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विटामिन D की कमी को दूर करने के उपाय

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विटामिन डी (Vitamin D) की खुराक वाले आहार सिर्फ आपकी हड्डियों के लिए ही फायदेमंद नहीं हैं, बल्कि यह कोलन (बड़ी आंत) कैंसर के खतरे को भी घटाता है. ऐसे प्रतिभागी, जिनमें विटामिन डी की खुराक (Vitamin D Rich Food) हड्डियों (Vitamin D For Bones) के स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त थी, उनकी तुलना में विटामिन डी की कमी (Vitamin D Deficiency) वालों में कोलन कैंसर का खतरा 31 फीसदी रहा.

विटामिन डी की मात्रा हड्डियों की सेहत के लिए फायदेमंद (Vitamin D For Bones) मानी जाती है. अमेरिकन कैंसर सोसाइटी में इपिडिमिओलॉजिस्ट मर्जी ए.मैक्कुलो ने कहा, “वर्तमान में स्वास्थ्य एजेंसियां कोलन कैंसर (Vitamin D and Colon Cancer) की रोकथाम के लिए विटामिन डी की सिफारिश नहीं करती हैं.” विटामिन डी से भरपूर आहार से बच्चों में कोलेस्ट्रॉल स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है. इससे दिल संबंधी बीमारियों से जुड़े दूसरे जोखिम कारकों पर भी लाभदायक असर पड़ता है.

शोध में कहा गया है कि जिन बच्चों में विटामिन D का स्तर (Vitamin D Level) 80 एनएमओएल/एल (प्रति लीटर नैनोमोल) से ज्यादा होता है, उनमें 50 एनएमओएल/लीटर से कम विटामिन स्तर (Vitamin D Level in Kids) वाले बच्चों की तुलना में लोअर लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (एलडीएल) या बुरा कोलेस्ट्रॉल स्तर होता है. तो आप यह समझ ही चुके हैं कि विटामिन डी हमारे शरीर के लिए कितना जरूरी है और ज्यादातर लोग विटामिन की कमी से भी जूझ रहे हैं. तो आज ही अपने आहार (Vitamin D-rich Foods) में करें बदलावा और अपनाएं ऐसी डाइट जो हो विटामिन डी से भरपूर. विटामिन D डेफिशियेंसी डिप्रेशन भी पैदा कर सकती है.

वहीं भारत में हुए एक शोध में इस बात का पता चला कि उत्तर भारत में रहने वाली तक़रीबन 69 फ़ीसदी महिलाओं में विटामिन-डी की कमी है. एम्स, सफदरजंग और फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों ने मिलकर ये शोध किया है. विटामिन डी की कमी आपके शरीर में कई तरह से दिख सकती है. तो जानिए कि कैसे पता चलेगा कि आपके शरीर में विटामिन डी की कमी तो नहीं है. यह आप कुछ लक्षणों से समझ सकते हैं. जैसे कि –

विटामिन डी की कमी के लक्षण के साथ जानें इसके मुख्य कारण

दरअसल, विटामिन डी हॉर्मोन की कमी और उससे होने वाली समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर शहरों में। वजह, अब लोग धूप में ज्यादा नहीं निकलते। इससे शरीर में विटामिन डी की कमी और उससे जुड़ी समस्याएं हो जाती हैं। दिक्कत यह है कि ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं होती। अगर विटामिन डी की डोज नियमित रूप से ली जाए तो आसानी से दर्द से राहत मिल सकती है।

विटामिन डी क्यों जरूरी ? 

हड्डियों, मसल्स और लिगामेंट्स की मजबूती के लिए 
शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए 
नर्व्स और मसल्स के कॉर्डिनेशन को कंट्रोल करने के लिए 
सूजन और इन्फेक्शन से बचाने के लिए 
किडनी, लंग्स, लिवर और हार्ट की बीमारियों की आशंका कम करने के लिए 
कैंसर की रोकने में मदद के लिए 

कमी से होने वालीं दिक्कतें 

हड्डियों का कमजोर और खोखला होना 
जोड़ों और मसल्स का कमजोर होना 
कमर और शरीर के निचले हिस्सों में दर्द होना खासकर पिंडलियों में 
हड्डियों से कट की आवाज आना 
इम्युनिटी कम होना
बाल झड़ना 
बहुत थकान और सुस्ती रहना 
बेचैन और तुनकमिजाज रहना
इनफर्टिलिटी का बढ़ना 
पीरियड्स का अनियमित होना 
ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का खोखला होना) और ऑस्टियोमलेशिया (हड्डियों का कमजोर होना) जैसी बीमारियां 
बार-बार फ्रेक्चर होना 
पैरों में सूजन
लंबे वक्त तक खड़े रहने में दिक्कत, 
कमज़ोर मांस-पेशियां

कितना विटामिन डी चाहिए ?

