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विटामिन डी की कमी के लक्षण के साथ जानें इसके मुख्य कारण

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बहुमंजिली इमारतों और घने होते जा रहे मोहल्लों के इस दौर में घर में धूप ठीक तरह से नहीं आने के कारण जहाँ लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है वहीं इससे घर में भी नमी बनी रहती है जिससे आपके महँगे पेंट इत्यादि खराब होते हैं। कुछ लोग तो घरों में चारों तरफ से इतने पर्दे आदि लगा देते हैं कि सूरज की पहली किरण कहीं उनके चेहरे पर पड़कर उनको नींद से जगा नहीं दे लेकिन वह यह नहीं जानते कि यह पहली किरण स्वास्थ्य के लिए कितनी जरूरी है।

आज बड़े हों या बच्चे, आप किसी का भी विटामिन डी की जाँच करा लीजिए वह काफी कम मात्रा में पाई जाती है और इसी के चलते थकान बनी रहना, मांसपेशियों का कमजोर होना या फिर अन्य स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें पैदा होती हैं। हमारे यहाँ एक और धारणा यह बन गयी है कि हम यदि धूप में निकलेंगे तो काले हो जाएंगे, सौंदर्य के प्रति इसी चिंता ने स्वास्थ्य को सर्वाधिक प्रभावित किया है। इसके अलावा हम पतले और छरहरे दिखने की चाह में सोशल मीडिया पर आयी किसी पोस्ट या अपनी मनमर्जी से अपना डाइट चार्ट प्लान कर लेते हैं जबकि जरूरत डाइटिशियन से मिलकर अपने स्वास्थ्य के मुताबिक डाइट चार्ट बनवाने की है। 

विटामिन डी हमारे शरीर को कई रोगों से निजात दिलाने में भी मदद करता है। लेकिन जब शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है तो यह व्यक्ति के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में यह बहुत जरूरी है कि लगातार इसके लक्षणों पर नज़र बनाए रखें ताकि इसकी कमी को पहचाना जा सके। आइए जानते हैं विटामिन डी की कमी होने के लक्षण क्या हैं और इसकी कमी हो जाने से स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है-

हाल के वर्षों में विटामिन डी की कमी (Vitamin D Deficiency) के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। शरीर में जब विटामिन डी की कमी के लक्षण (Vitamin D Deficiency Symptoms) कई तरह हो सकते हैं. विटामिन डी की कमी के लक्षण अगर पता हों तो इसका समय पर इलाज किया जा सकता है। वैसे तो आप नियमित तौर पर विटामिन डी का टेस्ट (Vitamin D Deficiency Test) कराकर भी विटामिन डी की कमी का पता लगा सकते हैं। हम यहां पर कुछ आसान से उपाय बता रहे हैं जो आपको विटामिन डी की कमी के बारे में बताते हैं. शरीर के इन संकेतों के माध्यम से आप विटामिन डी की कमी के लक्षणों को पहचान सकते हैं।

विटामिन डी की कमी के लक्षण 

जब शरीर में विटामिन डी की कमी होती है तो उसके लक्षण भी दिखाई देते हैं। शरीर में किसी भी चीज की कमी होती है तो उसके संकेत जरूर दिखाई देते हैं।अगर लंबे समय तक विटामिन डी की कमी शरीर में रह जाती है तो यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण भी बनती है। आइए जानते हैं विटामिन डी की कमी के मुख्य लक्षण…

कमजोरी व थकान

शरीर को ऊर्जा देने के लिए विटामिन डी जरूरी होता है. अगर आपको बार-बार थकान का अनुभव होता है तो यह विटामिन डी की कमी का लक्षण हो सकता है. अगर आपकी डेली लाइफ बेहतर है तब भी आपको थकान लगती है तो आपको विटामिन डी की कमी का टेस्ट कराना चाहिए.

त्वचा में रूखापन 

जब शरीर में विटामिन डी का लेवल कम होता है तो त्वचा में रूखापन बढ़ने लगता है. शरीर को विटामिन डी सिर्फ पोषण ही नहीं देता कई अन्य क्रियाओं को भी करता है. स्किन केयर के लिए भी विटामिन डी जरूरी होता है.

हड्डियों और मांसपेशि‍यों में कमजोरी

विटामिन डी की कमी का सबसे ज्यादा असर हड्डियों और मांसपेशियों पर पड़ता है. जब हड्डियों और मांसपेशियों में लगातार दर्द का अनुभव हो तो यह विटामिन डी की कमी का लक्षण हैं.

कुछ लोगों में हमेशा कमर दर्द की परेशानी देखने को मिलती है. ज्यादातर महिलाओं में कमर दर्द का कारण विटामिन डी की कमी ही होता है. अगर लंबे समय तक विटामिन डी की कमी रहती है तो हड्डियों का रोग भी होता है.

