हैं-

कैंसर की रोकथाम में सहायक :

इसमें मौजूद ल्यूटेन जैसे केरोटोनोइड्स विभिन्न नेत्र रोग, हृदय रोग और यहां तक कि कैंसर की रोकथाम में सहायक है !

सर्दी-खांसी से राहत दिलाए :

इसके एंटी-एलर्जन और एनाल्जेसिक गुण सर्दी-खांसी से राहत प्रदान करने और इसे रोकने में भी सहायक हैं !

स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में सहायक :

कंटोला में मौजूद फाइटोकेमिकल्स स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करते हैं ! एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर इस सब्जी से शरीर को साफ़ रखने में मदद मिलती है !

वजन घटाने वालों के लिए अच्छी :

प्रोटीन और आयरन से भरपूर कंटोला में क म मात्रा में कैलोरी होती है ! 100 ग्राम कंटोला में केवल 17 कैलोरी होती है, जिस वजह से ये वजन घटाने वाले लोगों के लिए बेहतर विकल्प है !

डायबिटीज के रोगियों के लिए अच्छी :

कंटोला ब्लड शुगर कम करने और डायबिटीज को नियंत्रित करने में सहायक है !
पाचन सही रखने में मददगार :

इस सब्जी में भरपूर मात्रा में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जिस वजह से ये आसानी से हजम हो जाती है ! ये मानसून में कब्ज़ और इन्फेक्शन को नियंत्रित कर आपके पेट को सही रखती है !

इस सब्जी को बनाने की विधि

ककोरा (Kakora) को कन्टोला (Kantola) भी कहते हैं ! आजकल तो हर मौसम में ककोरा (phagila) और इनकी सब्जी बहुत स्वादिष्ट बनती है ! छोटी साइज के ककोरे और बड़े आकार की किस्म के ! दोनों तरह के ककोरे एक ही तरीके से बनाये जाते है, लेकिन छोटी आकार के ककोरे अधिक स्वादिष्ट होते हैं ! तो आइये जानते है छोटे ककोरे की सब्जी बनाना –

आवश्यक सामग्री – Ingredients for Kakora Recipe
ककोरे – 250 ग्राम
तेल – 1- 2 टेबिल स्पून
हींग – 1 पिंच
जीरा – एक चौथाई छोटी चम्मच
हल्दी पाउडर – एक चौथाई छोटी चम्मच से कम
हरी मिर्च – 2 (छोटी छोटी काट लीजिये)
अदरक – 1 इंच लम्बा टुकड़ा (कद्दूकस कर लीजिये)
धनियां पाउडर- 1 छोटी चम्मच
सोंफ पाउडर – 1/2 छोटी चम्मच
नमक – आधा छोटी चम्मच (स्वादानुसार)
लाल मिर्च पाउडर – 1/6 छोटी चम्मच
अमचूर पाउडर – 1/4 छोटी चम्मच

विधि – How to make Kakora

ककोरों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर, चार टुकड़े करते हुये काट लीजिये ! कढाई में तेल डाल कर गरम कीजिये, गरम तेल में हींग और जीरा डालकर भूनिये, जीरा भुनने के बाद हल्दी पाउडर, हरी मिर्च, अदरक, धनियां पाउडर और सोंफ पाउडर डालिये, मसाले को हल्का सा भूनिये और अब कटे हुये ककोरे, नमक, और लालमिर्च पाउडर डाल कर, तेज गैस पर ककोरों को 2 मिनिट तक भूनिये, एक टेबल स्पून पानी डालिये और ढककर 5 मिनिट धीमी आग पर पकने दीजिये !

ढक्कन खोलिये, ककोरे को चैक कीजिये, ककोरे अभी नरम नहीं हुये हैं, 3 – 4 मिनिट और धीमी आग पर ढक कर ककोरे को पकने दीजिये ! सब्जी को खोलिये ककोरे नरम हो गये हैं, खुले ककोरे तेज गैस पर 2 मिनिट तक पका लीजिये, बीच में चमचे से चलाते रहिये ! सब्जी में अमचूर पाउडर और हरा धनियां डाल कर मिला दीजिये ! ककोरे की कुरकुरी सब्जी तैयार है ! सब्जी को कटोरे में निकालिये, और गरमा गरम परांठे या चपाती के साथ खाइये !

