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सोरायसिस को शर्तिया दूर करेंगे ये घरेलू नुस्खे

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सोरायसिस त्वचा से जुड़ा एक आम रोग है. जिसमें त्वचा के ऊपर एक मोटी परत जम जाती है, जिसमें त्वचा पर लाल रंग के चतके से उभर आते हैं. जब यही रोग आपके सिर की त्वचा पर या स्कैल्म में हो जाता है तो इसे स्कैल्प सोरायसिस कहा जाता है. सिर की त्वचा पर धब्बे बनना, खुजली होना, डैंड्रफ की परत का जम जाना इसके लक्षण हो सकते हैं. समय रहते अगर स्कैल्प सोरायसिस का उपचार नहीं किया जाता तो यह समय के साथ-साथ बाल झड़ने जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है.

सोरायसिस एक स्किन संबंधी बीमारी है, जिसे स्किन का अस्थमा भी कहा जाता है। इसमें स्किन सेल्स काफी तेजी से बढ़ते हैं। इसमें स्किन की ऊपरी परत पर पपड़ी बन जाती है और वह छिल जाती है। इससे स्किन में शुष्कता आ जाती है और सफेद धब्बे पड़ जाते हैं। खुजलाहट के कारण त्वचा लाल हो जाती है और उसमें घाव बन जाते हैं।

अक्सर सोरायसिस किसी भावनात्मक आघात या तनाव से होता है, हालांकि इसके और कारण भी हैं। प्राचीन विज्ञान आयुर्वेद के अनुसार, हवा और कफ के असंतुलन के कारण सोरायसिस होता है। यहां हम कुछ तरीके बता रहे हैं जिनसे सोरायिसस का इलाज किया जा सकता है:

इस रोग में आपके सिर की त्वचा पर सफ़ेद धब्बे बनना भी शुरू हो जाते हैं जोकि वैसे तो बालों के बीच छिप जाते हैं लेकिन कई बार ये आपके माथे तक या गर्दन के निचले हिस्से और कानों के पीछे तक भी फैल सकते हैं. ये कोई छूत का रोग नहीं है लेकिन अगर आपके परिवार में पहले किसी को ये समस्या रही है तो संभव है कि आप भी इसकी चपेट में आसानी से आ जाएं.

ध्यान में रखने की बात ये है कि इस रोग की वजह से सीधे तौर पर आपके बाल नहीं झड़ते लेकिन बालों में होने वाली खुजली की वजह से ज़्यादा सख़्ती से कंघी करने और बालों की जड़ों में ज़ोर-ज़ोर से खुजली करने से अस्थायी तौर पर आपके बाल गिरना शुरू हो जाते हैं. इसीलिए अगर आप को अपने सिर की त्वचा पर ऐसा कोई बदलाव नज़र आ रहा है तो आपको तुरंत किसी त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए.

आपका डॉक्टर आपको इसके उपचार के लिए कई तरह के लोशन, तेल और अन्य तरह के मेडिकल उपचार का सुझाव दे सकता है जिससे आपकी ये समस्या दूर हो जाए. लेकिन संभव है कि इन तरकीबों से आपके बालों की सेहत हमेशा के लिए खस्ता हो जाए. इसीलिए ऐसे परिस्थिति में बेहतर है कि आप अपना रुख़ घरेलू नुस्खों ओर करें.

इस समस्या से निजात के लिए आइए जानते हैं कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में

1. सेब का सिरका

ये सबसे बेहतरीन घरेलू नुस्खों में से एक है. सेब के सिरके में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण स्कैल्प सोरायसिस के कारण होने वाले दर्द, जलन और रेडनेस को कम करने में आपकी सहायता करता है. 

कैसे करें इस्तेमाल- 

करीब आधे कप पानी में 2 चम्मच सिरके को मिलाकर बीस मिनट तक उसे प्रभावित क्षेत्र पर मले.  फिर हल्के गुनगुने पानी से उसे धो लें.  इस प्रक्रिया को सप्ताह में कम से कम दो बार करें. लेकिन इस बात का ध्यान ज़रूर रखें कि कहीं आपकी त्वचा फटी ना हो वरना खुले घावों पर सिरके की जलन बहुत अधिक बढ़ जाती है.

