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विटामिन B-12 की कमी है तो जरूर खाएं ये आहार

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सेहतमंद रहने के लिए विटामिन बी 12 भी बेहद जरूरी होता है। यह आपके हृदय को स्‍वस्‍थ रखने के साथ आपकी त्‍वचा व बालों के लिए भी फायदेमंद होता है। शरीर को स्‍वस्‍थ रखने के लिए संतुलित आहार व सभी जरूरी पोषक तत्‍वों का होना जरूरी है। विटामिन बी 12  कैंसर जैसी घातक बीमारियों के खतरे को कम करने में भी मददगार है। कई लोग शरीर में विटामिन बी 12 की पूर्ति के लिए कई सप्‍लीमेंट्स भी लेते हैं। आइए आज हम आपको बताते हैं कि आप किन-किन खाद्य पदार्थों के सेवन शरीर में विटामिन बी 12 की कमी को पूरा किया जा सकता है। कई शाकाहारी व मांसाहारी खाद्य पदार्थ हैं जिनमें विटामिन बी 12 भरपूर मात्रा में पाया जाता है

दूध और दही

100 ग्राम फैट रहित दही में (10% DV) विटामिन B12 व 15 प्रतिशत डेली वैल्यू (DV, रोजाना आवश्यक मात्रा) प्रति कप होता है।  है। दही में बी-कॉम्‍पलेक्‍स विटामिन्‍स जैसे विटामिन बी2 और बी1 तथा बी12 भी होते हैं। वहीं 100 ग्राम कम वसा वाले दूध में 0.46μg (8% DV) तथा 19 प्रतिशत डेली वैल्यू (DV, रोजाना आवश्यक मात्रा) प्रति कप होता शाकाहारी लोगों के लिये आपके लिये दूध एक अच्‍छा विकल्प है। इसके अलावा सोया प्रोडक्‍ट सोया बीन, सोया दूध आदि में भी विटामिन B12 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

चीज भी है एक अच्छा विकल्प (CHEESE)

पनीर में विटामिन बी 12 की मात्रा इसके प्रकार और किस्म पर निर्भर करती है। स्विस पनीर सबसे ज्यादा विटामिन B12 प्रदान करता है। 100 ग्राम (56% DV) स्विस चीज़ में 3.34μg होता है। कॉटेज चीज़ में भी विटामिन बी12 की मात्रा काफी अधिक होती है।

खमीर (YEAST EXTRACT SPREADS) में विटामिन बी12

ब्रिटेन और यूरोप में खमीर के सेवन का काफी प्रचलन है, और इसे अब अमेरिका में भी पसंद किया जाने लगा है। खमीर शाकाहारियों के लिये विटामिन बी12 का एक बेहतरीन श्रोत है। इस के 100 ग्राम में 0.5μg (8% DV) विटामिन बी12 होता है।

मांसाहारियों के लिये विटामिन बी12 के बेहतरीन श्रोत

शैलफिश (Shellfish) के 100 ग्राम में विटामिन B12 की 98.9μg (1648% DV) मात्रा होती है। 100 ग्राम लीवर (बीफ) में 83.1μg (1386% DV) विटामिन B12 होता है। वहीं टोफू मछली (Silken Tofu) के 100 ग्राम में 2.4μg (40% DV)। रेड मीट (बीफ) के 100 ग्राम में 6.0μg (100% DV) होता है। अंडे या चिकन के 100 ग्राम में 2.0μg (33% DV) होता है।

ये पौधा पूरी करेगा विटामिन B12 की कमी

गार्डेन क्रेस को भारत में चन्द्रशूर के नाम से जानते हैं. यह एक आयुर्वेदिक औषधि मानी जाती है. यह सरसों की प्रजाति से जुड़ी हुई है और इसका इस्तेमाल सूप, सैंडविच व सलाद बनाने में होता है. शाकाहारी लोगों में सबसे कम मात्रा में विटामिन बी12 पाया जाता है. क्योंकि इस विटामिन क सोर्स सिर्फ मांस, मछली और दूध से बने प्रोडक्ट्स ही हैं. लेकिन वैज्ञानिकों ने सूप और सैंडविच बनाने में इस्तेमाल होने वाली एक आयुर्वेदिक वनस्पति (पौधे) से विटामिन बी12 का स्तर बढ़ाने के तरीके को खोज निकाला है. 

