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वेरिकोस वेन्स के उपचार के लिए उपयोगी घरेलू उपाय !!

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सेब साइडर सिरका

सेब साइडर सिरका वैरिकोज वेन्स के लिए एक अद्भुत उपचार है। यह शरीर की सफाई करने वाला प्राकृतिक उत्‍पाद है और रक्त प्रवाह और रक्त परिसंचरण में सुधार करने में मदद करता है। जब प्राकृतिक रूप से रक्त बहना शुरू होता है तो वैरिकोज वेन्‍स में भारीपन और सूज़न काफी हद तक कम हो जाती है। समस्या होने पर सेब साइडर सिरके को लगाकर उस हिस्से की मालिश करें। इस उपाय को नियमित रूप से रात को बिस्तर पर जाने से पहले और अगले सुबह फिर से करें। कुछ दिन ऐसा करने से कुछ ही महीनों में वैरिकोज वेन्स का आकार कम होने लगता है। या फिर एक गिलासा पानी में दो चम्‍मच सेब साइडर सिरके को मिलाकर पिएं। अच्‍छे परिणाम पाने के लिए इस मिश्रण का एक महीने में दिन में दो बार सेवन करें।

लाल शिमला मिर्च

लाल शिमला मिर्च को वैरिकोज वेन्स के इलाज लिए एक चमत्कार की तरह माना जाता है। विटामिन सी और बायोफ्लेवोनॉयड्स का समृद्ध स्रोत होने के कारण यह रक्त परिसंचरण को बढ़ाने और संकुलित और सूजी हुई नसों के दर्द को आसान बनाता है। गर्म पानी में एक चम्‍मच लाल शिमला मिर्च के पाउडर को मिलाकर, इस मिश्रण का एक से दो महीने के लिए दिन में तीन बार सेवन करें।

जैतून का तेल

वैरिकोज वेन्स के इलाज के लिए रक्त परिसंचरण को बढ़ाना आवश्यक होता है। जैतून के तेल की मालिश से रक्त परिसंचरण को बढ़ाने में मदद मिलती है, इससे दर्द और सूज़न  कम होता है। जैतून के तेल और विटामिन ई तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर उसे थोड़ा सा गर्म कर लें। इस गर्म तेल से नसों की मालिश कई मिनट तक एक से दो महीने के लिए करें।

लहसुन

लहसुन, सूज़न  और वैरिकोस वेन्स के लक्षणों को कम करने के लिए एक उत्कृष्ट जड़ी बूटी है। यह भी रक्त वाहिकाओं में हानिकारक विषाक्त पदार्थों को निकालने और रक्त परिसंचरण में सुधार करने में मदद करती है। छह लहसुन की कली लेकर उसे एक साफ जार में डाल लें। तीन संतरे का रस लेकर उसे जार में मिलाएं। फिर इसमें जैतून के तेल की मिलायें। इस मिश्रण को 12 घंटे के लिए रख दें। फिर इस मिश्रण से कुछ बूंदों को हाथों पर लेकर 15 मिनट के लिए सूज़न  वाली नसों पर मालिश करें। इस पर सूती कपड़ा लपेट कर रातभर के लिए छोड़ दें। इस उपाय को कुछ महीनों के लिए नियमित रूप से दोहाराये। इसके अलावा अपने आहार में ताजे लहसुन को शामिल करें।

बुचर ब्रूम

बुचर ब्रूम वैरिकोज वेन्‍स की असुविधा से राहत देने में बहुत ही उपयोगी होता है। इस जड़ी बूटी में रुसोगेनिन्स नामक गुण सूज़न  को कम करने में मदद करता है और एंटी-इफ्लेमेंटरी और एंटी-इलास्‍टेज गुण नसों की बाधा को कम करता है। इसके लिए बुचर ब्रूम की दैनिक खुराक को 100 मिलीग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार लें। जड़ों और पौधों के बीज से बना बुचर ब्रूम की खुराक में कैल्शियम, क्रोमियम, मैग्नीशियम, मैंगनीज, पोटेशियम, सेलेनियम, सिलिकॉन और जिंक के साथ विटामिन ‘बी’ और ‘सी’ है। यह पोषक तत्‍वों को मजबूत बनाने और नसों की सूज़न  को कम करने के साथ ही पैरों के रक्‍त प्रवाह में सुधार करने में मदद करते हैं। लेकिन उच्च रक्तचाप वाले लोग इस जड़ी-बूटी के सेवन से पहले चिकित्‍सक से परामर्श अवश्‍य ले लें।

अखरोट

अखरोट रक्त वाहिकाओं को मजबूत बनाने के लिए बहुत ही प्रभावी जड़ी-बूटी है, इसलिए यह वैरिकोज वेन्स के लक्षणों को आसानी से कम कर सकती है। इसमें एस्ट्रिंजेंट के अलावा गल्लिक एसिड और कई प्रकार के आवश्‍यक तेल भी होते हैं जो सूज़न  के साथ-साथ दर्द को कम करने में मदद करते हैं। अखरोट के तेल में एक साफ कपड़े को डूबाकर प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं । ऐसा एक या दो महीने के लिए दिन में दो से तीन बार करें।

अजमोद

अजमोद विटामिन सी से समृद्ध एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो सेल की मरम्मत और कोलेजन के उत्‍पादन को प्रोत्साहित करता है। साथ ही इसमें शामिल रुटीन नामक तत्व, केशिकाओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसलिए वैरिकोज वेन्स के लक्षणों को कम करने में बहुत उपयोगी होता है। एक मुठ्ठी ताजा अजमोद लेकर उसे एक कप पानी में पांच मिनट के लिए उबाल लें। फिर इसे मिश्रण को ठंडा होने के लिए रख दें। फिर इस मिश्रण में गुलाब और गेंदे की तेल की एक-एक बूंद मिला लें। अब इस मिश्रण को कुछ देर के लिए फ्रिज में रख दें। इस मिश्रण को कॉटन पर लगाकर प्रभावित क्षेत्र पर लगायें। अच्छे परिणाम पाने के लिए इस उपाय को कुछ महीनों तक करें।

अर्जुन की छाल

अर्जुन की छाल वेरीकोस वेन्स के लिए बहुत बढ़िया दवा हैं, अगर आप इस समस्या से परेशान हैं तो आप रात को सोते समय गाय के दूध में या साधारण पानी में अर्जुन की छाल को चाय की तरह उबालें और आधा रहने पर इसको छान कर पी लें।

अंगूर की पत्तियां

अंगूर की पत्तियों में अच्छी मात्रा में फ्लैवेनॉइड होते हैं। इन पत्तियों में एंटी-इंफ्लेमेंट्री, और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो कि इस बीमारी के उपचार के लिए काफी उपयोगी होता है। इसे इस्तेमाल करने के लिए अंगूर की पत्तियों को 15 मिनट पानी में उबाले। इस गर्म पानी को बाल्टी में डालकर पैरों को इनमें डुबोएं। फिर पैरों को ठंडे पानी में डाल कर रखें। पैरों को सुखाकर कैस्टर ऑयल से मसाज करें।

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