शरीर में सूजन

विटामिन डी का बड़ा संकेत है कि घाव का धीमी रफ्तार से भरना भी है. जी हां अगर आपको कहीं भी चोट लगती है और वो घाव भरने में वक्त लगता है तो इसका संकेत भी विटामिन डी से हो सकता है. दरअसल यह विटामिन सूजन को नियंत्रित करने और संक्रमण से लड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. एक अध्ययन से पता चलता है कि विटामिन डी की गंभीर कमी से पीड़ित लोगों में सूजन से पीड़ित होने की अधिक संभावना होती है, जो उपचार प्रक्रिया को रोक सकती है.

स्ट्रेस व डिप्रेशन

खास तौर से महिलाओं में विटामिन डी की कमी से तनाव की समस्या पैदा हो जाती है और इसके कारण वे लगातार उदासी महसूस करती हैं. महिलाओं में विटामिन डी की आवश्यकता अधि‍क होती है.

बालों का झड़ना

बालों का झड़ना भी इसका संकेत है. अगर आपके तेजी से बाल गिर रहें हैं तो ध्यान देने की जरूरत है कि आप अपना चेकअप करा लें.

क्या हैं विटामिन डी की कमी के कारण 

वैसे तो विटामिन डी की कमी का मुख्य कारण शरीर में धूप का कम लगना माना जाता है. लेकिन कई बार यह अन्य वजहों से भी हो सकता है. अगर आप संतुलित भोजन नहीं करते हैं और जरूरी एक्सरसाइज नहीं करते हैं तो आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो सकती है.

हाल के वर्षों में भारत जैसे देशों में भी विटामिन डी की कमी के मरीज बढ़ रहे हैं. भारत में सबसे ज्यादा विटामिन डी की कमी की शिकार महिलाएं होती हैं. क्योंकि वो हमेशा पूरे कपड़े पहनती हैं और उनके पूरे शरीर में धूप नहीं लगती है.

अगर आप नियमित तौर पर कम से कम 15 मिनट की धूप लेते हैं तो विटामिन डी की कमी होने के आसार कम होते हैं. विटामिन डी के लिए पूरे कपड़े उतार कर कम से कम 15 मिनट से 30 मिनट की धूप लेना चाहिए.

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विटामिन डी की कमी से हो सकती है ये गंभीर बीमारियां

अस्थमा और हार्ट अटैक

विटामिन डी की कमी से अस्थमा हो सकता है। विटामिन डी सूजन पैदा करने वाले प्रोटीन को फेफड़ों से दूर रखने का काम करता है। अगर इस विटामिन की कमी होती है तो सूजन बढ़ने लगती है और अस्थमा की दिक्कत हो सकती है। विटामिन डी की कमी से ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा होता है। विटामिन डी की कमी से हार्ट अटैक तक आ सकता है।

डायबिटीज का खतरा

मोटापे के साथ-साथ विटामिन डी की कमी से भी डायबिटीज हो सकता है। मोटापे और विटामिन डी की प्रॉबल्म्स एकसाथ हो जाए तो शरीर में इंसुलिन की मात्रा को असंतुलित करने वाली इस बीमारी के होने का खतरा और भी बढ़ जाता है।

एनीमिया

शरीर में विटामिन डी की कमी आपके बच्‍चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। बच्‍चों में लंबे समय तक विटामिन डी की कमी बने रहना एनीमिया रोग का कारण हो सकता है। खुन में विटामिन डी 30 नैनो ग्राम प्रति मिली लीटर से कम होने पर बच्‍चों के एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है।

दिमाग पर असर

विटामिन डी की कमी न सिर्फ हेल्दी बॉडी के लिए जरुरी होती है, साथ ही साथ यह आपके दिमाग पर भी असर डाल सकता है। विटामिन डी दिमाग में केमिकल सेरोटोनिन तथा डोपामिन बनाने में अहम भूमिका निभाता है। हेल्दी ब्रेन के लिए शरीर में विटामिन डी का स्तर ठीक होना चाहिए। 

मोटापा

विटामिन डी की कमी से मोटापा भी बढ़ने लगता है। विटामिन डी की मात्रा और शरीर में मोटापे के सूचक बॉडी मास इंडेक्स, कमर का आकार और स्कीन फोल्ड रेशीओं में गहरा संबंध है। जिन महिलाओं में विटामिन डी की कमी थी, उनमें विटामिन डी की मात्रा अधिक होने वालो की अपेक्षाकृत मोटापा तेजी से बढता है, मोटापा बढ़ने के साथ ही शरीर में विटामिन डी का स्तर कम होता जाता है।