2. एलोवेरा यानी ग्वारपाठा

ऐलोवेरा जैल में मौजूद एंटीसेप्टीक गुण इसे स्कैल्प सोरायसिस के उपचार में काफी लाभकारी साबित करते हैं. इसके प्रयोग से जलन और खुजली में कमी आती है.

कैसे करें इस्तेमाल- 

बेहतर नतीजों के लिए एलोवेरा जैल को लैवेंडर ऑयल के साथ प्रयोग करें.  इसकी हर मालिश के बाद बालों को हल्के औषधीय शैम्पू से धो लें.

3. नारियल तेल

सिर की त्वचा से जुड़ी किसी परेशानी की बात हो और नारियल तेल का ज़िक्र ना हो ऐसा कैसे मुमकिन है. नारियल तेल त्वचा के धब्बे हटाने में सबसे कारगर नुस्खों में से एक है. ये स्कैल्प के भीतर तक जाकर सूखेपन और त्वचा पर जमी पपड़ी को दोबारा होने से रोकने में काफी सहायता करता है.

कैसे करें इस्तेमाल-

नारियल तेल को पहले हल्का गर्म कर ले और फिर त्वचा पर मालिश करके रात भर वैसे ही रहने दें. यदि आपके पास नारियल तेल उपलब्ध नहीं है तो आप पुदीने के तेल, सरसों का तेल, टी ट्री ऑयल और लेवेन्डर ऑयल का भी प्रयोग कर सकते हैं.

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5. दही (curd)

सोरायसिस से लड़ने का एक और घरेलू नुस्खा है दही का उपयोग. दही आपकी त्वचा में नमी लाने में मदद करती है. जिसकी वजह से खारिश और स्कैल्प पर सूखी पपड़ी से निजात मिलती है. 

कैसे करें इस्तेमाल 

दही को करीब 20 मिनट तक अपने स्कैल्प पर मसाज करने के बाद एक एंटीसैप्टीक शैम्पू से धो लें.  

6. शीया बटर

शीया ट्री के फल से बनने वाला ये मक्खन विटामिन ए, विटामिन ई और ट्राइग्लिसराइड्स से भरपूर होता है. शीया बटर डेड स्कीन को हटाने, त्वचा को मोस्चराइज़ करने और स्कैल्प को कंडीशन करने में मदद करता है. ये स्कैल्प सोरायसिस के अलावा शरीर पर होने वाले सोरायसिस से लड़ने में भी सहायक होता है. 

ऐसे करें इस्तेमाल- 

शीया बटर का इस्तेमाल करने के लिए इसे पिघला कर तरल अवस्था में लाने के बाद स्कैल्प में मसाज करें और रात भर वैसे ही छोड़ दें. 
इसी प्रक्रिया को हफ्ते में दो बार दोहराएं.

7- अदरक

अदरक में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं. इसमें कई एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते है जोकि किसी प्रकार का संक्रमण रोकने में काफी सहायता करते हैं.

कैसे करें इस्तेमाल 

पहले अदरक के एक टुकड़े को पानी में उबालकर पानी को छान लीजिए फिर उस पानी में शहद और नींबू का रस मिलाकर उसे उसी समय पी जाइए.
याद रहे कि ठंडे घोल का नहीं गर्म घोल का सेवन करना है. 