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ककोरे के बारे में कुछ रोचक तथ्य 

बारिश के सीजन में आने वाले ककोरा को हर खास और आम हरी सब्जी के रूप में जानते हैं ! यह बाजार में अपने समय में सबसे महंगे दामों में बिकता है ! फिर भी लोग बढ़े चाव के साथ उसे खाते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि शासन की सूची में न तो यह सब्जी के रूप में दर्ज है और न ही कोई किसान इसकी पैदावार करता है !

आमतौर पर ककोरा जंगलों के साथ खेत की मेढ़ों पर पहली बारिश होने के साथ ही पैदा होने लगता है ! यह यहां और किसके खेत में पैदा होगा, यह नहीं कहा जा सकता ! यह पूरी तरह से जंगली फल है ! जंगलों में भी जहां झाड़ियां अधिक होती हैं, वहां यह आसानी के साथ पैदा हो जाता है ! इसकी एक विशेषता और है, जितनी अच्छी बारिश होगी, ककोरा की पैदावार भी उतनी ही अच्छी होगी ! ककोरा की बेल से फल तोड़ लेने के बाद फिर से आने लगते हैं !

ककोरा के बीज नहीं मिलते न ही कोई किसान इसकी पैदावार करता हैं ! आज तक इसके बीज कलेक्ट करने का भी प्रयास नहीं किया गया ! यह जंगली फल है ! ककोरा की बेल होती है ! यह खेतों की मेड़ के साथ कटीली झाड़ियों पर तेजी के साथ फैलती हैं ! बेल की विशेषता यह है कि यह तीन माह में कई बार फल देती है !

ककोरा के फायदे

काकोरा (kantola vegetable) देखने में जितनी करेला जैसा लगता है लेकिन स्वाद में बिल्कुल अलग होता है। इस छोटे से सब्जी के औषधिपरक गुण अनगिनत होते हैं। आयुर्वेद में कंटोला बहुत सारे बीमारियों के लिए उपयोग में लाया जाता है लेकिन वह कैसे और किन-किन बीमारियों के लिए फायदेमंद है चलिये इसके बारे में सही जानकारी लेते हैं।

आजकल सिरदर्द ,हर दो दिन में किसी न किसी कारण से परेशानी का सबब बन जाता है। सिरदर्द के कारण कोई भी काम ध्यान देकर करना मुश्किल हो जाता है। ककोरा (kankoda ki sabji) का सेवन सिरदर्द से आराम दिलाने में बहुत मदद करता है।

–1-2 बूंद कर्कोटकी के पत्ते का जूस नाक से लेने से सिर में होने वाले दर्द से मुक्ति मिलती है।

-ककोड़ा के जड़ को गाय के घी में पकाकर, घी को छानकर, 1-2 बूंद नाक में टपकाने से आधासीसी यानि अधकपारी के दर्द में लाभ होता है।

-कर्कोटकी के जड़ को काली मिर्च तथा लाल चन्दन के साथ पीसकर उसमें नारियल तेल मिलाकर मस्तक पर लगाने से सिरदर्द से आराम मिलता है।

बालों का झड़ना कम करने में सहायक कंटोला (Benefits of Kakrol in Hair loss in Hindi)

आजकल बालों का झड़ना आम समस्या बन गई है। स्त्री हो या पुरूष सभी बाल संबंधी समस्याओं जैसे- असमय बालों का सफेद होना, रूसी होना, रूखे बाल, बालों का झड़ना, गंजापन से परेशान रहते हैं। बालों का झड़ना कम करने के लिए कर्कोटकी जड़ को घिसकर बालों की जड़ों में लगाने से बाल मजबूत होते हैं तथा बालों का गिरना बंद हो जाता है।

कान दर्द में ककोरा के फायदे (Kantola Benefits to Get Relief from Ear Pain in Hindi)

अगर किसी बीमारी के साइड इफेक्ट के वजह से कान में दर्द असहनीय हो गया है तो कर्कोटकी जड़ को पीसकर घी में पकाकर, छानकर, 1-2 बूंद कान में डालने से कान के दर्द से आराम मिलता है।

खांसी होने पर सांस संबंधी समस्याओं से दिलाये राहत काकरोल (Kakrola Benefits in Cough in Hindi)

