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कलौंजी का तेल है अमृत के समान क्योंकि इसमें समाएं है यह 85 गुण

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कलौंजी | Nigella | Kalaunji कलौंजी का तेल  हृदय रोग, ब्लड प्रेशर, डाइबिटीज, अस्थमा, खांसी, नजला, जोड़ों के दर्द, बदन दर्द, कैंसर, किडनी, गुर्दे की पत्थरी, मूत्राशय के रोग, मर्दाना कमजोरी, बालों के रोगों, मोटापे, याददाश्त बढाने, मुंहासे, सुंदर चेहरा, अजीर्ण, उल्टी, तेज़ाब, बवासीर, लयुकोरिया आदि गंभीर बीमारियों से एक साथ निजात दिलाने में सक्षम है।

यह अनमोल चमत्कारिक दवा ब्लैैक सीड ऑइल, जिसे कलौंजी का तेल भी कहा जाता है यह आसानी से उपलब्ध होने वाली बेहद प्रभावी और उपयोगी साबित हो सकती है। कलौंजी के तेल में मौजूद दो बेहद प्रभावकारी तत्व थाइमोक्विनोन और थाइमोहाइड्रोक्विनोन में विशेष हीलींग प्रभाव होते हैं। ये दोनों तत्व मिलकर इन सभी बीमारियों से लड़ने और शरीर को हील करने में मदद करते हैं।

इतना ही नहीं, कार्डियोवेस्कुलर डिसीज एवं अस्थमा, ब्लड कैंसर, फेफड़ों की समस्या, लिवर, प्रोस्टेट, ब्रेस्ट कैंसर, सर्विक्स और त्वचा रोगों में भी कारगर है। यह कोई नई दवा नहीं है, बल्कि इन गंभीर बीमारियों के लिए इसकी खोज हजारों वर्षों पूर्व हो चुकी थी। जिसके बाद इस दवा पर विज्ञान के अब तक कई शोध हो चुके हैं, जो विभिन्न बीमारियों के लिए ब्लैैक सीड ऑइल को बेहतरीन घरेलू दवा साबित करते हैं।

2012 में इजिप्ट में हुए एक शोध के अनुसार शहद और कलौंजी ब्लैैक सीड ऑइल ट्यूमर रोधी तत्व मौजूद हैं, जो कैंसर कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि को रोकने में सक्षम है। वहीं 2013 में मलेशिया में हुए रिसर्च के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर के लिए थाइमोक्विनोन का प्रयोग एक दीर्घकालिक इलाज के रूप में किया गया। इसमें मौजूद थाइमोक्विनोन एक बायोएक्टिव कंपाउंड है जो एंटीऑक्सीडेंट, एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी कैंसर कारक है। इसमें वे चुनिंदा साइटोटॉक्सिक प्रॉपर्टी मौजूद है जो कैंसर कोशिकाओं के लिए घातक है, जबकि सामान्य कोशिकाओं को कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डालती।

आयुर्वेद में कलौंजी के बारे में कहा गया है कि “कलयुग में धरती पर संजीवनी है कलौंजी” यह अनगिनत रोगों को चुटकियों में ठीक करती है। इसका विवरण आयुर्वेद ग्रंथों के अलावा मुस्लिमो के पवित्र ग्रंथ हदीस में भी इसका उल्लेख है कि “मौत को छोड़कर हर मर्ज की दवा है कलौंजी”  यही नही इसका उल्लेख सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथो में है। कलौंजी वनस्पति पौधा है जिसके बीज भी होते है और औषधियों के रूप में बीजों का ही प्रयोग किया जाता है। अत: कलौंजी के बीजों को बहुत बारीक पीसकर सिरका, शहद या पानी में मिलाकर उपयोग किया जाता है। कलौंजी के बीजों का तेल भी बनाया जाता है जो रोगों के लिए बहुत प्रभावशाली होता है। इसका तेल न मिलने पर कलौंजी से काम चलाया जा सकता है।