सूजन- जलन और कोलेस्ट्रॉल का बनना

विटामिन डी की कमी से शरीर में सूजन होने लगती है।  जब शरीर को धूप नहीं मिलती तो विटामिन डी बनाने वाले तत्व  कोलेस्ट्रॉल में बदल जाते हैं। विटामिन डी का स्तर कम होने से इम्यून सिस्टम तेजी से कम होने लगता है। इससे सर्दी व जुकाम और संक्रमण और बीमारियों की शिकायत बढ़ जाती है।

टीबी, निमोनिया, कैंसर का खतरा

विटामिन डी की कमी से टीबी का खतरा भी बढ़ जाता है। जिन लोगों में ब्‍लड में विटामिन डी के स्‍तर की कमी पाई जाती है उन लोगों को निमोनिया का खतरा होता है। दुनिया भर में तकरीबन एक अरब लोग विटामिन डी की कमी से ग्रस्त हैं।विटामिन डी की कमी वीडीआर (विटामिन डी रिसेप्टर) के जरिए हमारे डीएनए पर प्रभाव डालती है और यह कैंसर के लिए जिम्मेदार हो सकती है।


जिन महिलाओं के शरीर में विटामिन डी की कमी होती है, वो उदास रहने के अलावा तनाव में भी रहती हैं। 
अगर आप शारीरिक श्रम कर रहे हैं तो पसीना आना स्वाभाविक है लेकिन बिना किसी श्रम के ही आपको बहुत पसीना आ रहा है तो यह बात सामान्य नहीं है। ऐसे में आपको अपने विटामिन डी के स्तर की जाँच जरूर करानी चाहिए। 
यदि हड्डियों में दर्द की समस्या हो तब यह विटामिन डी के लक्षणों में से एक है।
विटामिन डी की कमी के कारण आपका इम्युनिटी सिस्टम कमजोर हो जाता है जिससे आप जल्दी जल्दी बीमार पड़ते हैं और मौसम के बदलाव के दौरान सक्रिय रहने वाले वायरसों की चपेट में भी आते हैं।
विटामिन डी की कमी होने के कारण, शरीर में एनर्जी लेवल कम हो जाता है और सारा दिन थकावट महसूस होती है तथा किसी काम में मन नहीं लगता है।
शरीर में विटामिन डी की कमी होने पर आप समय से पहले वृद्ध दिखाई देने लगेंगे। चेहरे और हाथों में झुर्रियां पड़ने लग जाती हैं।
विटामिन डी की कमी होने के कारण आपका ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
विटामिन डी की कमी होने से कई बार पाचन संबंधी परेशानियां भी होने लगती हैं।
विटामिन डी की कमी के कारण, मसूड़ों संबंधी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

विटामिन डी की कमी इन चीजों से पूरी की जा सकती है

विटामिन डी3– सूर्य की रोशनी विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। इसके लिए एकदम सुबह की धूप सही रहती है। इससे चर्म रोग का खतरा भी कम होता है।

सॉल्‍मन और टुना फिश खाने से विटामिन डी की कमी पूरी हो जाती है।

अगर आपको मछली नहीं खा सकते हैं तो अंडे को डाइट में शामिल करें। अंडे का पीला भाग जरूर खाएं।

डेयरी प्रोडक्ट्स से विटामिन डी की कमी पूरी होती है। इसके लिए दूध, गाय का दूध, पनीर, दही, मक्खन, छाछ आदि का सेवन करें।

बच्चों को दूध जिस समय पीने के लिए दें उसी समय उबालें और ठंडा कर के दें। अकसर देखा जाता है कि दूध में से मलाई निकाल कर दूध गरम किया जाता है और उसे पीने के लिए दिया जाता है। मलाई निकाल लिये जाने से दूध उतना स्वास्थ्यप्रद नहीं रह जाता।

कॉड लिवर में भी विटामिन डी भरपूर मात्रा होता है। इससे हड्ड‍ियों की कमजोरी दूर होती है।

विटामिन डी की कमी होने पर गाजर खाना भी फायदेमंद होता है। गाजर का जूस पी सकें तो और बेहतर होगा।

इसके अलावा अपने आहार में सोया उत्पाद शामिल करें। सोया दूध का सेवन बहुत अच्छा रहता है।

मशरुम और मखाने का सेवन करें।

विटामिन डी काफी कम है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इंजेक्शन के माध्यम से विटामिन डी का स्तर कुछ हद तक ऊपर लाया जा सकता है। इन चीजों के सेवन से दूर रहना आपके स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होगा

