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पीलीया और काला पीलीया के लिए आयुर्वेदिक इलाज

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पीलिया शरीर मेँ छिपे किसी अन्य रोग का लक्षण है | नवजात शिशुओं मेँ यह रोग सामान्य रुप से पाया जाता है | रोग के लक्षण धीरे-धीरे ही स्पष्ट होते है | एकदम से पीलिया होने की संभावना कम ही होती है |

जब जिगर से आंतों की ओर पित्त का प्रवाह रुक जाता है तो पीलिया रोग प्रकट होता होता है | पित्त के जिगर मेँ इकट्ठा होकर रक्त मेँ संचार करने से शरीर पर पीलापन स्पष्ट दिखने लगता है | पीलिया रोग प्रमुख रुप से दो प्रकार का होता है | पहला अग्न्याशय के कैंसर या पथरी के कारण | यह पित्त नलिकाओं अवरोध होने से आंतों मेँ पित्त नहीँ पहुंचने के कारण होता है |

दूसरे प्रकार का पीलिया लाल रक्त कोशिकाओं के प्रभावित होने तथा शरीर मेँ पित्त की अत्यधिक उत्पत्ति से होता है | मलेरिया तथा हैपेटाइटिस रोग भी पीलिया के कारण होता है | कभी-कभी शराब तथा विष के प्रभाव से भी पीलिया रोग हो जाता है |

पीलिया तब होता है जब आपकी त्वचा और आपकी आंखें पीले हो जाते हैं. यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है, जैसे कि यकृत रोग, इसलिए तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता हो सकती है. यह बिलीरुबिन नामक एक पीले पदार्थ के आपके शरीर में बिल्ड-अप के कारण होता है. बिलीरुबिन जो शरीर में तब बनता है जब लाल रक्त कोशिकाओं के हिस्से टूट जाते हैं.

लिवर बिलीरुबिन को रक्त से अपशिष्ट पदार्थ के रूप में लेता है और अपने रासायनिक मेकअप को बदल देता है ताकि अधिकांश इसे पित्त के रूप में मल के माध्यम से पारित हो जाए. सूजा हुआ लिवर या बाधित पित्त नलिकाएं अत्यधिक बिलीरुबिन को जन्म दे सकती हैं जिससे पीलिया हो सकता है. रोग के लक्षणों में त्वचा का पीला रंग और आंखों का सफेद होना, गहरा पेशाब और खुजली शामिल हैं.

इसके कई संभावित कारण हैं और उनमें से कुछ गंभीर हैं. उनमें शामिल है:

  • पित्ताशय की पथरी
  • अल्कोहलिक लीवर रोग
  • अग्नाशयशोथ
  • हेपेटाइटिस
  • सिकल सेल रोग

नवजात शिशु में पीलिया अधिक आम है, लेकिन वयस्कों में भी हो सकता है. बिलीरुबिन, एक पीले-नारंगी पदार्थ, आपके लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है और जब ये कोशिकाएं मर जाती हैं, तो लिवर इसे रक्तप्रवाह से फ़िल्टर करता है. लेकिन अगर कुछ गलत हो जाता है और आपका लीवर यह नहीं कर सकता है, बिलीरुबिन बनाता है और आपकी त्वचा को पीला दिखने का कारण बन सकता है.

काला पीलिया एक आम लिवर रोग हैं, जो कि कई असामान्य चिकित्सा कारणों की वजह से से हो सकते हैं. काला पीलिया होने पर किसी व्यक्ति को सिर दर्द, लो-ग्रेड बुखार, मतली और उल्टी, भूख कम लगना, त्वचा में खुजली और थकान आदि लक्षण होते हैं. त्वचा और आंखों का सफेद भाग पीला पड़ जाता है. इसमें मल पीला और मूत्र गाड़ा हो जाता है.

वहीं, पीलिया से पीड़ित व्यक्ति को त्वचा के रंग में बदलाव दिखाई दे सकता है. बिलीरुबिन के स्तर के आधार पर त्वचा और आंखों का रंग अलग-अलग होता है. मध्यम स्तर पीले रंग की ओर जाता है, जबकि बहुत उच्च स्तर भूरा दिखाई देता है. गहरे रंग का मूत्र और खुजली, पीला मल भी हो सकता है.

पीलिया से पीड़ित व्यक्ति को त्वचा के रंग में बदलाव दिखाई दे सकता है. बिलीरुबिन के स्तर के आधार पर त्वचा और आंखों का रंग अलग-अलग होता है. मध्यम स्तर एक पीले रंग की ओर ले जाता है, जबकि बहुत उच्च स्तर भूरा दिखाई देता है. गहरे रंग का मूत्र और खुजली, पीला मल भी हो सकता है. एक साथ आने वाले लक्षणों में शामिल हैं:

  • थकान
  • लिवर की सूजन के कारण पेट में दर्द और कुछ पेट के ऊपरी हिस्सो में दर्द हो सकता है.
  • वजन घटना
  • उल्टी और मतली
  • बुखार
  • पीला मल
  • गहरा पेशाब
  • पीलिया के कारण खुजली कभी-कभी इतनी गंभीर होती है कि मरीज अपनी त्वचा को खरोंच लेते हैं या अनिद्रा का अनुभव करते हैं.

सही निदान के लिए परीक्षा और प्रयोगशाला परीक्षणों की आवश्यकता होती है. निदान में इतिहास और शारीरिक परीक्षा और पेट का करीबी ध्यान, ट्यूमर के लिए महसूस करना और लिवर की दृढ़ता की जांच करना शामिल है. फर्म लिवर सिरोसिस, या लिवर के निशान को इंगित करता है. रॉक-हार्ड लिवर कैंसर का सुझाव देता है. कई परीक्षण पीलिया की पुष्टि कर सकते हैं. लीवर अच्छी तरह से काम कर रहा है या नहीं यह पता लगाने के लिए सबसे पहले लिवर फंक्शन टेस्ट होता है.