अगर खांसी है कि ठीक होने का नाम नहीं ले रहा और खांसने के कारण सांस लेने में समस्या हो रही है तो कंटोला (kankoda in hindi) का इस्तेमाल ऐसे करना फायदेमंद साबित हो सकता है।

-2 ग्राम बांझ ककोड़ा कन्द चूर्ण में 4 नग काली मरिच चूर्ण मिलाकर जल के साथ पीसकर पिलाएं तथा एक घंटे पश्चात् 1 गिलास दूध पिलाने से कफ का निसरण होकर श्वास-कास में लाभ होता है।

-1 ग्राम बांझ ककोड़ा कन्द (bulb) चूर्ण को गुनगुने जल के साथ खिलाने से खांसी से छुटकारा मिलता है।

-कर्कोटकी जड़ की भस्म बनाकर 125 मिग्रा भस्म में 1 चम्मच शहद तथा 1 चम्मच अदरक का जूस मिलाकर खाने से खांसी होने पर सांस संबंधी समस्या में लाभ होता है।

पेट के इंफेक्शन में काकरोल का सेवन (Kantola Benefits in Stomach Infection in Hindi)

अगर खान-पान के गड़बड़ी के कारण पेट में इंफेक्शन हो गया है तो कर्कोटकी (kakora ki sabji in hindi) का सेवन इस तरह से करने पर जल्दी राहत मिलती है। 1-2 ग्राम कर्कोटकी जड़ चूर्ण का सेवन करने से अरुचि तथा आँत्रगत संक्रमण (पेट के इंफेक्शन) से जल्दी राहत मिलती है।

बवासीर से दिलाये राहत कंटोला (Kakrol Benefits to Treat Piles in Hindi)

अगर ज्यादा मसालेदार, तीखा खाने के आदि है तो पाइल्स के बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। उसमें  काकरोल (kantola sabji) का घरेलू उपाय बहुत ही फायदेमंद साबित होता है। ककोड़ा जड़ को भूनकर, पीसकर, 500 मिग्रा की मात्रा में खिलाने से रक्तार्श (खूनी बवासीर) से राहत मिलती है।

पीलिया में काकरोल के फायदे (Spine Gourd Vegetable Benefits in Jaundice in Hindi)

अगर आपको पीलिया हुआ है और आप इसके लक्षणों से परेशान हैं तो कंटोला (kantola sabji) का सेवन इस तरह से कर सकते हैं।

-कर्कोटकी के जड़ के रस को 1-2 बूंद नाक में डालने से कामला (पीलिया) में लाभ होता है।

-बांझ ककोड़ा जड़ के चूर्ण का नाक से लेने से तथा गिलोय पत्ते को तक्र के साथ पीसकर पिलाने से कामला में लाभ होता है (दवा लेने के समय आहार पर विशेष रूप से ध्यान रखें)।

बढ़े हुए प्लीहा (spleen) में कंटोला के फायदे (Kantola Benefits in Enlarged Spleen in Hindi)

अगर किसी बीमारी के कारण प्लीहा का आकार बढ़ गया है तो काकरोल (kakora ki sabji) का औषधीय गुण फायदेमंद साबित हो सकता है। 1-2 ग्राम बांझ ककोड़ा के जड़ के चूर्ण में 5 काली मरिच का चूर्ण मिलाकर शहद के साथ खाने से प्लीहा के बढ़ जाने पर उसका आकार कम होने में मदद मिलती है।

मूत्राश्मरी में कर्कोटकी के फायदे (Spine Gourd Vegetable Benefits in Urinary calculi in Hindi)

पुरूषों को मूत्राशय में पथरी की समस्या सबसे ज्यादा होती है। पथरी को निकालने में कंटोला (spine gourd in hindi) का औषधीय गुण बहुत काम आता है। 500 मिग्रा कर्केटकी जड़ के सूक्ष्म चूर्ण को दस दिन तक दूध के साथ सेवन करने से अश्मरी या पथरी टूटकर निकल जाती है।

डायबिटीज को कंट्रोल करने में सहायक कंटोला (Kantola Vegetable Benefits to Control Diabetes in Hindi)