तले वसायुक्त आहार, ज्यादा शक्कर वाले खाद्य उत्पादों से बचें।

जंक फूड और बाजार में मिलने वाले शीतल पेयों का सेवन करने से बचें।

कैफीन का प्रयोग सीमित करें। कैफीन विटामिन D के अवशोषण में अवरोध उत्पन्न करता है।

विटामिन डी आखिर है क्या 
विटामिन डी वसा-घुलनशील प्रो-हार्मोन का एक समूह होता है। इसके दो प्रमुख रूप हैं: विटामिन डी2 (या अर्गोकेलसीफेरोल) एवं विटामिन डी3 (या कोलेकेलसीफेरोल)। त्वचा जब धूप के संपर्क में आती है तो शरीर में विटामिन डी निर्माण की प्रक्रिया आरंभ होती है। यह मछलियों में भी पाया जाता है। विटामिन डी की मदद से कैल्शियम को शरीर में बनाए रखने में मदद मिलती है जो हड्डियों की मजबूती के लिए अत्यावश्यक होता है। इसके अभाव में हड्डियां कमजोर होती हैं व टूट भी सकती हैं। विटामिन डी कैंसर, क्षय रोग जैसे रोगों से भी बचाव करता है। 

विटामिन डी का यह होता है मुख्य कार्य 
विटामिन डी शरीर की टी-कोशिकाओं की क्रियाविधि में वृद्धि करता है, जो किसी भी बाहरी संक्रमण से शरीर की रक्षा करती हैं। इसकी मानव प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मुख्य भूमिका होती है और इसकी पर्याप्त मात्रा के बिना प्रतिरक्षा प्रणाली की टी-कोशिकाएं बाहरी संक्रमण पर प्रतिक्रिया देने में असमर्थ रहती हैं। टी-कोशिकाएं सक्रिय होने के लिए विटामिन डी पर निर्भर रहती हैं। जब भी किसी टी-कोशिका का किसी बाहरी संक्रमण से सामना होता है, यह विटामिन डी की उपलब्धता के लिए एक संकेत भेजती है। इसलिये टी-कोशिकाओं को सक्रिय होने के लिए भी विटामिन डी आवश्यक होता है। यदि इन कोशिकाओं को रक्त में पर्याप्त विटामिन डी नहीं मिलता, तो वे चलना भी शुरू नहीं करतीं हैं।

विटामिन डी की कमी का कोविड-19 से मौत का क्या है सम्बंध 

अमेरिका के नॉर्थ वेस्ट यूनिवर्सिटी (North West University of America) के वैज्ञानिक वादिम बैकमैन की अगुवाई में किये गए एक विस्तृत अध्ययन से कोविड-19 की जटिलता और विटामिन डी की शरीर में कमी का सम्बन्ध (Covid-19 complication and the relationship of vitamin D in the body) उजागर हुआ है. इस अध्ययन के बाद संभव है कोविड-19 से ग्रस्त व्यक्तियों के मौत का आंकड़ा कुछ कम किया जा सके. बैकमैन के अनुसार शुरू से ही उन्हें विभिन्न देशों में कोविड-19 से होने वाली मृत्यु दर के आंकड़ों में अंतर (Difference in mortality rate due to Covid-19) चौंकाते थे. पहले अनुमान था कि इसका कारण देशों की स्वास्थ्य सेवाओं में अंतर या फिर जनसँख्या की विविधता और आयु वर्ग हो सकता है, पर किसी भी विश्लेषण से इस अंतर को समझा नहीं जा सकता.

विभिन्न देशों के एक ही आयु वर्ग में भी मृत्यु दर में बहुत अंतर था, इसी तरह एक जैसे स्वास्थ्य सेवाओं वाले देशों में भी बहुत अंतर देखा गया.

वादिम बैकमैन के दल ने फिर अन्य कारणों को खोजना शुरू किया. इस दल को यह पता था कि बहुत अधिक सक्रिय प्रतिरोधक क्षमता से कोविड-19 के मरीजों की जटिलता बढ़ जाती है, और ऐसे मरीजों के मौत की संभावना भी अधिक रहती है.

अधिकतर मौत के मामलों में वादिम बैकमैन के अनुसार वायरस से अधिक और दूसरे कारक अधिक महत्वपूर्ण हैं जो अति-सक्रिय रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण पनपते हैं. इसलिए उनका ध्यान विटामिन डी की तरफ गया क्योंकि दुनिया में बहुत सारे ऐसे क्षेत्र हैं जहां के निवासियों में विटामिन डी की कमी रहती है.

Vitamin D increases immunity

विटामिन डी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता तो है, पर साथ ही उन्हें अति-सक्रिय होने से रोकता भी है. इस दल ने फिर चीन, इटली, फ्रांस, जर्मनी, ईरान, साउथ कोरिया, स्पेन, स्विट्ज़रलैंड, इंग्लैंड और अमेरिका के कोविड-19 के मरीजों का विस्तृत विश्लेषण किया और इनकी मेडिकल हिस्ट्री से इनमें विटामिन डी की कमी का आकलन किया.

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This Post Has 2 Comments

  1. Shiva parbhat singhal

    Brilliant information

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