किसी भी सेहतमंद शख्स में विटामिन डी का लेवल 50 ng/mL या इससे ज्यादा होना चाहिए। हालांकि 20 से 50 ng/mL के बीच नॉर्मल रेंज है लेकिन डॉक्टर 50 को ही बेहतर मानते हैं। अगर लेवल 25 से कम है तो डॉक्टर की सलाह से विटामिन डी सप्लिमेंट जरूर लेना चाहिए।

टेस्ट और इलाज:

अगर हड्डियों या मसल्स में दर्द रहता है तो ‘ 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन डी ‘ ब्लड टेस्ट कराएं। इसे ‘ विटामिन डी डिफिसिएंशी टेस्ट ‘ भी कहते हैं। अगर शरीर में दर्द नहीं है तो भी यह टेस्ट करा सकते हैं। अगर लेवल काफी कम निकलता है तो छह महीने या साल भर बाद दोबारा करा सकते हैं। 

कीमत: करीब 1200-1300 रुपये 

इलाज:विटामिन डी की कमी पूरी करने के लिए बच्चों को एक बार में 6 लाख IU (इंटरनैशनल यूनिट) दी जाती हैं। यह कई बार इंजेक्शन के जरिए भी दिया जाता है। फिर नॉर्मल रेंज आने तक एक महीने हर हफ्ते 60,000 यूनिट और फिर हर महीने 60,000 यूनिट दी जाती है, जोकि ओरली दी जाती है। बड़ों में एक बार में 12 लाख IU (इंटरनैशनल यूनिट) दी जाती हैं। फिर पहले तीन महीने हर हफ्ते 60,000 यूनिट और फिर हर महीने एक बार 60,000 यूनिट का सैशे दिया जाता है।अगर धूप में नहीं निकलते हैं तो 25-30 साल की उम्र के बाद हर महीने एक सैशे लेना चाहिए। 

नोट: वैसे, ज्यादातर एक्सपर्ट मानते हैं कि यह टेस्ट कराए बिना और डॉक्टर की सलाह के बिना भी हर किसी को विटामिन डी की डोज लेनी चाहिए क्योंकि इसकी पूर्ति खाने से नहीं हो पाती और ज्यादातर लोगों में इसकी कमी होती है। महीने में एक बार सैशे लेने का नुकसान नहीं है। एक सैशे से महीने भर के विटामिन डी का कोटा पूरा हो जाता है। इसकी कीमत भी 25-30 रुपये तक ही होती है यानी महंगा भी नहीं है।

जहां तक बच्चों की बात है तो 50 किलो से ज्यादा वजन के बच्चे को अडल्ट के मुताबिक ही डोज दी जा सकती है लेकिन छोटे बच्चों को डॉक्टर की सलाह से डोज दें। इंटरनैशनल गाइडलाइंस के मुताबिक बच्चे को जन्म से लेकर 12 महीने का होने तक रोजाना 4000 यूनिट दी जानी चाहिए। इसके लिए मां को विटामिन डी लेने की सलाह दी जाती है ताकि दूध के जरिए यह बच्चे तक में पहुंच सके।

अगर मां बच्चे को दूध नहीं पिलाती है तो डॉक्टर बच्चे के लिए सिरप लिखते हैं। उम्र बढ़ने पर बच्चे में विटामिन डी की जरूरत बढ़ जाती है। वैसे एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चों को रोजाना एक घंटे धूप में खेलने के प्रेरित करना चाहिए। इस दौरान बच्चे का शरीर कुछ खुला हो ताकि उसे पर्याप्त विटामिन डी मिल सके। अगर फिर भी बच्चा धूप में ज्यादा नहीं खेलता तो उसे विटामिन डी दे सकते हैं लेकिन पहले डॉक्टर से पूछ लें या फिर टेस्ट करा कर लेवल चेक कर लें। 

कब लें खुराक ?