अब तक ऐसा माना गया है कि पौधों में विटामिन बी12 नहीं पाया जाता. इसी वजह से शाकाहारी लोगों में विटामिन बी12 की कमी होती रही है. इस विटामिन को विज्ञान की भाषा में कोबलामीन कहा जाता है. 

केंट विश्वविद्यालय के मार्टिन वारेन की अगुवाई में रिसर्चर्स ने पाया है कि समान्य गार्डेन क्रेस (चन्द्रशूर), जिसे पीपर घास के नाम से भी जानते हैं, कोबलामीन बना सकती है. यह विटामिन इस पौधे की पत्तियों में मौजूद है. 

गार्डेन क्रेस को भारत में चन्द्रशूर के नाम से जानते हैं. यह एक आयुर्वेदिक औषधि मानी जाती है. यह सरसों की प्रजाति से जुड़ी हुई है और इसका इस्तेमाल सूप, सैंडविच व सलाद बनाने में होता है.

शोधकर्ताओं ने कहा, “यह पाया गया है कि कुछ पौधे विटामिन बी12 को अवशोषित करने में समर्थ हैं, ऐसे में वे भारत जैसे देश में आहार सीमाओं यानी शाकाहारी लोगों में इस विटामिन की कमी से निटपने में सहायता कर सकते हैं. इस कदम से विटामिन बी12 की कमी को पूरा किया जा सकता है. 

चंद्रशूर के जबरदस्त फायदे

आपने चंद्रशूर (chandrachur) के पौधे को बाग-बगीचे आदि में जरूर देखा होगा, लेकिन कभी गौर नहीं किया होगा। चंद्रशूर को हलीम भी कहा जाात है। आयुर्वेद के अनुसार, बेकार-सा दिखाई देने वाला चंद्रशूर (हलीम) का पौधा एक बहुत ही उत्तम औषधी है, और चंद्रशूर (हलीम) के फायदे से रोगों का इलाज किया जा सकता है।। आयुर्वेदिक किताबों में चंद्रशूर के सेवन या उपयोग से संबंधित अनेक उत्तम बातें बताई गई हैं।

चन्द्रशूर क्या है? (What is Chandrashur in Hindi?)

चंद्रशूर (हलीम) का पौधा 15-45 सेमी ऊँचा सीधा, चिकना और वर्षायु होता है। इसका तना सीधा, अरोमिल होता है। इसके पत्ते विभिन्न आकार के होते हैं। इसके फूल छोटे, सफेद रंग के, 2 मिमी लम्बे और द्वि-लिंगी होते हैं। चंद्रशूर (chandrashoor) का फल 4 मिमी व्यास का चपटा होता है। प्रत्येक फल में 1-2, छोटे, लाल रंग के बीज होते हैं। हलीम के बीजों को जल में भिगोने से लुआबदार हो जाते हैं। बीजमज्जा सफेद और बीजकवच चिकना होता है। इसका पुष्पकाल एवं फलकाल दिसम्बर से अपैल तक होता है।

चन्द्रसूर का प्रयोग प्राचीन-काल से चिकित्सा के रूप में किया जा रहा है। यह काम क्षमता और स्तनों में दूध को बढ़ाने में मदद करता है। इसका प्रसूतावस्था में विशेष प्रयोग किया जाता है। यहां चंद्रशूर से होने वाले सभी फायदे के बारे को बहुत ही आसान शब्दों (chamsur in hindi) में लिखा गया है ताकि आप चंद्रशूर से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं।

चन्द्रशूर का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Chandrachur?)