कलौंजी के तेल में एक अलग प्रकार की चर्बी के टुकड़ा होता है। लिर्नोलेटिक टुकड़ा 60 प्रतिशत और पाश्मेहिक टुकड़ा लगभग 11 प्रतिशत इसमें प्राप्त हैं। इसलिए इसमें स्वतंत्र अम्ल 40 अथवा उससे भी ज्यादा हो सकते है। यह कार्बनिक तेल को आसानी से पानी के रूप में बदल देता है। अधिकतर कलौंजी के बीजों को ही औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। इसके बीजों में एक सेपोनिन नामक पदार्थ होता है। इसके बीजों में निजेलीन नामक कडुवा पदार्थ भी होता है। कलौंजी मूत्र लाने वाला, वीर्यपात को ठीक करने वाला और मासिक-धर्म के कष्टों को दूर करने वाला होता है।

कलौंजी का तेल कफ को नष्ट करने वाला और रक्तवाहिनी नाड़ियों को साफ करने वाला होता है। इसके अलावा यह खून में मौजूद दूषित व अनावश्यक द्रव्य को भी दूर होता है। कलौंजी का तेल सुबह खाली पेट और रात को सोते समय लेने से बहुत से रोग समाप्त होते हैं। गर्भावस्था के समय स्त्री को कलौंजी के तेल का उपयोग नहीं कराना चाहिए इससे गर्भपात होने की सम्भावना रहती है। तो अब आपको इन बीमारियों के लिए महंगी दवाओं पर खर्च करने की जरुरत नहीं होगी, इस एक घरेलुु द्वारा आप कई बीमारियों को हल कर सकते हैं।

कलौंजी का तेल कहाँ मिलेगा :

कलौंजी का तेल किसी भी मेडिकल स्टोर या पंसारी के पास से आसानी से उपलब्ध हो जायेगा. इसका 100 मि.ली. का  मूल्य 100 से 200 रुपये तक ही होता है। एक व्यक्ति के लिए एक शीशी 6 महीने तक चल जाएगी।

कलौंजी का तेल सेवन की विधि :

किसी भी बीमारी में आप कलौंजी के तेल को आप सुबह गर्म पानी में 2 बूँद डालकर रोजाना पी सकते हैं. इस से आपको उपरोक्त बिमारियों के होने की आशंका बहुत कम हो जाएगी. अगर गंभीर बिमारियों ने जकड रखा है तो जब भी पानी पियें तो उसमे 2 बूँद कलौंजी का तेल डालकर पीजिये. इसमें शहद भी मिलाया जा सकता है। कलौंजी का तेल रात्रि को सोने से पहले दूध में भी 2 बूँद डाल कर रोजाना पिया जा सकता है। जितने गुण कलौंजी में निहित है उतने ही गुण कलौंजी के तेल में भी हैं. कलौंजी के लिए एक कहावत भी मशहूर है के मौत को छोड़कर हर मर्ज की दवा है कलौंजी।

Note : ध्यान रखें कि इस दवा का प्रयोग गर्भावस्था में नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे गर्भ नष्ट हो सकता है।

वैज्ञानिक शोध के अनुसार कलौंजी :

कलौंजी का रसायनिक विश्लेषण करने पर पता चला है कि इसके बीजों में एक लाल व भूरे रंग का स्थिर तेल 31 प्रतिशत होता है। इसमें पीला भूरा उड़नशील तेल 0.5 से 1.6 प्रतिशत होता है। उड़नशील तेल में कार्बन 45 से 60 प्रतिशत की मात्रा में होता है। इसमें डीलाइमोनिन और साइमिन तत्त्व होते हैं। इनके अलावा श्वासनलिका प्रसारक तत्त्व, नाइगेलन, शर्करा, विशाक्त ग्लूकोसाइड, पिच्छिल सेन्द्रिय अम्ल आदि भी होते हैं।

“मौत को छोड कर हर मर्ज की दवाई है कलौंजी”। ये काफी सारी  बीमारियों को ठीक करने की क्षमता रखती है। यहाँ तक की गंजापन तक दूर कर देती है कलौंजी। वैसे तो ये अनेक बीमारियों में अच्छे प्रभाव देता है लेकिन आज हम आपको कलौंजी के 90 अद्भुत फायदों के बारे में बात रहे है, आइये जानते है।

कैसे करें इसका सेवन?