विटामिन डी की खुराक यूं तो खाली या भरे पेट कभी भी ले सकते हैं लेकिन फिर भी इसे खाने के बाद लेना बेहतर है।

ज्यादा हो तो खतरनाक

वैसे, विटामिन डी अगर बहुत ज्यादा हो तो बहुत खतरनाक हो सकता है। ज्यादा तब माना जाता है, जब शरीर में लेवल 800-900 नैनोग्राम/मिली तक पहुंच जाए। ऐसा होने पर किडनी फंक्शन से लेकर मेटाबॉलिजम तक पर असर पड़ता है। हालांकि विटामिन डी बहुत ही कम मामलों में इस लेवल तक जा पाता है। कई बार लोगों को लगता है कि विटामिन डी ज्यादा लेने से नुकसान हो सकता है। मुंह से लिए जानेवाले विटामिन डी का कोई नुकसान नहीं है। यह एक्स्ट्रा विटामिन डी शरीर से पॉटी या यूरीन के रास्ते निकल जाता है। लेकिन इंजेक्शन से लिया जानेवाला सारा विटामिन डी शरीर में ही रह जाता है इसीलिए विटामिन डी के सैशे, टैब्लेट या कैप्लूस ही लेने की सलाह दी जाती है। 

1. कैसे मिलेगा कुदरती तरीके से विटामिन डी 

विटामिन डी का सबसे बढ़िया सोर्स सूरज की रोशनी है। विटामिन डी पाने के लिए आप धूप में बैठें। खासियत यह है कि एक बार शरीर में जाने के बाद विटामिन डी लिवर में स्टोर हो जाता है और फिर धीरे-धीरे लिवर जरूरत के मुताबिक इसे ब्लड में रिलीज करता रहता है। ऐसे में रोजाना धूप में बैठना या निकलना भी जरूरी नहीं है। अगर आप हफ्ते में 1-2 दिन या महीने में कुल 4-5 दिन और साल भर में औसतन 45-50 दिन आप 45 मिनट के लिए धूप में निकलते हैं या बैठते हैं तो काफी हद तक विटामिन डी की खुराक पूरी हो जाती है।

लेकिन ध्यान रखें कि इस दौरान शरीर का कम-से-कम 80-85 फीसदी हिस्सा खुला हो। वैसे, जब सूरज की किरणें बहुत तेज हों, तब विटामिन डी भी ज्यादा मिलता है लेकिन उस वक्त अल्ट्रा-वॉयलेट किरणों से शरीर को होनेवाले संभावित नुकसान को ध्यान में रखते हुए सुबह या शाम की धूप में बैठना ही बेहतर है। यूं भी दिन की धूप में बैठना प्रैक्टिकली मुमकिन नहीं है। ऐसे में गर्मियों में सुबह 8-10 बजे और शाम को 4-6 बजे और सर्दियों में सुबह 9-12 बजे और शाम को 3-5 बजे के बीच का समय चुनें। अगर शरीर को खुला वैसे बेहतर यह है कि आप खुद को किसी नियम में बांधने की बजाय सोच लें कि जब भी मुमकिन होगा, धूप में निकलेंगे या बैठेंगे तो शरीर को विटामिन डी मिलता रहेगा। 

नोट: कई बार जन्म से ही विटामिन डी की कमी होती है। इस बीमारी को ‘ रिकेट्स ‘ कहते हैं और इन बच्चों के पैर टेढ़े हो जाते हैं। हालांकि यह बीमारी अब काफी कम होती है। इसके अलावा अगर किडनी विटामिन डी को ऐक्टिव फॉर्म में नहीं बदलती तो भी विटामिन डी की कमी हो सकती है। लेकिन ऐसे मामले भी चुनींदा ही होते हैं। 