चंद्रशूर का इस तरह इस्तेमाल किया जाना चाहिएः-

हलीम के बीज का चूर्ण – 1-3 ग्राम

यहां चंद्रशूर से होने वाले सभी फायदे के बारे को बहुत ही आसान शब्दों (chamsur in hindi) में लिखा गया है ताकि आप चंद्रशूर से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं, लेकिन औषधि के रूप में चंद्रशूर का प्रयोग करने के लिए चिकित्सक की सलाह जरूर लें।

चन्द्रशूर के फायदे और उपयोग (Chandrashur Benefits and Uses in Hindi)

चंद्रशूर (chandrashoor) के औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं विधियां ये हैंः-

हिचकी की परेशानी में चंद्रशूर के फायदे (Benefits of Chandrashur in Hiccup Problem in Hindi)

10 ग्राम चन्द्रसूर (हलीम) के बीज को 8 गुने जल में पकाएं। इसे गाढ़ा हो जाने पर कपड़े से छान लें। इस जल को 50 मिली की मात्रा में बार-बार पीने से हिचकी की परेशानी ठीक होती है।

सर्दी में चंद्रशूर के फायदे (Chandrashur Benefits to Treat Cold in Hindi)

चन्द्रसूर (हलीम) के बीजों का काढ़ा बनाएं। इसे 10-15 मिली मात्रा में पिलाने से सर्दी की वजह से होने वाली परेशानियों में लाभ होता है।

चंद्रशूर के औषधीय गुण से सूखी खांसी का इलाज (Chandrashur Uses in Fighting with Cough Hindi)

चंद्रशूर की टहनियों का काढ़ा बना लें। इसे 5-10 मिली मात्रा में पिलाने से सूखी खांसी में लाभ होता है। बेहतर परिणाम के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर परामर्श लें।

शरीर के दर्द में चंद्रशूर का सेवन लाभदायक (Chandrashur Uses in Relief from Body Pain in Hindi)

चन्द्रसूर को पानी में पीसकर पीने तथा लेप करने से खून से संबंधित विकारों तथा शरीर के दर्द से आराम मिलता है।

चन्द्रसूर (हलीम) के 50 ग्राम बीजों को 200 मिली तिल के तेल में पका लें। तेल को छानकर लगाने से शरीर का दर्द ठीक होता है।

दस्त में चंद्रशूर के सेवन से लाभ (Uses of  to Stop Diarrhea in Hindi)

आप हलीम के बीज के फायदे दस्त में भी ले सकते हैं। 1 चम्मच चन्द्रसूर (chandrashoor) की बीज के रस में 1 गिलास नारियल पानी मिला लें। इसे पीने से दस्त और पेचिश में लाभ होता है।

1-2 ग्राम चंद्रशूर की जड़ के चूर्ण का सेवन करने से दस्त की परेशानी ठीक होती है।

पेट दर्द में चंद्रशूर के सेवन से लाभ (Chandrachur Benefits in Getting Relief from Abdominal Pain in Hindi)

चन्द्रसूर की बीजों का काढ़ा बना लें। इसे 10-15 मिली मात्रा में पीने से पेट के दर्द से राहत मिलती है।

कब्ज़ में चम्सुर के फायदे (Chandrachur Benefits to Get Relief from Constipation in Hindi)

कब्ज की समस्या में आप चम्सुर का उपयोग कर सकते है, क्योंकि इसमें पाए जाने वाला कफ जैसा पदार्थ लैक्सटिव के गुण वाला होता है, जो की कब्ज को दूर करने में मदद करता है।

आम अतिसार में चम्सुर के फायदे ( Chandrachur Beneficial in Diarrhoea in Hindi)

आम अतिसार में भी चम्सुर का उपयोग कर सकते है, ये अतिसार के लक्षणों को कम करता है। इसके लिए आप इसके बीजों का पेस्ट बनाकर सेवन कर सकते हैं।

धातुपुष्टि में चम्सुर के फायदे  (Chandrachur Beneficial in Dhatupushti in Hindi)

यदि आप कमजोरी महसूस करते है, और साथ ही आपका वजन भी आपकी लम्बाई के अनुरूप नहीं है तो आप चम्सुर का उपयोग कर सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार ये बल और पुष्टिवर्धक होता है।  

पेट के रोग में चम्सुर के फायदे (Benefits of Chandrachur in Abdominal Diseases in Hindi)

