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तिल्ली (प्लीहा )का बढ़ने का आयुर्वेदिक उपचार !!

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तिल्ली (प्लीहा )का बढ़ने का आयुर्वेदिक उपचार –


ये हमारे पेट के बायीं तरफ पायी जाती है तिल्ली के बढ़ने से उक्त भाग का सक्त अथवा उभरा हुआ दिखाई देना और इसको दबाने पे दर्द होने लगता है तिल्ली का कार्य पुरानी लाल रक्त कोशिका को खत्म करना और नये रक्त का निर्माण करना है रक्त में हिमोग्लोबिन को बनाना है तिल्ली के बढ़ने से हमारे शरीर में बहुत सारे रोग हो सकते है |

तिल्ली (प्लीहा )के बढ़ने का कारण –


तिल्ली रोग का प्रमुख कारण मलेरिया रोग है |
जंक फ़ूड ,फ़ास्ट फ़ूड के सेवन अधिक मिर्च और मशालो के सेवन से |
धुम्रपान और शराब के सेवन से |
शरीर में लाल रक्त कोशिका में कमी के कारण |
थेलेसिमिया रोग के कारण
तिल्ली (प्लीहा ) के बढ़ने के लक्षण –
अधिक रक्त संचार के कारण बड़ने वाली तिल्ली में भय का उत्पन होना |
पेट के बाये हिस्से में दर्द होना ,पेट का फूलना ,कब्ज ,धातु रोग ,
शरीर का भारीपन ,पेट में गैस का बनना


त्वचा के रंग में बदलाव आना ,साँस का फूलना
पीलिया रोग होना ,मूत्र विसर्जन में दिक्क्त आना |
प्यास का अधिक लगना ,जलन ,खासी , बुखार अथवा उल्टी का आना |


तिल्ली (प्लीहा )के बढ़ने का उपचार –


एक कप ताजा गोमूत्र में एक चम्मच मीठा सोडा डालकर सुबह और शाम को पिने से मात्र 15 दिनों में तिल्ली का बढ़ना बंद हो जायेगा |इस रोग के बेहतर परिणाम के लिए राई को गोमूत्र के साथ पीसकर इस मिश्रण को बढ़ी हुई तिल्ली वाले स्थान पे लगाने से कुछ ही दिनों में तिल्ली का बढ़ना बंद हो जायेगा |
इस रोग में गोमूत्र को थोडा गर्म करके उसमे सूती कपडे को भिगोकर पेट के बाये भाग जहा पे तिल्ली हो वहा पे सेकने से कुछ ही दिनों में तिल्ली का बढना बंद हो जाता है |
इस रोग में पुराना गुड डेढ़ ग्रामऔर बड़ी हरड के छिलके का चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर इनकी गोलिया बनाये इन गोलियों को सुबह और शाम को हल्के गर्म पानी के साथ मात्र 1 महीने तक सेवन करने से तिल्ली अथवा प्लीहा का बढ़ना बंद हो जायेगा |


एक पक्के हुवे नीबू को लेकर उसके दो हिस्से कर दे आधे नीबू को बिना काटे चारो हिस्सों पे काली मिर्च का पाउडर ,दुसरे हिस्से पे काला नमक तीसरे हिस्से पे सौठ चौथे हिस्से पे मिश्री को पीसकर डाल दे रात को इस नीबू को ढक दे सुबह खाना खाने से पहले इस को थोडा सा गर्म करके चूसने से 21 दिन में तिल्ली रोग जड़ से खत्म हो जाता है |
अजवायन को पीसकर उसमे थोडा सा सेंधा नमक मिलाकर सुबह और शाम को भोजन करने के बाद सेवन करने से कुछ ही दिनों में तिल्ली का बढ़ना बंद हो जायेगा |इसके साथ अजवायन के चूर्ण को अकेले लेने से भी रोग दूर होता है |


इस रोग में बथुआ की जड़ 10 ग्राम काली मिर्च का पाउडर को पीसकर बेर के समान गोली को बनाकर रोजाना खाली पेट 1 गोली को शहद के साथ सेवन करने से तिल्ली का बढना बंद हो जाता है 15 दिनों तक इस का सेवन अवश्य करे |
इस रोग में आम के 50 ग्राम रस में 10 -15ग्राम शहद को मिलाकर सुबह खाली पेट सेवन करने से कुछ ही दिनों में तिल्ली की सुजन और घाव धीरे धीरे ठीक हो जाता है इसका सेवन करते समय तक किसी भी प्रकार की खटटी वस्तुवो को ने खाए जल्दी तिल्ली का बढ़ना दूर होगा |
इस रोग में 3 -4 ग्राम पीपल का पाउडर और दो -तिन चम्मच गियोल का रस और 2 चम्मच शहद मिलाकर इन तीनो को अच्छे से पेस्ट बना ले इस पेस्ट को रोजाना सेवन करने से तिल्ली का बढ़ना बंद होगा |


इस रोग में धृतकुमारी के ताज़ा पतों को पीसकर उसके 2 ग्राम रस में 1 ग्राम शहद मिलाकर चीनीमिटी के बने बर्तन में रखदे उसके मुंह को बंद करके 7 दिन तक धुप में रखने के बाद सुबह और शाम को 10 -20 ग्राम इस मिश्रण का सेवन करने से तिल्ली का बढ़ना बंद हो जाता है |
इस रोग में सुबह 1 गिलास पानी में आधा ग्राम नोसादर को डालकर रोजाना सेवन करने से तिल्ली का बढ़ना बंद हो जाता है |
इस रोग में कच्चे पपीते के 10 -15 ग्राम दूध में चीनी डालकर सुबह दोपहर और शाम को पिने से तिल्ली का बढ़ना बंद हो जायेगा |

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