कलौंजी के बीजों का सीधा सेवन किया जा सकता है।
एक छोटा चम्मच कलौंजी को शहद में मिश्रित करके इसका सेवन करें।
पानी में कलौंजी उबालकर छान लें और इसे पिएँ।
दूध में कलौंजी उबालें। ठंडा होने दें फिर इस मिश्रण को पिएँ।
कलौंजी को ब्रैड, पनीर तथा पेस्ट्रियों पर छिड़क कर इसका सेवन करें।

कलौंजी के फायदे | Benefits of kalonji

टाइप-2 डायबिटीज : प्रतिदिन 2 ग्राम कलौंजी के सेवन के परिणामस्वरूप तेज हो रहा ग्लूकोज कम होता है। इंसुलिन रैजिस्टैंस घटती है,बीटा सैल की कार्यप्रणाली में वृद्धि होती है तथा ग्लाइकोसिलेटिड हीमोग्लोबिन में कमी आती है।

मिर्गी : 2007 में हुए एक अध्ययन के अनुसार मिर्गी से पीड़ित बच्चों में कलौंजी के सत्व का सेवन दौरे को कम करता है।

उच्च रक्तचाप : 100 या 200 मि.ग्रा. कलौंजी के सत्व के दिन में दो बार सेवन से हाइपरटैंशन के मरीजों में ब्लड प्रैशर कम होता है।

गंजापन : जली हुई कलौंजी को हेयर ऑइल में मिलाकर नियमित रूप से सिर पर मालिश करने से गंजापन दूर होकर बाल उग आते हैं।

त्वचा के विकार : कलौंजी के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर त्वचा पर मालिश करने से त्वचा के विकार नष्ट होते हैं।

लकवा : कलौंजी का तेल एक चौथाई चम्मच की मात्रा में एक कप दूध के साथ कुछ महीने तक प्रतिदिन पीने और रोगग्रस्त अंगों पर कलौंजी के तेल से मालिश करने से लकवा रोग ठीक होता है।

कान की सूजन, बहरापन : कलौंजी का तेल कान में डालने से कान की सूजन दूर होती है। इससे बहरापन में भी लाभ होता है।

सर्दी-जुकाम : कलौंजी के बीजों को सेंककर और कपड़े में लपेटकर सूंघने से और कलौंजी का तेल और जैतून का तेल बराबर की मात्रा में नाक में टपकाने से सर्दी-जुकाम समाप्त होता है। आधा कप पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल व चौथाई चम्मच जैतून का तेल मिलाकर इतना उबालें कि पानी खत्म हो जाए और केवल तेल ही रह जाए। इसके बाद इसे छानकर 2 बूंद नाक में डालें। इससे सर्दी-जुकाम ठीक होता है। यह पुराने जुकाम भी लाभकारी होता है। कलौंजी को पानी में उबालकर इसका सत्व पीने से अस्थमा में काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है।

छींके : कलौंजी और सूखे चने को एक साथ अच्छी तरह मसलकर किसी कपड़े में बांधकर सूंघने से छींके आनी बंद हो जाती है।

सर्दी -जुकाम : 20 ग्राम कलौंजी को अच्छी तरह से पकाकर किसी कपड़े में बांधकर नाक से सूंघने से बंद नाक खुल जाती है और जुकाम ठीक होता है

आधा कप पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल व चौथाई चम्मच जैतून का तेल मिलाकर इतना उबालें कि पानी खत्म हो जाएं और केवल तेल ही रह जाएं। इसके बाद इसे छानकर 2 बूंद नाक में डालें। इससे सर्दी-जुकाम ठीक होता है। यह पुराने जुकाम भी लाभकारी होता है।

जैतून के तेल में कलौंजी का बारीक चूर्ण मिलाकर कपड़े में छानकर बूंद-बूंद करके नाक में डालने से बार-बार जुकाम में छींक आनी बंद हो जाती हैं और जुकाम ठीक होता है। कलौंजी को सूंघने से जुकाम में आराम मिलता है।

कलौंजी के बीजों को सेंककर और कपड़े में लपेटकर सूंघने से और कलौंजी का तेल और जैतून का तेल बराबर की मात्रा में नाक में टपकाने से सर्दी – जुकाम समाप्त होता है।

This Post Has 2 Comments

  1. Khushbu

    Nice

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