उदर संबंधी रोग में चम्सुर का उपयोग फायदेमंद होता है, क्योंकि चम्सुर में गैस्ट्रोप्रोटेक्टिव की क्रियाशीलता पायी जाती है। जिस कारण ये उदर संबंधी विकारों को दूर करने में सहायता करता है। 

कमर दर्द और सायटिका में चम्सुर के फायदे (Chandrachur Beneficial in Back Pain and Sciatica Pain in Hindi)

कमर दर्द और सायटिका में चम्सुर का सेवन फायदेमंद हो सकता हैं, क्योंकि इसमें एंटीइंफ्लामेट्री गुण होता है। आयुर्वेद के अनुसार, गर्म तासीर होने ये वात दोष और सूजन को कम करने में मदद करता है। 

चंद्रशूर के औषधीय गुण से खूनी बवासीर का इलाज (Benefits of Chandrachur in Piles Treatment in Hindi)

हलीम के बीज के फायदे से खूनी बवासीर के इलाज में मदद मिलती है। 5 मिली चन्द्रसूर के बीज के रस लें। इसे पानी या नारियल का पानी मिलाकर पीने से रक्तार्श (खूनी बवासीर) में लाभ होता है।

लीवर रोग में चंद्रशूर के सेवन से लाभ (Chandrachur Benefits to Treat Lever Disease in Hindi)

हलीम के बीज के फायदे से लिवर से जुड़े रोगों में भी लाभ मिलता है। 10-15 मिली चंद्रसूर की बीज का काढ़ा पीने से लिवर संबंधित विकारों में लाभ होता है।

सिफलिस (उपदंश) रोग में चंद्रशूर के सेवन से फायदा (Chandrachur Benefits to Treat Syphilis in Hindi)

चन्द्रसूर पंचांग का काढ़ा बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पिलाने से उपदंश (सिफलिस) रोग में लाभ होता है।

चंद्रशूर के औषधीय गुणों से स्तनों में दूध की वृद्धि (Chandrachur Benefits in Increasing Breast Milk in Hindi)

स्तनपान कराने वाली किसी महिला को दूध की कमी हो रही है तो हलीम के बीज के फायदे ले सकती हैं। चंद्रशूर के बीज से बने 10-20 मिली काढ़े में एक चम्मच शहद मिला लें। इसे पीने से स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।

5-10 ग्राम बीजों को 100 मिली दूध में खूब गर्म कर लें। इसे पिलाने से स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।

चन्द्रसूर की बीजों को घी में भूनकर शर्करा मिला लें। इसका सेवन करने से स्तनों में दूध बढ़ता है।

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शारीरिक कमजोरी होने पर चंद्रशूर के फायदे (Benefits of Chandrashur to Cure Body Weakness in Hindi)

चन्द्रसूर (chandrashoor) के बीजों को घी में भूनकर शर्करा मिला लें। इसका सेवन करने से प्रसव के बाद होने वाली शारीरिक कमजोरी ठीक होती है।

मोच आने पर चंद्रशूर से लाभ (Benefits of Chandrashur in Sprain Problem in Hindi)

चन्द्रसूर (chandrashoor) के बीजों को पीसकर लगाने से मोच में बहुत लाभ होता है।

चंद्रशूर के औषधीय गुण से गठिया का इलाज (Uses of Chandrashur in Arthritis Treatment in Hindi)

चन्द्रसूर के बीजों तो तिल के तेल में पका लें। इसे लगाने से वातरक्त तथा गठिया की बीमारी में लाभ होता है।

सूजन की समस्या में चंद्रशूर से लाभ (Benefits of Chandrachur in Reducing Swelling in Hindi)

चन्द्रसूर के बीजों को पीसकर लगाने से शरीर के सभी अंगों की सूजन ठीक हो जाती है।

चंद्रसूर के बीजों को कूट लें। इसमें नीबू का रस मिलाकर लगाने से सूजन कम हो जाती है।

चन्द्रशूर के उपयोगी भाग (Beneficial Part of Chandrashur in Hindi)

आप चंद्रशूर के इन भागों का उपयोग कर सकते हैंः-

हलीम (चंद्रशूर) के बीज

जड़

पत्ते

पंचांग

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