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ऐसा होगा भव्य राम मंदिर, मंदिर निर्माण को लेकर बड़ी खबर

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राम मंदिर

राम मंदिर (Ram Mandir) निर्माण को लेकर अयोध्या में आज श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक हुई. इस बैठक में मंदिर के भूमि पूजन की तारीखों के साथ मॉडल में बदलाव पर भी बड़ा फैसला लिया गया. जानकारी के मुताबिक, राम मंदिर की ऊंचाई और आकार में बदलाव का निर्णय लिया गया है. राम मंदिर का निर्माण जिस दिन से शुरू होगा, उस दिन से करीब 3 या साढ़े तीन साल का वक्त लगेगा. इसके अलावा मंदिर निर्माण के लिए समाज से धन संग्रह किया जाएगा.

राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने बताया कि प्रस्तावित राम मंदिर मॉडल 128 फीट ऊंचा है, जिसे बढ़ाकर 161 फीट ऊंचा करने का फैसला लिया गया है. इसके अलावा गर्भगृह के आसपास अब 5 गुंबद बनाए जाएंगे, जबकि पहले तीन गुंबद बनने थे.

राम मंदिर का मॉडल

राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने कहा कि राम मंदिर प्रारूप के भू-तल वाले हिस्सों के पत्थरों की तराशी पूरी हो चुकी है. राम मंदिर के भू-तल में सिंहद्वार, गर्भगृह, नृत्यद्वार, रंगमंडप बनेगा. वहीं प्रथम तल पर राम दरबार की मूर्तियों को स्थान दिया जाएगा. यही नहीं प्रस्तावित राम मंदिर के मॉडल के मुताबिक मंदिर में 24 दरवाजों का चौखट होगा, जो कि संगमरमर के पत्थरों से बनाया जाएगा. इन संगमरमर के पत्थरों पर राजस्थान के मकराना में काम चल रहा है.

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित राम मंदिर की लंबाई 268 फीट, चौड़ाई 140 फीट और ऊंचाई-128 फीट तय की गई है. इसके अलावा मंदिर में 212 खंभे होंगे. जिसमें से पहली मंजिल में 106 खंभे और दूसरी मंजिल में 106 खंभे बनाए जाएंगे. प्रत्येक खंभे में 16 मूर्तियां होंगी और मंदिर में दो चबूतरे भी होंगे. 

चारों दिशाओं में होंगे द्वार
कामेश्वर चौपाल ने बताया कि मंदिर में 4 द्वार होंगे जो कि चारों दिशाओं में खुलेंगे. एक द्वार टेढ़ी बाजार, दूसरा द्वार क्षीरेश्वररनाथ मंदिर की तरफ, तीसरा द्वार गोकुल भवन और चौथा द्वार- दशरथ महल की तरफ से (ये मुख्य रास्ता होगा) खुलेगा, इसके अलावा भूतल पर रामलला, प्रथम तल पर राम दरबार होगा. खास बात यह है कि इसके लिए सीमेंट और मौरंग का इस्तेमाल नहीं  किया जाएगा.

राम मंदिर परिसर

जानकारी के मुताबिक, मंदिर के प्रांगण में रामकथा कुंज 45 एकड़ में बनेगा. यहां 125 मूर्तियां भगवान राम के जीवन काल की बनाई जाएंगी. जन्म काल से लेकर लंका विजय और राजगद्दी तक की मूर्तियों का लगाया जाएगा. इसके अलावा मंदिर परिसर में धर्मशाला और गौशाला भी बनाया जाएगा.

भूमि पूजन की संभावित तारीखें

कामेश्वर चौपाल ने कहा कि पीएम मोदी अयोध्या आएंगे. ये कंफर्म है. 3 अगस्त या 5 अगस्त को पीएम मोदी के हाथों ही मंदिर निर्माण का शिलान्‍यास किया जाएगा. पीएम को निवेदन कर दिया गया है. तिथियों का सुझाव दे दिया गया है, आखिरी निर्णय PMO करेगा.

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर बड़ी खबर आ रही है. सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर की नींव 15 फीट गहरी होगी. राम मंदिर की नींव में 8 लेयर होंगे. 2-2 फीट की एक लेयर होगी. नींव का प्लेटफॉर्म तैयार करने में कंक्रीट, मोरंग का इस्तेमाल होगा. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राम मंदिर में लोहे का इस्तेमाल नहीं होगा. भूतल मिलाकर राम मंदिर तीन मंजिल का होगा. भूतल, प्रथम तल और द्वितीय तल

नए मॉडल के मुताबिक राम मंदिर 10 एकड़ में बनेगा. शेष 57 एकड़ को राम मंदिर परिसर के तौर पर विकसित किया जाएगा. राम मंदिर परिसर में नक्षत्र वाटिका बनाई जाएगी, 27 नक्षत्र के वृक्ष लगाए जाएंगे. नक्षत्र वाटिका का बनाने का मकसद है कि अपने अपने जन्मदिन पर लोग अपने नक्षत्र के हिसाब से पेड़ के नीचे बैठकर ध्यान लगा सकें और राम मंदिर परिसर में पूजा अर्चना कर सकें. राम मंदिर परिसर में बाल्मीकि रामायण में वर्णित वृक्षों को भी लगाया जाएगा और इनका नाम भी बाल्मीकि रामायण के आधार पर ही रखा जाएगा.

शेषावतार मंदिर की अस्थाई स्थापना राम मंदिर के भूमि पूजन के बाद की जाएगी. राम मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद राम मंदिर परिसर में स्थाई तौर पर शेषावतार मंदिर बनेगा. राम मंदिर में परिसर में रामकथा कुंज पार्क भी बनेगा जो भगवान राम के जीवन चरित्र पर आधारित होगा. राम मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान मिले अवशेषों का संग्रहालय भी बनाया जाएगा. 

