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कमर दर्द होने के कारण और उसके घरेलु उपाय !!

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कमर दर्द होने के कारण ?

धूम्रपान करने वालो को कमर दर्द का खतरा तीन गुना ज्यादा रहता है क्युकी ध्रूम्रपान के कारण पीठ के टिशू डैमेज हो जाती है। सुबह के समय कमर दर्द होने की अहम वजह स्मोकिंग है। इसके अलावा लंबे समय से दवाइयों के सेवन से हड्डियां कमजोर पड़ जाती है जिसकी वजह से सुबह के समय कमर में दर्द होता है।

कमर दर्द के लिए हमेसा कठोर गद्दे का ही चुनाव करे, इससे कमर को पूरा सपोर्ट मिलता है। सोने की पोजीशन से भी सुबह के समय कमर में दर्द होता है। अपने गद्दे की जाँच करके देखें की क्या आपका गद्दा कमर को पूरा सपोर्ट देता है या नहीं, जी हाँ अगर आप अपने मुँह को नीचे दबा के यानि की पेट के बल सोते हैं तो आपको कमर में दर्द होने के चांस बढ़ जातें हैं।

शरीर के मध्य भाग में अतिरिक्त भार होना पेल्विस को आगे की और खींचता है और कमर के निचले हिस्से पर दबाव डालता है। मोटापा भी कमर दर्द का कारण बन सकता है। इसीलिए हमेसा अपना वजन नियंत्रित कार के रखे।

गलत पोजीशन के दौरान शरीर का रक्त संचार प्रभावित होता है जिससे कमर और कमर के निचले हिस्से में दर्द होता है। आपके बैठने, चलने, खड़े, होने और सोने, इन सभी गतिविधियों के दौरान पोजीशन गलत हो तो यह आपके लिए कमर दर्द के कारण बन सकता है।

वजन ज्यादा होने के पर ओस्टियोपोरोसिस होने की आशंका भी बढ़ जाती है। अगर आप बहुत सा हाई कैलरी और लो नुट्रिशन जंक फ़ूड खाते है तो आपका वजन बढ़ जाता है।

कई बार जब हम देर तक एक ही पैर पर जोर देकर खड़े रहते हैं या एक ही करवट में सोते रहते हैं, इससे भी कमर में दर्द हो सकता है। स्लिप डिस्क, डिस्लोकेशन जैसी स्थितियो में भी कमर दर्द होता है।

जब हम नकारात्मक सोचते हैं तो शरीर में बेड हॉर्मोन्स तेजी से बनते हैं और हड्डियों व जोड़ो पर हमला करते हैं। आपको जानकर शायद थोड़ी हैरानी हो, लेकिन अगर आप छोटी – छोटी बातों पर बहुत अधिक तनाव लेते है तो भी यह आपके लिए कमर दर्द की वजह बन सकता है।

जो लोग ऑफिस में लगातार बैठे रहते हैं उनकी कमर के लिए ये खतरे की बात है, क्योकि बैठे रहने पर हमारी स्पाइन पर खड़े होने के मुकाबले ५० फीसदी ज्यादा दबाव पड़ता है। इसीलिए कंप्यूटर पर काम करते समय सर या कंधे को सीधा रखें लेकिन कमर को १३० डिग्री पर, ताकि उस पर फालतू दबाव न पड़े। बीच बीच में थोड़ा चल भी लें।

दरअसल हमारी रीढ़की हड्डी में ३२ वर्टिब्रे होती हैं, जिसमे से २२ मूवमेंट करती हैं। जब इनकी गति अपर्याप्त होती है या ठीक से नहीं होती हैं तो कई सारी समस्याएं पैदा हो जाती है। रीढ़ की हड्डी के अलावा हमारी कमर की बनावट में कार्टिलेज या डिस्क जॉइंट, मस्पेसिया, लिगमेंट आदि भी शामिल होते हैं। इसमें किसी के भी विकारग्रस्त होने के कारण भी कमर दर्द हो सकता है। इसके कारण खड़े होने, झुकने व मुड़ने आदि में बहुत तकलीफ होती है।

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