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मिटटी के तेल के स्वास्थ्य लाभ !!

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आज के विज्ञान की देन है कि ग्रामीण इलाकों में भी जनहित हेतु अमृततुल्य औषधि हर घर से गायब है

बचपन मे जिसके दीये व लालटेन जलाकर पढ़ पाया जिसके चूल्हे (स्टोव) जलाकर खाना खा पाया आज जब उसके अन्य चिकित्सीय गुण को आयुर्वेद शास्त्र में पढ़ा तो उसे जग जाहिर करने से रोक नहीं पाया और धन्वन्तरि कृत पुस्तक के ज्ञान को लेख का रूप दे दिया

घासलेट:- यह मिट्टी का तेल है,

गुण : आयुर्वेद – यूनानी मत से मिट्टी का तेल चौथे दर्जे तक गरम और खुश्क है । यह , कृमिनाशक , वायु को बिखेरने वाला और घाव को भरने वाला होता है । इसमें कपड़े को भिगोकर योनिद्वार में रखने में मासिक धर्म साफ हो जाता है । इसको कान में टपकाने से कान का दर्द और बहरापन चला जाता है ।

उपयोग : 1 . फालिज , लकवा , गठिया , धनुर्वात और स्नायुतंत्र से सम्बन्ध रखनेवाली दूसरी बीमारियों में इसके प्रयोग से बहुत लाभ होता है । इसको 2 माशे पानी में डालकर पीने से कफ की पुरानी खाँसी और दमे में बहुत लाभ होता है । इसके अन्दर वत्ती को तर करके रखने से गुदाद्वार के कीड़े मर जाते है । यह गर्भाशय की वायू की विखेरता है , सरदी को मिटाता है । बवासीर में लाभदायक है । पथरी को तोड़ता है और मरे हुए बच्चे को गर्भाशय से बाहर निकाल देता है I

निम और जलपिपली के हरे पत्ते के रस लेकर रस के बराबर सफेद मिट्टी का तेल मिलाकर पिलाने से प्लेगरोग में आराम हो जाता है इसकी मात्रा 2 तोला प्रति दो घण्टे पर I

💐 सफेद मिट्टी के तेल से अमृतयोग बनाने की विधि:-💐

सफेद मिट्टी का तेल 20 तोला , पोपरमेंट के फूल कपुर 10 तोला , कारबोलिक एसिकड 2 तोला और युक्लेप्टस आयल 1 तोला इन सब चीजों को एक मजबूत काग वाली शीशी में बन्द करके काग लगाकर थोड़ी घूप में रख दें और चीजें एक दिल हो जाय तब उपयोग में लें । यह साँप काटे की विश्वस्त दवा है । सर्पदंश के स्थान पर चीड़ा लगाकर रक्त बहा दें और 2 तोले दवा रुई में तरकर जख्म पर बाँधे । इसे सुघना भी चाहिये । रोगी बेहोश हो तो 2 तोले सरसों के तेल में 20 बूंद दवा उसे पिला देनी चाहिये । नाक में भी दो दो बून्द – बून्द टपकाया जाता है । यह पागल कुत्ता , सियार , छिपकली , कनखजूरा , बिच्छू आदि के जहर में भी उपयोगी है । बिच्छू के जहर में उपयोग करने पर इसमें मुर्गी का बिट मिलाना ही चाहिये । यह योग सभी तरह के जख्म एवं घावों को तुरंत भरता है । रक्त – पित्त के कारण हाथ – पाँव के जलन में भी इसका इंजेक्शन देने और लगाने से फौरन लाभ होता है

जलोदर , मस्तिष्क के रोग , मलेरिया , हिचकी , कौलरा , प्लेग , दाँत कीड़े , उपदंश , पसली के दर्द , कान के दर्द आदि में भी अत्यन्त लाभकारी है ।

इसका एक उपयोग मेरे जीवन से जुड़ी हुई है उसे भी लिख रहा हूँ मेरी बहन की शादी थी और मैं नाई को बुलाने दूसरे गांव गया था रास्ते मे आते वक्त नाई जी को बिच्छू ने काट लिया उन्होंने अपने पैर के काटे से उपर गमछा बाँध लिए जोर से व मैं उन्हें अपने पीठ पर उठा कर घर लाया उस वक्त मेरी उम्र भी ज्यादा नहीं थी लगभग 18 वर्ष की घर पहुचते ही तुरन्त मेरे दादा जी जो बिच्छू का जहर उतरते थे मन्त्र पढ़कर जहर उतारे व उसके बाद उनके पैर को मिट्टी के तेल से भरे बड़े पतीले में डुबोने को बोले 10 मिंट में ही वो स्वस्थ हो गए अभी घटना पूरी नहीं हुई बरात जब भोजन के लिए लम्बी लम्बी कई कतार में बैठी और भोजन परोसा गया और जैसे ही भोजन शुरू हुया एक कतार से एक साथ आवाज आयी सब्जी में मिट्टी तेल की खुशबू आ रही है अन्य कतार से आवाज आई मजाक मत करो बाबा (मेरे दादा जी) की इज्जत का ख्याल करो परन्तु मेरे पिता जी को समझते देर नहीं लगी कंही न कंही गलती से बिच्छू के जहर को उतारने हेतु उपयोग किया गया मिट्टी के तेल के पतीले से सब्जी परोसा गया है उस वक्त कई बुजुर्गो को एक ही बात कहते सुनी जो याद आ रहा है चिंता न करो पेट के कीड़े मर जायेंगे तुम सब के

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