गोशाला, धर्मशाला, अन्य मंदिर बनाए जाएंगे. मंदिर के भूमि पूजन के लिए ताम्रपत्र तैयार कराया जा रहा है. ताम्रपत्र पर संस्कृत भाषा में राम मंदिर से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी लिखी होगी. ताम्रपत्र पर मंदिर का नाम, स्थान, नक्षत्र, समय लिखा होगा, जिसे नींव में रखा जाएगा. सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों की मिट्टी और नदियों के जल से भूमि पूजन किया जाएगा. मंदिर में परिसर में 2 परिक्रमा केन्द्र भी बनाए जाएंगे. पहली परिक्रमा गर्भगृह की होगी और दूसरी परिक्रमा राम मंदिर की होगी. 

अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास की तैयारियां जोरों पर हैं. अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर के मॉडल में बदलाव किया गया है. पुराने मॉडल के मुताबिक दो ही मंजिलें बननी थीं, लेकिन अब मंदिर तीन मंजिला बनेगा. मंदिर की ऊंचाई और गुंबद की संख्या में भी परिवर्तन किया गया है. राम मंदिर के नए मॉडल की पहली तस्वीर आ गई है.

मंदिर के मॉडल में क्या हुआ बदलाव?

मंदिर अब दो नहीं, बल्कि तीन मंजिला होगा. इसकी लंबाई 268 फीट और चौड़ाई 140 फीट होगी. मंदिर का मूल लुक लगभग वही रहेगा. मंदिर के गर्भ गृह और सिंह द्वार के नक्शे में कोई बदलाव नहीं होगा. राम मंदिर में अग्रभाग, सिंह द्वार, नृत्य मंडप रंग मंडप और सिंह द्वार को छोड़कर लगभग सब का नक्शा बदलेगा.

मंदिर की ऊंचाई पहले 128 फीट रहनी थी, जो अब 161 फीट हो गई है. तीन मंजिला मंदिर में 318 खंभे होंगे. हर तल पर 106 खंभे बनाए जाएंगे. राम मंदिर के नक्शे को नए सिरे से तैयार करने में वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा जुटे थे. करीब 100 से 120 एकड़ की भूमि पर पांच गुंबदों वाला यह मंदिर दुनिया में अनोखा होगा. ऐसा मंदिर दुनिया में अब तक कहीं नहीं है.

पीएम मोदी करेंगे भूमि पूजन

सूत्रों के मुताबिक 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभिजीत मुहूर्त में, सर्वार्थ सिद्धि योग में मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन करेंगे. इसके लिए ताम्र कलश में गंगाजल के साथ ही अन्य तीर्थ स्थलों से भी जल लाया जाएगा. भूमि पूजन के लिए इसी जल का उपयोग किया जाएगा. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पीएम मोदी राम लला को महंत नृत्य गोपाल दास की ओर से समर्पित किए जाने वाले 40 किलो चांदी रजत शिला का पूजन करेंगे. इसे नींव में स्थापित किया जाएगा.

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रस्तावित नए मंदिर का डिजाइन मंगलवार को सोमपुरा बंधुओं की कड़ी मेहनत से तैयार हो गया है। ट्रस्ट ने इस मंदिर का नाम श्रीरामजन्मभूमि मंदिर रखा है, जो सबसे अग्रभाग में सिंह द्वार पर दर्ज होगा। इस मंदिर का आकार अब बढ़कर 84 हजार 6 सौ वर्गफीट हो गया है, जो पहले के प्रस्तावित मंदिर के दूना से भी करीब 10 हजार वर्गफीट बड़ा है। 

इसमें गूढ़ मंडप समेत कीर्तन व प्रार्थना के लिए भी मंडप की व्यवस्था की गई है। पहले जहां मंदिर की क्षमता 20 हजार भक्तों की थी, वहीं अब 50 हजार से अधिक लोग एक साथ पूजा कर सकते हैं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों 5 अगस्त को भूमिपूजन से 15 दिन पहले ही गुजरात के अहमदाबाद में रहने वाले प्रख्यात वास्तुविद चद्रकांत सोमपुरा के दोनों पुत्र निखिल व आशीष ने मंगलवार की देर शाम प्रकार और  सैंड स्टोन (गुलाबी पत्थर) से बनने वाले श्रीरामजन्म भूमि मंदिर में लगने वाले एक-एक स्तंभ, उसे खड़ा करने की पेटी समेत इसी पत्थर की छतों की डिजाइन तैयार कर ली है। 

मंदिर में नहीं होगा स्टील का प्रयोग

इंजीनियर आशीष चद्रकांत सोमपुरा ने अमर उजाला को बताया कि पूरे मंदिर में कहीं भी स्टील का प्रयोग नहीं होगा। पूरा मंदिर पत्थरों पर खड़ा होगा। पत्थरों के अलग-अलग आइटम का कैलकुलेशन जल्द ही फाइनल हो जाएगा। यह भी साफ किया कि नींव में भी स्टील का प्रयोग नहीं होगा। मिट्टी की जांच रिपोर्ट आते ही इसकी गहराई तय होगी, फिर इसे पत्थर या कंक्रीट से बनाने की अलग डिजाइन बनेगी, जिसे एलएंडटी व एनबीसीसी को तैयार करना है। इस नींव के बाद भी मंदिर की एक और फाउंडेशन 12 फीट ऊंचा बनेगा, जिसपर अग्रभाग, सिंह द्वार से लेकर गर्भगृह तैयार होगा। 

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