2. डाइट – विटामिन डी फैट में घुलनेवाला विटामिन है। यह शरीर में अच्छी तरह जज्ब हो, इसके लिए हमें हेल्दी फैट जैसे कि ड्राई-फ्रूट्स, कम फैट वाले डेयरी प्रॉडक्ट्स, चीज़ आदि जरूर लेने चाहिए। – मछली, मशरूम, अंडे और मीट में विटामिन डी पाया जाता है, लेकिन यह इतना नहीं होता कि आपके शरीर की जरूरत पूरी कर सके। – दूध और दूध से बनी चीजें जैसे कि पनीर, दही, योगर्ट आदि में कैल्शियम काफी होता है। रोजाना कम-से-कम एक गिलास दूध (लगभग 230 ml कैल्शियम), एक कटोरी दही (करीब 250 mg) और हफ्ते में 250 ग्राम पनीर (करीब 200 mg कैल्शियम) जरूर खाना चाहिए। – हरी सब्जियों जैसे कि मशरूम, पालक, बीन्स, ब्रोकली, चुकंदर, कमल ककड़ी आदि और केला, संतरा, शहतूत, सिंघाड़ा आदि फलों में भी कैल्शियम पाया जाता है। – ड्राई-फ्रूट्स (बादाम, किशमिश, खजूर, अंजीर, अखरोट आदि), तिल और अंडे भी खाना चाहिए क्योंकि इनमें काफी कैल्शियम होता है। राजमा, मूंगफली, तिल, टूना मछली खाना भी फायदेमंद हैं। 

3. एक्सरसाइज है जरूरी 
रोजाना कम-से-कम 30 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें। एक्सरसाइज शरीर को फिट रखने और उसके सही तरीके से काम करने के लिए बेहद जरूरी है। यहां तक एक्सरसाइज ब्लड में मौजूद विटामिन डी और कैल्शियम को जज्ब करने में भी मदद करती है। अगर आप रोजाना 1 घंटा एक्सरसाइज करते हैं तो बाकी 23 घंटे फिट और खुशहाल रह सकते हैं। अगर यह एक घंटा अपने लिए नहीं निकाल सकते तो फिर 24 घंटे हेल्थ को लेकर परेशान रहेंगे। एक्सरसाइज में कार्डियोवसकुलर, स्ट्रेंथनिंग और स्ट्रेचिंग को मिलाकर करें। कार्ड्रियो के लिए साइकलिंग, अरोबिक्स, स्वीमिंग या डांस, स्ट्रेंथनिंग के लिए वेट लिफ्टिंग और स्ट्रेचिंग के लिए योग करें। अगर वॉक करना चाहते हैं तो कम-से-कम 45 मिनट ब्रिस्क वॉक यानी तेज-तेज चलें।

सनस्क्रीन को लेकर कन्फ्यूजन 
आजकल लोग घर से बाहर निकलते हुए सनस्क्रीन लगाते हैं। सनस्क्रीन सूरज की किरणों को ब्लॉक करता है। इससे शरीर को धूप नहीं मिल पाती। कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि सनस्क्रीन न लगाएं जबकि कुछ कहते हैं कि सनस्क्रीन न लगाने से स्किन को नुकसान की आशंका भी बनी रहती है। ऐसे में बेहतर है कि सनस्क्रीन लगाना जारी रखें लेकिन विटामिन डी पाने के लिए अलग से धूप में बैठने का समय तय कर लें। 

आयुर्वेद में इलाज –

रोजाना एक चम्मच मेथी दाना भिगोकर खाएं। मेथी दर्दनिवारक है और हड्डियों के लिए अच्छी है।
गुनगुने दूध में एक चम्मच हल्दी डालकर पिएं। – रोजाना एक चम्मच बादाम का तेल (बादाम रोगन) दूध में डालकर पिएं। 
विटामिन डी के सप्लिमेंट ले सकते हैं।

अपने आहार में शामिल करें विटामिन डी से भरपूर ये चीजें —

1. अंडे (Eggs)
2. दही (Yogurt)
3. दूध (Milk)
4. टोफू (Tofu)
5. मशरूम (Mushrooms)
6. ऑरेंज जूस (Orange Juice)
7. कोलार्ड (Collards)
8. ओकरा (Okra)
9. काएले (Kale)
10. पालक (Spinach) 
11. सार्डिन मछली (Sardines) 
12. सैल्मन (Salmon)
13. पनीर, चीज (Cheese)
14. सोयाबीन (Soybeans)

ये चीजें विटामिन डी से भरपूर होती हैं. तो इन्हें आहार में शमिल कर आप विटामिन डी की कमी को काफी हद तक दूर कर सकते हैं. इस बात का ध्यान रखें कि आहार संबंधी किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें. डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही डाइट में बदलाव करें.

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