8- छाछ

आयुर्वेद तक्रधारा के इलाज के अनुसार, सोरायसिस की बीमारी में शुद्ध किए हुए औषधीय छाछ का प्रयोग किया जाता है। इससे स्किन और बाल हेल्दी रहते हैं।

9- नीम

नीम के पत्ते सोरायसिस के इलाज में काफी कारगर होते हैं। नीम का तेल पोषक तत्वों से भरपूर है और उसका उपयोग कई प्रकार के लोशन, क्रीम, साबुन व प्रसाधन सामग्रियों में होता है। यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जिन्हें खुजली की बीमारी यानी एक्जिमा है। साथ ही इससे सोरायसिस और कील-मुंहासों के इलाज में भी मदद मिलती है। इसे खरोचों व छोटे घावों पर भी लगाया जा सकता है। शायद यही कारण है कि हर प्रकार की दवाई वाले लोशन में नीम का तेल रहता ही है। नीम का तेल त्वचा की शुष्कता और खुजलाहट दूर करता है।

10 – विरेचन

आयुर्वेद के विशेषज्ञ विरेचन (catharsis)की सलाह देते हैं जिससे शरीर से सारे विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं।

11- विषैले तत्व पैदा करने वाले खाने से बचाव

आयुर्वेद के अनुसार, कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिनका खाने के दौरान गलत कॉम्बिनेशन शरीर में विषैले तत्व पैदा कर सकता है। जैसे कि मिल्कशेक और दही कभी एक साथ न खाएं।

12- सन के बीज

सन के बीज में ऐसे पदार्थ होते हैं जो शरीर में सूजन कम करते हैं जैसे ओमेगा 3 फैटी ऐसिड्स। साथ ही इनमें ऐंटीऑक्सिडेंट्स भी होते हैं, जो हॉर्मोन के सिक्रीशन ( स्राव) में बैलेंस बनाए रखते हैं। सन के कच्चे या भुने हुए बीज खाने से स्किन साफ रहती है।

13- बादाम : 

रात को सोने से कुछ देर पहले 10 बादाम लें और उन्हें अच्छी तरह पीसकर पाउडर बनाएं। इन्हें एक गिलास पानी में कुछ देर उबलने के लिए छोड़ दें और ठंडा हो जाने पर रोगी के घावों पर लगाएं। आप इसे रात भर रोगी के शरीर पर ही लगा रहने दें और सुबह उठकर शरीर को साफ करें।  इस उपचार से सरायसिस के इलाज के लिए अच्छे परिणाम मिले है। चंदन पावडर का भी इसी तरह इस्तेमाल किया जाता है।

14- केले के पत्ते : 

पत्ता गोभी और केले के पत्तों का इस्तेमाल सरायसिस के उपचार के लिए किया जाता है। रोगी अपने शरीर के उस स्थान पर पत्तों को बांधें जहां सरायसिस हुआ है। 

15 – योग

चूंकि सोरायसिस भावनात्मक आघात के कारण होता है इसलिए प्राणायाम और आर्ट ऑफ लिविंग की सुदर्शन क्रिया, जोकि एक लयबद्ध सांस लेने की प्रक्रिया है, बहुत लाभदायक होती है। सुदर्शन क्रिया शरीर से भावनाओं के स्तर पर मौजूद विषैले तत्वों और नकारात्मक भावनाओं को निकाल देती है।

रम्य राजशेखर, आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री योग के एक प्रशिक्षक, सोरायिसस से निपटने का एक तरीका बताते हैं

1. 3 बार ॐ का उच्चारण करें
2. कपालभाति – 20 बार, चक्र ( यदि आपका ब्लड प्रैशर बढ़ा रहता है, हृदय संबंधित रोग हैं या फिर चक्कर आते हैं तो धीमी गति से ही करें)
3. भस्त्रिका – 20 बार, 3 चक्र ( यदि आपका ब्लड प्रैशर बढ़ा रहता है, हृदय संबंधित रोग हैं या फिर चक्कर आते हैं तो धीमी गति से ही करें)
4. नाड़ी शोधन – 9 से 12 चक्र, धीमी और गहरी सांसें लें
5. भ्रामरी – 5 बार
6. इसके साथ साथ, अधिक मात्रा में पानी पिएं, योग निद्रा करें, चुस्त रहें और संतुलित आहार लें।
7. अपनी पसंद का कम से कम एक ध्यान प्रतिदिन करें।

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