पीलिया रोग के लक्षण:-

रोगी की त्वचा पीली पड़ जाती है | आंखोँ के सफेद भाग मेँ पीलापन झलकना भी पीलिया के प्रमुख लक्षण है | इसके अतिरिक्त मूत्र मेँ पीलापन आ जाता है तथा सौंच सफेद रंग का होता है | त्वचा पर पीलापन छाने से पहले त्वचा मेँ खुजली होती है |

पीलिया रोग का उपचार

  1. बड़ा पहाड़ी नीबू का रस पित्त प्रवाह मेँ सुचारु रुप से करने में सहायक होता है |
  2. कच्चे आम को शहद तथा कालीमिर्च के साथ खाने से पित्त जन्य रोगो मे लाभ होता है और जिगर को बल मिलता है |
  3. चुकंदर का रस भी पित्त प्रकोप को शांत करता है | इसमेँ एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर प्रयोग करते रहने से शीघ्र लाभ होता है |

  • चुकंदर के पत्तों की सब्जी बनाकर खाने से भी पीलिया रोग शांत होता है |
  • सहजन के पत्तों के रस में शहद मिलाकर दिन मे दो-तीन बार देने से रोगी को लाभ होता है | काला पीलीया में भी लाभकारी है.
  • अदरक, नींबू और पुदीने के रस मे एक चम्मच शहद मिलाकर प्रयोग करना भी काफी फायदेमंद होता है |

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  • पीलिया के रोगी को मूली के पत्तो से बहुत अधिक लाभ होता है | पत्तों को अच्छी तरह से रगड़कर उसका रस छानें और उसमेँ छोटी मात्रा में चीनी या गुड़ मिला लेँ | पीलिया के रोगी को प्रतिदिन कम से कम आधा किलो यह रस देना चाहिए | इसके सेवन से रोगी को भूख लगती है और नियमित रुप से उसका मल साफ होने लगता है | रोग धीरे-धीरे शांत हो जाता है | काला पीलीया में भी लाभकारी है.

  • एक गिलास टमाटर के रस में थोड़ा सा काला नमक और काली मिर्च मिला ले | इसे प्रातःकाल पीने से पीलिया रोग मे काफी लाभ होता है और जिगर ठीक से काम करने लगता है |
  • पीपल के पेड़ की ३-4 नई कोपले अच्छी प्रकार से धोकर मिश्री या चीनी के साथ मिलाकर बारीक – बारीक पीस ले | 200 ग्राम जल मे घोलकर रोगी को दिन मे दो बार पिलाने से ४-5 दिनों मे पीलिया रोग से छुटकारा मिल जाता है | पीलिया के रोगी के लिए यह एक बहुत ही सरल और प्रभावकारी उपाय है | काला पीलीया में भी लाभ देता है.

  • फिटकिरी को भूनकर उसका चूर्ण बना ले. 2 से 4 रती तक दिन मेँ दो या तीन बार छाछ के साथ पिलाने से कुछ ही दिनोँ मेँ पीलिया रोग मेँ आराम होना शुरु हो जाता है |
    कई वैद्य केले में कपूर , फिटकरी , चूना , आक कीवकोपले भी देते है.कई बर्फी में देते है .
  • कासनी के फूलो का काढ़ा बनाकर 50 मिलीलीटर तक की मात्रा मेँ दिन मे तीन-चार बार देने से पीलिया रोग मे लाभ होता है | इसका सेवन करने से बढ़ी हुई तिल्ली भी ठीक हो जाती है | पित्त प्रवाह मेँ सुचरूता तथा जिगर और पित्ताशय को ठीक करने मेँ सहायता मिलती है |

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  • गोखरु की जड़ का काढ़ा बनाकर पीलिया के रोगी को प्रतिदिन 50 मिलीलीटर मात्रा दो – तीन बार देने से पीलिया रोग मेँ काफी लाभ होता है |
  • एलोवीरा का गूदा निकाल कर काला नमक और अदरक का रस मिलाकर सुबह के समय देने से लगभग 10 दिनो मे पीलिया का रोगी ठीक हो जाता है | काला पीलीया में भी दे सकते है.
  • कुटकी और निशोध दो देसी जड़ी – बूटियाँ है | इन दोनोँ को बराबर मात्रा मे लेकर चूर्ण बना ले, एक चम्मच चूर्ण गर्म जल से रोगी को दे | इस प्रकार दिन मे दो बार देने से जल्दी लाभ होने लगता है |काला पीलीया में भी लाभकारी है.

सफल रामबाण इलाज➖➖➖➖➖➖➖

फिटकरी भस्म 50ग्राम,
कलमी शौरा 50ग्राम,
नौशादर शुद्ध 50ग्राम,
कुटकी -50ग्राम,
रेवंदचीनी 50ग्राम ,
यवक्षार 50 ग्राम
हरड़ ,बहेड़ा ,आँवला 50-50 ग्राम ,
काली मिर्च , सोठ, पीपल 50-50ग्राम
मिलाकर रख लें .

सुबह-दोपहर-शाम 1 से 3 ग्राम तक पानी , गन्ने के रस , लस्सी से ले सकते है.

परहेज और सावधानियां:-➖➖➖➖➖
पीलिया के रोगी को मसालेदार और गरिष्ठ भोजन का त्याग करना चाहिए | स्वच्छ पानी उबाल कर ठंडा करके पीना चाहिए | शराब, मांस, धूम्रपान, का सेवन एक दम नही करना चाहिए | अशुद्ध और बासी खाद्द- पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए |

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