आज के असंतुलित जीवनशैली की देन है डायबिटीज जैसे रोग। इनको सही समय पर कंट्रोल नहीं करने पर यह कई बीमारियों का कारण बन सकता है। 1-2 ग्राम  कर्कोटकी जड़ के चूर्ण का सेवन करने से मधुमेह या डायबिटीज में लाभ होता है।

दाद की परेशानी से दिलाये निजात काकरोल के फायदे (Kakrol Benefits to Get Relief from Ringworm in Hindi)

आजकल चर्मरोग होने की आशंका बढ़ती जा रही है, उनमें से दाद एक है। दाद की खुजली की समस्या से छुटकारा पाने में सहायता करता है। कर्कोटकी के पत्ते के जूस में चार गुना तेल मिलाकर पका लें, ठंडा होने पर छानकर रख लें। इस तेल को लगाने से दाद, खुजली आदि त्वचा विकारों में लाभ (kantola vegetable benefits) होता है।

खुजली में ककोरा के फायदे (Kakrol Beneficial in Scabies in Hindi)

आजकल के प्रदूषण भरे वातावरण में त्वचा संबंधी रोग होने का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। हर कोई किसी न किसी त्वचा संबंधी परेशानी से ग्रस्त हैं। काकरोल (kakora ki sabji) का इस्तेमाल खुजली ठीक करने के काम आता है। सुबह या ठंड के समय अधिक बढ़ने वाली खुजली में कर्कोटकी के कन्द को पीसकर उसमें तेल मिलाकर उबटन की तरह लगाने से खुजली मिटती है।

अपस्मार या लकवे में फायदेमंद कंटोला (Spine Gourd Benefits in Paralysis in Hindi)

कंटोला का औषधीय गुण लकवे के कष्ट से आराम दिलाने में मदद करता है। बांझ ककोड़ा की जड़ को घी के साथ घिसकर उसमें थोड़ी-सी चीनी मिलाकर अच्छी तरह पीसकर 1-2 बूंद नाक में देने से तथा 1-2 ग्राम जड़ के चूर्ण का सेवन करने से अपस्मार के कष्ट में लाभ (kantola vegetable benefits)मिलता है।

बुखार में ककोरा के फायदे (Benefits of Spine Gourd to Treat Fever in Hindi)

अगर मौसम के बदलने के वजह से या किसी संक्रमण के कारण बुखार हुआ है तो उसके लक्षणों से राहत दिलाने में काकरोल (kakora vegetable) बहुत मदद करता है।

-कर्कोटक का शाक बनाकर सेवन करने से ज्वर में लाभ होता है।

-कर्कोटक के जड़ को पीसकर पूरे शरीर पर लेप करने से बुखार से राहत मिलती है।

सूजन में फायदेमंद कर्कोटकी (Benefits of Kheksa in Fever in Hindi)

अगर किसी बीमारी के साइड इफेक्ट के कारण शरीर के किसी अंग में सूजन आया है तो वहां कंटोला (kantola vegetable in hindi) का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है। ककोड़ा (kakrol in hindi)कन्द चूर्ण को गर्म जल में पीसकर सूजन वाले स्थान पर लगाने से सूजन का कष्ट कम होता है।

सन्निपात या बेहोशी में कंटोला के फायदे (Benefits of Kakrol in Delirium in Hindi)

काकरोल (kantola vegetable in hindi) का औषधीय गुण बेहोशी से होश लाने में मदद करता है।  बांझ ककोड़ा के कंद चूर्ण में कुलथी, पीपल, वच, कायफल तथा काला जीरा पीसकर, मिलाकर शरीर पर मालिश करने से लाभ होता है।

सांप के काटने पर कंटोला का प्रयोग (Use of Kakrol in Snake Bite in Hindi)

कर्किटकी के जड़ को पीसकर सर्प के काटे हुए स्थान पर लेप करने से दर्द और जलन आदि से आराम मिलता है।

कर्कोटकी के उपयोगी भाग (Useful Parts of Kankoda) 

आयुर्वेद में कंटोला के जड़, पके फल का औषधि के रुप में ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

ककोरा का इस्तेमाल कैसे किया जाता है? (How to Use Kankoda in Hindi?)

बीमारी के लिए कंटोला के फूल के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए ककोरा का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

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